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- मिरहची थानाध्यक्ष को एसएसपी ने हटाया, इता न्यूज इन हिन्दी -अमर उजाला बेहतर अनुभव के लिए अपनी सेटिंग्स में जाकर हाई मोड चुनें। एटा। कानून व्यवस्था संतोषजनक नहीं होने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने थानाध्यक्षों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मिरहची थानाध्यक्ष को हटा दिया है। इससे पूर्व भी एक थानाध्यक्ष का भी तबादला किया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय मोहन शर्मा ने चार दिन पूर्व जसरथपुर थानाध्यक्ष को हटाया था। इसके बाद मिरहची थानाध्यक्ष को भी एसओ के पद से मुक्त किया है। जिन्हें मिरहची से शिकायत प्रकोष्ठ प्रभारी नियुक्त किया गया। जबकि उनके स्थान पर शिकायत प्रकोष्ठ प्रभारी शौकत अली खां को थानाध्यक्ष मिरहची बनाया गया है।
एक रिसर्च से पता चला है कि अगर व्यक्ति कुदरती वातावरण में रहता है तो उसकी आयु कई साल तक बढ़ सकती है साथ ही वह कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी बचा रहता है। कुछ विशेष अपवादों को छोड़कर दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान हो, जो लंबी उम्र जीने की इच्छा न रखता हो। आपकी लंबी उम्र जीने की इच्छा पूरी हो सकती है। बशर्ते आपके घर के आसपास अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगे हों। हाल ही में अमेरिका में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि अगर व्यक्ति कुदरती वातावरण में रहता है तो उसकी आयु कई साल तक बढ़ सकती है साथ ही वह विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी बचा रहेगा। अगर आप भी लंबी उम्र जीने की आकांक्षा रखती हैं और चाहती हैं कि आपके शरीर में किसी प्रकार की शिथिलता न आने पाए तो जहां तक संभव हो आपको शुद्ध हवा में रहने का प्रयास करना चाहिए। अगर आपका आवास खुले वातावरण में है तो फिर कहना ही क्या, लेकिन अगर आपका आवास ऐसी जगह में नहीं है तो आपको थोड़ा सा अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए। आपको कोशिश करनी चाहिए न केवल आपको, बल्कि आपके परिवार के अन्य सदस्यों को भी खुली हवा में अधिक से अधिक सांस लेने का मौका मिले। इसके लिए जरूरी है कि अपने घर के आसपास और घर पर विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे अवश्य लगाएं। कोविड-१९ विडियो: देखें कैसे एक नए तरह से तेज़ी से फैल रहा है कोरोना वायरस! पेड़-पौधे कुदरत की दी हुई अनमोल नियामत हैं। अगर आपके घर के आसपास और घर में पेड़-पौधे लगे हैं तो आपकी और आपके परिवार के लोगों की उम्र कुदरती रूप से बढ़ जाती है। कारण, वाहन प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण और अन्य प्रकार के विभिन्न प्रदूषणों के कारण हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड व कार्बनडाईऑक्साइड आदि गैसों का अनुपात बढ़ जाता है, जो शरीर के लिए अत्यंत नुकसानदेह होता है। गौरतलब है कि इन गैसों के सूक्ष्म अणु बड़ी संख्या में वायुमंडल में फैल जाते हैं। इस स्थिति में सांस लेने पर शरीर में ऑक्सीजन कम मात्रा में पहुंचती है। इस हाल में शरीर के समस्त अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। नतीजतन वे सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पाते। इस स्थिति में आप दीर्घायु की कल्पना कैसे कर सकते हैं? अमेरिका के हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार हाल के दशकों में अमेरिकी जनता की औसत उम्र में कई साल का इजाफा हुआ है। इसका एक प्रमुख कारण लोगों का अधिक से अधिक वक्त तक शुद्ध हवा में रहना है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि लोगों की औसत उम्र के बढ़ने का एक कारण अमेरिकी गवर्नमेंट द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के सार्थक प्रयास भी हैं।
सुहागनगरी में भाई- बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार उत्साह के साथ मनाया गया। रक्षाबंधन पर बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर उनकी दीर्घायु की कामना की। वहीं भाइयों ने बहनों की रक्षा करने का संकल्प लिया। गुरुवार सुबह होते ही घर-घर में रक्षाबंधन के त्योहार की तैयारियां शुरू हो गईं। घर की रसोई में खीर, सिवइयां, पूड़ी, पकवान बनाए जाने लगे। वहीं परिवार की बुजुर्ग महिलाएं घर आंगन में दरवाजे के दोनों ओर गेरू से नाग देवता की आकृति बनाने में जुट गईं। तत्पश्चात महिलाओं ने नाग देवता को खीर, सिवइयों की भोग लगा कर पूजा-अर्चना की। नाग देवता से परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखने की प्रार्थना की गई। साथ ही चूल्हा में अग्यारी कर घर के पुरखों को भोग लगा कर उनकी पूजा-अर्चना की गई। इस के बाद घर के आंगन में उगाई गईं भुजरियों के राखी बांध कर पूजन किया। इधर बहनों ने रोली चावल से अपने भाइयों का तिलक किया। साथ ही भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना की। इस दौरान भाइयों ने अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प दोहराया। साथ ही बहनों को वस्त्र, मोबाइल आदि उपहार प्रदान किए। रक्षाबंधन के त्योहार पर बच्चों में काफी उत्साह नजर आया। सुबह होते ही बच्चे नहा धोकर तैयार हो गए। नए वस्त्र पहन कर बच्चे इधर से उधर चहकने लगे। अनेक बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेल कर मस्ती करने लगे। रक्षाबंधन पर बड़ों भाइयों से जहां छोटी बहनें मन पसंद गिफ्ट पाने की जिद कर रही थीं। वहीं छोटे भाई अपनी बड़ी बहनों से मन पसंद कार्टून डोरेमोन, मोटू पतलू की राखी बंधवाने के साथ मनचाहे गिफ्ट के लिए मचल रहे थे। रक्षाबंधन के त्योहार पर बाजार ग्राहकों से गुलजार रहे। बाजार में दिन भर खरीदारी होती रही। राखी और मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ जुटी रही। मिठाई की दुकानों पर घेवर की खूब बिक्री हुई। बहनों ने जहां भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदी। वहीं भाई अपनी बहनों के लिए विविध तरह के उपहार खरीदते रहे। रक्षाबंधन का त्योहार सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। व्हाट्स एप, फेसबुक पर रक्षाबंधन के संदेश का खूब आदान-प्रदान किया। जो बहनें अपने भाइयों के पास नहीं आ सकीं, उन्होंने मोबाइल पर व्हाट्स एप और फेसबुक से अपना संदेश भेजा। वहीं भाइयों ने मोबाइल से बात कर बहनों की कुशलता जानी।
अगर आपके बच्चे के दांत निकल रहे हैं तो जरूरी है कि आप अलर्ट हो जाएं। ये दांत छह महीने से लेकर दो साल तक पूरी तरह से आ जाते हैं। इस समय उनके मसूड़े फूल जाते हैं और उनमें खुजली होती है जिससे वे अपना हाथ या कोई भी चीज मुंह में डालते हैं। ऐसे में परिवार वाले समझते हैं कि दांत निकलने की वजह से उसे दस्त लगे हैं जबकि ऐसा गंदे हाथ या दूषित वस्तु को मुंह में डालने से होता है। ऐसे में आप इन उपायों से अपने बच्चे की देखभाल कर सकते हैं। माता-पिता बच्चे के आसपास रखी चीजों को व्यवस्थित रखें क्योंकि कई बार बच्चे किसी भी चीज को उठाकर खुद को या मसूड़ों को नुकसान पहुंचा लेते हैं। ब्रेस्ट फीडिंग या बॉटल से दूध पिलाने के बाद एक अंगुली में साफ, मुलायम और गीला कपड़ा लपेटें और उसके मसूड़े पर हल्का सा रगड़ें। दिन में ऐसा एक बार करें। इससे उसके मुंह से किसी तरह की दुर्गंध नहीं आएगी। जब बच्चों के दांत निकलने वाले होते हैं तो उन्हें बायोकॉम्बिनेशन २१ दी जाती है। यह आयरन और कैल्शियम का मिश्रण होती है। कैल्शियम दांतों की वृद्धि और आयरन सूजन व खुजली को दूर करता है। विशेषज्ञ के अनुसार बच्चे के मसूड़े पर दिन में दो से तीन बार शहद लगाएं। बालचक्रभद्र (पाउडर) दवा को एक चम्मच शहद में मिलाकर दिन में दो बार बच्चे को देने से उसे खुजली की समस्या नहीं होती। हर्विंदासव टॉनिक को दिन में दो से तीन बार दो चम्मच दी जाती है। दंत रोग विशेषज्ञ के अनुसार जब बच्चा कम उम्र का हो तो दूध या कुछ भी खाने के बाद उसे कुल्ला कराकर मुंह की सफाई करानी चाहिए। दो साल की उम्र तक बच्चे के दांत पूरी तरह से आ जाते हैं इसलिए इस समय से ही उन्हें ब्रश करवाना शुरू कर देना चाहिए। अगर बच्चे के दांत समय रहते नहीं आएं तो डॉक्टर से संपर्क करें क्योंकि कई बार आनुवांशिक कारणों या कुपोषण के कारण ऐसा होता है।
#फैक्ट: सलमान खान की फिल्म 'ट्यूबलाइट'.. ६ बातें जो आप नहीं जानते! #फैक्ट: सलमान खान की फिल्म 'ट्यूबलाइट'.. ६ बातें जो आप नहीं जानते! कबीर खान के निर्देशन में बन रही फिल्म 'ट्यूबलाइट' अब धीरे धीरे फिर से सुर्खियों में छा रही है। सलमान खान स्टारर यह फिल्म ईद के मौके पर रिलीज होने वाली है। हाल ही में निर्देशक कबीर खान ने बताया कि फिल्म का ट्रेलर जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाली है। ट्यूबलाइट में चीनी एक्ट्रेस ज्हू ज्हू सलमान के अपोजिट दिखेंगी। बता दें, यह पहली फिल्म होगी जो भारत के साथ साथ ही चीन में भी रिलीज होगी। इससे पहले बॉलीवुड फिल्में ३ इडियट्स, पीके, बाहुबली, हैप्पी न्यू ईयर भी चीन में रिलीज की गई थीं, लेकिन भारत में रिलीज होने के ६-८ महीने में रिलीज होने के बाद। काफी स्टूडियो अभी से फिल्म के वर्ल्डवाइड डिस्ट्रिब्यूशन राइट्स खरीदने के लिए काफी बड़ी रकम देने को तैयार हैं। हालांकि सलमान खान प्रोडक्शन ने अभी डील फाइनल नहीं की है।
बरोसेल्स: नाटो ने इराकी सैनिकों प्रशिक्षण शुरू कर दी है ताकि वह धन इस्लामिया सेनानियों स्थापित किए हुए बम को निष्क्रिय बनासके। गठबंधन ने आज कहा कि कार्यक्रम का विस्तार पड़ोसी देश जॉर्डन तक पहले ही की जा चुकी है। ५ सप्ताह लंबे बल में कम से कम तीस सैनिक भाग ले रहे हैं। उन्हें घातक विकसित विस्फोटक उपकरणों को निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। अभी इस क्षेत्र इराकी सेना भूमि सुरंगों से मुक्त करने और विस्फोट उपकरणों को निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण जॉर्डन हासिल किया करती थी। इराकी सेना को कुशल बनाने का मतलब इराक सुरक्षित देश बनाना होगा। मध्य पूर्व में यह काफी स्थिर देश होगा। गठबंधन के सदस्यों ने सहमति जताई है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तार किया जाए। वारसॉ में आयोजित शिखर सम्मेलन में यह फैसला किया गया।
नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) युवाओं के लिए खुशखबरी है। दरअसल, भारतीय सेनाएं युवाओं को सेना से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए इंडियन आर्मी एक नया प्लान लेकर आ रही है जिसके मुताबिक सेना ने तय किया है कि शॉर्ट सर्विस कमिशन में ज्यादा से ज्यादा युवा शामिल हो इसके लिए बढ़िया सैलेरी पैकेज, पेड स्टडी लीव और १० या १४ साल का कार्यकाल ख़त्म होने पर अच्छी-खासी रकम भी दी जाएगी। बताया गया कि सेना अधिकारियों की कमी से जूझ रही है ऐसे में काडर को पुनर्गठित करने के मकसद से ये नया कदम उठाया जाने वाला है। इस नए पैकेज की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जानकारी मिली है कि १० साल में सर्विस छोड़ने वाले अधिकारियों को १७ लाख रुपये तक मिलेंगे। जबकि अगर १४ साल की सर्विस पूरी की जाती है तो ३८ लाख रुपए दिए जाएंगे। नए पैकेज के मुताबिक हर साल की दो महीने की सैलरी उन्हें जोड़कर उन्हें आखिर में दी जानी है। इसके तहत शुरुआती १० सालों तक के लिए प्रति वर्ष दो माह की सैलरी और आखिरी के ४ सालों ४ माह की सैलरी दी जाएगी। साथ ही शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत तैनात अधिकारियों का २० साल का कार्यकाल पूरा हो सके और वे पेंशन के भी हकदार हों, इसके लिए उन्हें डिफेंस सिक्यॉरिटी कॉर्प्स या फिर नैशनल कैडट कॉर्प्स में भेजा जा सकता है। साथ ही प्रफेशनल कोर्स करने के लिए फुली पेड स्टडी लीव और अन्य लाभों पर भी विचार किया जा रहा है।
एनटीपीसी लिमिटेड, जो भारत की सबसे बड़ी विद्युत यूटीलिटी है, ने उच्चं स्तणर के निष्पा।दन को बनाए रखने, कारोबार की संधारणीयता को बढ़ाने, परिवेशीय रूप से संधारणीय विद्युत का उत्पादन करने, ग्रीनर पर्यावरण बनाए रखने, प्राकृतिक संसाधनों, जैसे कि ऊर्जा, जल आदि को संरक्षित करने की दिशा में कंपनी के कदम का उल्लेनख करते हुए ''पावर टू ग्रो रिस्पां सिबली'' दूसरी संधारणीय रिपोर्ट जारी की। डॉ. अरुप रॉय चौधरी, सीएमडी और एनटीपीसी के निदेशकों द्वारा वर्ष २०१२-१३ के लिए जारी की गई रिपोर्ट एक स्वर-घोषित ए + रिपोर्ट है और जीआरआई जी ३.१ रिपोर्टिंग ढांचे के अनुसार है, जिसमें इलेक्ट्रि क यूटीलिटी क्षेत्र के अनुपूरक (ईयूएसएस) अनुवर्ती सहित रिपोर्टिंग नियम एवं आवश्यंक संकेतकों का उपयुक्त विचारण शामिल है। रिपोर्ट आश्वाशसन प्रदाता, मैसर्स ब्यूहरो वेरीटास सर्टीफिकेशन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ए ए १००० २००८ आश्वा सन मानक के अनुसार बाह्य रूप से आश्वा सित है। शीर्षक : एनटीपीसी लिमिटेड, जो भारत की सबसे बड़ी विद्युत यूटीलिटी है, ने वर्ष २०१२-१३ के लिए ''पावर टू ग्रो रिस्पॉेसिब्लीज'' दूसरी संधारणीय रिपोर्ट जारी की। डॉ. अरुप रॉय चौधरी, अध्यिक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनटीपीसी ने रिपोर्ट को श्री एन. एन. मिश्रा, निदेशक (प्रचालन), श्री एन. के. झा, निदेशक (तकनीकी), श्री यू. पी. पाणी, निदेशक (मानव संसाधन), और श्री एस. सी. पांडे, निदेशक (परियोजना) के साथ नई दिल्ली. में जारी किया।
दमोह। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष सुबोध कुमार जैन ने सदस्य डॉ. सपना जैन व राजेश कुमार ताम्रकार से सहमत होकर ९ परिवादियों द्वारा केबीसीएल इंडिया लिमिटेड में जमा की गई राशि को ९ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज सहित देने का अवार्ड पारित किय है। इसके अलावा सेवा में कमी में मानते हुए १५ हजार तथा वाद व्यय के ३ हजार रूपए भी देने के आदेश दिया। परिवादी के अधिवक्ता किशोरी लाल ताम्रकार ने बताया कि परिवादीगण दिनेश दीक्षित, प्रभा दीक्षित, महेश अहिरवार, मोहनी दीक्षित, मोहम्मद अतहर, अशोक विश्वकर्मा, कविता विश्वकर्मा, प्रीति पटेल ने केबीसीएल इंडिया लिमिटेड कल्पतरू आगरा के दमोह स्थित कार्यालय में विभिन्न किश्तों में व एक मुश्त राशि अलग-अलग तारीखों में जमा की थी, ताकि कंपनी द्वारा उन्हें जमीन अथवा राशि परिपक्वता दिनांक पर ब्याज सहित अदा की जाएगी। लेकिन परिवादीगणों की उक्त राशि का अनावेदक केबीसीएल द्वारा वापस नहीं की गई थी और न ही उन्हें जमीन आवंटित की गई थी। परिवादीगणों द्वारा अनावेदकों को शिकायत एवं अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भी दिए गए थे। इसके बावजूद भी कंपनी ने राशि नहीं दी। तब परिवादियों ने उपभोक्ता फोरम में मामला प्रस्तुत किया था।
चित्त की शुद्धि का भले ही किसी को ज्ञान न हो, पर चित्त की अशुद्धि का तो ज्ञान मानव-मात्र को है; क्योंकि यदि ऐसा न होता तो चित्त की शुद्धि का प्रश्न ही उत्पन्न न होता । विचार यह करना है कि हमारी अपनी दृष्टि में अपने में क्या अशुद्धि प्रतीत होती है ? जब हम अपने चित्त को अपने अधीन नहीं पाते हैं तब यह भास होता है कि चित्त में कोई दोष है । यदि हमारा चित्त हमारे अधीन होता, तो हम चित्त के लगाने और हटाने में अपने को सर्वदा स्वाधीन पाते । पर ऐसा करने में हम अपने को असमर्थ पाते हैं, हमारी असमर्थता ही हमें यह बता देती है कि हमारे चित्त में कोई अशुद्धि है । किसी भी अस्वाभाविकता का आ जाना ही अशुद्धि है । इस दृष्टि से हमें अनुभूति के आधार पर यह जान लेना है कि हमारे चित्त में क्या अस्वाभाविकता आ गई है, जिससे हम अपने चित्त को अपने अधीन नहीं रख पाते हैं । संकल्पों की उत्पत्ति तथा पूर्ति को ही हम अपना जीवन मान बैठें हैं । यद्यपि संकल्पों की उत्पत्ति से पूर्व भी जीवन है और संकल्प-पूर्ति के पश्चात् भी जीवन है; परन्तु हम उस स्वाभाविक जीवन की ओर ध्यान नहीं देते और संकल्प की उत्पत्ति तथा उसकी पूर्ति की द्वंद्वात्मक परिस्थिति को ही जीवन मान लेते हैं, यही अस्वाभाविकता है । इस अस्वाभाविकता के प्रभाव से ही चित्त अशुद्ध हो गया है । इस दृष्टि से संकल्पों की उत्पत्ति-पूर्ति में ही जीवन-बुद्धि स्वीकार करना और संकल्पों से अतीत के जीवन की जिज्ञासा तथा लालसा जाग्रत न होना ही चित्त की अशुद्धि है । - (शेष आगेके ब्लागमें) 'चित्त-शुद्धि भाग-१' पुस्तक से, (पाग नो. १3) ।
निर्देशन सेवाएं क्या है? इन समस्त सेवाओं का उद्धेश्य यद्यपि पृथक-पृथक हैं। परन्तु फिर भी निर्देशन प्रदान करने की दृष्टि से इनका समन्वित महत्व है। विशेषकर भारतीय परिस्थितियों के सन्दर्भ में इन सेवाओं के समन्वय की अधिक आवश्यकता है। इसके साथ ही इनके समुचित बोध, विकास एवं उपयोग की भी समान रूप से आवश्यकता है। सूचनाओं का समस्त प्रकार के निर्देशनों में विशिष्ट महत्व होता है। सूचनाओं की जानकारी छात्र एवं निर्देशन प्रदाताओं दोनों के लिए आवश्यक है। वैयक्तिक निर्देशन के लिए व्यक्ति की पारिवारिक तथा सामाजिक परिस्थितियों तथा उसकी विशेषताओं से सम्बन्धित सूचनाए आवश्यक होती हैं। शैक्षिक निर्देशन हेतु पाठ्यक्रमों, शैक्षिक अवसरों, औपचारिक तथा अनौपचारिक अधिगम व्यवस्थाओं, पद्धतियों के सम्बन्ध में सूचनाए प्राप्त करनी आवश्यक होती हैं। व्यावसायिक निर्देशन के लिए विभिन्न व्यावसायों हेतु आवश्यक योग्यताए एवं संस्थानों में रिक्त स्थानों के बारे में सूचनाए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण होती हैं। इन विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त सूचनाओं का स्वरूप सदैव परिवर्तित होता रहता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक मानवीय स्थिति अपने स्वभाव के अनुसार अत्यन्त परिवर्तनशील, विकासशील एवं गतिशील सन्दभो से संयुक्त होती है। उपरोक्त परिभाषा से यह स्पष्ट होता है कि परामर्श का मुख्य उद्धेश्य व्यक्ति की वैयक्तिक रूप में सहायता करना है। परामर्श के अन्तर्गत परामर्शदाता की दी गयी सलाह अथवा सुझाव को दूसरे व्यक्ति अर्थात्, सेवार्थी पर थोपा नहीं जाता, वरन् यह प्रयास किया जाता है कि छात्र ही अपने व्यावसायिक एवं शैक्षिक अवसरों के सम्बन्ध में विचारणीय एवं महत्वपूर्ण तथ्यों को संकलित एवं व्यवस्थित करे तथा स्वयं की योजनाओं के सन्दर्भ में उनका मूल्यांकन कर, सही निर्णय ले। विचारणीय तथ्य दो प्रकार के होते हैं-;१द्ध वे तथ्य जो व्यक्ति की सीमाओं एवं क्षमताओं के परिचायक हैं। इन तथ्यों को सामान्यत: निर्देशन की सेवाओं, जैसे वैयक्तिक सामग्री सेवा, आत्म अनुसूची सेवा, सूचना सेवा इत्यादि के द्वारा संकलित किया जाता है। ;२द्ध वे तथ्य तो व्यावसायिक जगत एवं शैक्षिक अवसरों से सम्बन्धित होते हैं। इन तथ्यों को पूर्णरूप से ज्ञात करना आवश्यक होता है। किशोर अवस्था में सामान्यत: यह अपेक्षित होता है कि परामर्शदाता छात्र को केवल तथ्यों के मूल्यांकन में ही सहायता प्रदान न करें वरन् उनको तथ्यों के आधार पर वास्तविक निर्णय लेने की ओर उन्मुख करें। व्यक्ति में आत्मबोध की क्षमता का विकास करने की दृष्टि में आत्म-अनुसूची सेवा का विशेष महत्व होता है। इस सेवा के आधार पर व्यक्ति को आन्तरिक विशेषताओं एवं बां सम्बोधितयों के सम्बन्ध में वस्तुनिष्ठ जानकारी प्रदान की जाती है। इस जानकारी को प्राप्त करके भावी योजनाओं का निर्माण करने, अनुकूल अवसरों की दिशा में प्रयास करने तथा अपनी आन्तरिक शक्तियों की दिशा में सम्बद्ध प्रयास करने हेतु महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होती है। इस सेवा के आधार पर सेवार्थी को स्वयं में निहित योग्यताओं, क्षमताओं एवं भावी सम्भावनाओं की जानकारी प्राप्त होती है। इस प्रकार की जानकारी प्रदान करने के लिए व्यक्ति की पूर्व सम्बोधितयों, सम्बन्धित आलेखों एवं पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षिक परिवेश का प्रमुख महत्व होता है। इसके माध्यम से व्यक्ति के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के परीक्षणों का प्रयोग भी, इस उद्धेश्य की प्राप्ति हेतु किया जाता है। इन समस्त माध्यमों से प्राप्त जानकारी का व्यक्ति की शैक्षिक, पारिवारिक एवं व्यावसायिक प्रगति में विशिष्ट योगदान रहता है। इस जानकारी के अभाव में, सतत्, संगत एवं सम्भावित प्रगति सम्भव नहीं है। आत्म अनुसूची सेवा से प्राप्त परिणामों का व्यक्ति जीवन की किसी विशिष्ट परिस्थिति से ही सम्बन्ध नहीं है वरन् यह परिणाम सतत् रूप से जीवन की विभिन्न परिस्थितियों के सन्दर्भ में निर्णय लेने हेतु सहायक सिण् होते हैं इस प्रकार आत्म-अनुसूची सेवा के उपरोक्त महत्व के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आत्म अन्वेषण स्वयं को पहचानने अथवा आत्म-बोध की दृष्टि से आत्म-अनुसूची सेवा एक ऐसी प्रकिया है जो जीवन पर्यन्त निरंतर चलती रहती है। शैक्षिक, व्यावसायिक, अथवा व्यक्तिगत निर्देशन हेतु विभिन्न प्रकार की आधार सामग्री को प्रयुक्त किया जाता है। मनोवैज्ञानिक परीक्षण, मूल्यांकन की आत्मनिष्ठ एवं वस्तुनिष्ठ विधिया, इस आधार-सामग्री को उपलब्ध कराने में सर्वाधिक सहायक होती हैं। इस आधार सामग्री का संकलन अथवा उसे व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना उल्लेखनीय महत्व रखती है, क्योंकि इस समाग्री के वस्तुनिष्ठ एवं समुचित प्रयोग पर ही किसी भी प्रकार के निर्देशन की वस्तुनिष्ठता अथवा प्रभावशीलता आधारित होती है। सेवार्थी के सम्बन्ध में जितने भी आवश्यक तथ्य एवं सूचनाए एकत्रित की जाती हैं उन सभी के व्यवस्थित एवं समन्वित रूप को आधार सामग्री के रूप में सम्बोधित किया जाता है। मायर्स के अनुसार विभिन्न प्रकारों की सेवाओं यथा-स्थानन, उपबोधन, अनुगामी सेवाओं इत्यादि में छ: प्रकार की व्यक्तिगत सामग्रियों का संकलन किया जाता है। इन उधार सामग्रियों के संकलन की प्रकिया को ही व्यक्तिगत सामग्री संकलन सेवा के नाम से जाना जाता है। सामान्य आकड़े (जनरल डाटा)-सेवार्थी से संपर्क करने में तथा सेवार्थी से सम्बन्धित विशिष्ट व्यक्तियों से सेवार्थी के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने हेतु सामान्य आधार सामग्री के संकलन की आवश्यकता होती है इस आधार सामग्री के अन्तर्गत सेवार्थी का नाम, पता, पिता का नाम, दूरभाष संख्या, विद्यालय का नाम, कक्षा-अध्यापक का नाम, विषय-अध्यापक का नाम, कक्षा, वर्ग, विषय आदि से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जाती है। शारीरिक आकड़े (फिजिकल डाटा)-इस प्रकार की सामग्री के अन्तर्गत सेवार्थी की आयु, प्रजाति, लग, कद, वजन आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की जाती है। विभिन्न प्रकार के जैविक तथ्यों जैसे-शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य, स्नायुमण्डल एवं शरीर वफी अन्य प्रणालियों के सम्बन्ध में सूक्ष्म जानकारी प्राप्त करना, इस प्रकार की सामग्री को संचित करने का उद्धेश्य होता है। इसके अतिरिक्त सेवार्थी से सम्बन्धित शारीरिक विकारों, शारीरिक विकलांगताओं एवं रोगों के सम्बन्ध में भी सूचनाएं एकत्रित की जाती हैं। सामाजिक पर्यावरण आकड़े (सोशियल एन्वायरोनमेंट डाटा)-व्यक्ति से सम्बन्धित समस्त प्रकार की आधार सामग्रियों का वस्तुनिष्ठ रूप से मूल्यांकन करने हेतु सामाजिक पर्यावरण से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करना नितान्त आवश्यक होता है सामाजिक वातावरण से व्यक्ति के समायोजन की सीमा के सन्दर्भ में प्रकाश डालने हेतु भी इस प्रकार की जानकारी अपेक्षित होती है। व्यक्ति के सामाजिक स्तर, सामाजिक व्यवहार, अथवा जीवन-शैली का परिचय प्राप्त करके व्यक्ति की शैक्षिक आकांक्षाओं, व्यावसायिक योजनाओं, व्यक्तिगत जीवन से सम्बन्धित आदर्शो तथा किसी विशिष्ट परिस्थिति में व्यक्ति के व्यवहार एवं सम्बोधितयों की सम्भावनाओं के सन्दर्भ में अन्तदृष्टि का विकास करने की दृष्टि से सहायता प्राप्त होती है। निष्पत्ति से सम्बन्धित आकड़े (डाटा रिलेटेड तो थे अचीवमेन्ट)-शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर, शिक्षार्थी से सम्बन्धित निष्पत्ति का आलेख, प्रमाण-पत्रों, परीक्षा-कार्डो, संचयी अभिलेखों आदि के माध्यम से सुरक्षित रखा जाता है। शैक्षिक निष्पत्ति से सम्बन्धित ये आलेख ही प्रमुख रूप से निष्पत्ति सम्बन्धी आधार सामग्री के रूप में उपयोगी होते हैं। इन आलेखों के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हो जाती है कि विभिन्न शैक्षिक स्तरों पर सेवार्थी का सम्बोधित स्तर किस प्रकार का रहा है? पाठ्यक्रम का चयन करने अथवा व्यवसाय का चयन करने की दृष्टि से, इस प्रकार की आधार सामग्री का विशिष्ट महत्व होता है। अत: यह प्रयास किया जाना चाहिए कि इस प्रकार की सूचनाओं को संचित एवं व्यवस्थित करते समय वस्तुनिष्ठता एवं विश्वसनीयता का अनिवार्य रूप से मयान रखा जाए। शैक्षिक एवं व्यावसायिक योजनाओं से सम्बन्धित आकड़े (डाटा रिलेटेड तो एडउकेशनल एंड वोकेशनल प्लान)-उपरोक्त समस्त प्रकार की आधार सामग्री का संकलन करने के अतिरिक्त व्यक्ति की शैक्षिक एवं व्यावसायिक योजनाओं के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करना भी आवश्यक होता है। सेवार्थी से, उसके अभिभावकों, मित्रों अथवा शिक्षकों से इस सम्बन्ध में आधार सामग्री प्राप्त की जा सकती है। यह सामग्री व्यक्तिनिष्ठ प्रविधियों के आधार पर ही संकलित की जाती है। इस सन्दर्भ में यह ज्ञात किया जा सकता है कि सेवार्थी अपनी शैक्षिक सम्बोधितयों, शैक्षिक प्रगति अथवा व्यावसायिक योजना के सन्दर्भ में किस प्रकार का दृष्टिकोण रखता है अथवा इन दिशाओं में उसने कौन-कौन से निर्णय लिए हैं? शैक्षिक एवं व्यावसायिक योजनाओं से सम्बन्धित आधार सामग्री का संकलन करने की प्रकिया के अन्तर्गत यह मयान रखना चाहिए कि इन योजनाओं पर आधारित सूचनाओं का संचय अधिक प्रामाणिक साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाए। मनोवैज्ञानिक आकड़े (साइकोलॉजिकल डाटा)-व्यक्ति से सम्बन्धित विभिन्न मानसिक विशेषताओं यथा-बुद्धि का स्तर, विशिष्ट बौण्कि क्षमता अभिरूचि एवं व्यक्तित्व से सम्बन्धित विभिन्न गुणों की जानकारी प्राप्त करना मनोवैज्ञानिक आधार प्रदन के संकलन का उद्धेश्य होता है शैक्षिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत निर्देशन हेतु इस प्रकार की आधार प्रदन का प्रयोग समान रूप से महत्वपूर्ण होता है। बुद्धि से सम्बन्धित विशिष्ट तथ्यों की जानकारी के लिए बुद्धि परीक्षणों का प्रयोग किया जाता है। अल्प्रेफड बिने, साइमन, टरमन, राइस, कामथ, एम. जलोटा आदि के द्वारा इस प्रकार से अनेक बुद्धि परीक्षण विकसित किए गए हैं। इन समस्त परीक्षणों के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही व्यक्ति को यह निर्देशन प्रदान किया जा सकता है कि उसकी बौद्धिक योग्यता का स्तर क्या है? तथा उसे किस प्रकार के व्यवसाय अथवा विषयों का चयन करना चाहिए। बुद्धि के अतिरिक्त सेवार्थी की अभिरूचि एवं रूचि के सम्बन्ध में प्राप्त जानकारी भी विशेषकर शैक्षिक एवं व्यावसायिक निर्देशन प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। इसी प्रकार व्यक्ति के व्यक्तित्व से सम्बन्धित विभिन्न विशेषताए भी उसके व्यावसायिक जीवन, शैक्षिक सम्बोधितयों, सामाजिक समायोजन आदि को प्रभावित करती है। व्यक्तित्व से सम्बन्धित इन विशेषताओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के परीक्षणों का विकास किया गया है, साथ ही विभिन्न प्रकार की अनुसूचियों एव निर्धारण मापनिया भी सेवार्थी की व्यक्तित्व से सम्बन्धित विभिन्न गुणों की जानकारी प्राप्त करने में सहायक होती है। अधिकतर देशों में निर्देशन आन्दोलन अभी हुआ है। भारत में तो निर्देशन आन्दोलन अपनी शैशवावस्था में चल ही रहा है। भारत में निर्देशन आन्दोलन चलाने का श्रेय कोलकना विश्वविद्यालय को जाता है। माध्यमिक विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की बढ़ती हुई संख्या से निर्देशन सेवाओं को मान्यता मिलने लगी है ताकि विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रमों तथा भविष्य के कार्यक्रमो तथा व्यवसाय के चयन में उनकी सहायता की जा सके। हमारे देश के शिक्षा नियोजकों ने भी निर्देशन सेवाओं के महत्व को पहचानना आरम्भ कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा का सफलतापूर्ण आयोजन शैक्षिक और व्यावसायिक निर्देशन के सुव्यवस्थित कार्यक्रमो पर आधारित है। यह सुव्यवस्थित कार्यव्म विद्यार्थियों और उनके माता-पिता की अनुकूल पाठ्यक्रमों के चयन में सहायता करते हैं। बहु-उपेशीय विद्यालयों की असफलता इस प्रकार के सुव्यवस्थित कार्यक्रमो के अभाव के कारण हुई।
सरपंच छगन गामड॒ ग्राम पंचायत मोईचारणी द्वारा भी लिखित आवेदन में बताया गया कि वर्ष २०१३ में बनाए जा रहे इस मार्ग पर केवल विभाग द्वारा डामर ही कुछ जगह पर बिछाया गया रोड के बीच में कई जगह पर डामर नहीं बिछाया गया ना ही पुलिया का निर्माण भी नहीं किया गया इस मार्ग की जांच के संबंध में अधिकारी द्वारा मेरे कोई कथन नहीं लिए गए जबकि कई वर्ष पूर्व गोदडीया, मोवीचारणी, करनगढ़, तीनों जगह का सरपंच एक ही हुआ करता था पूर्व सरपंच द्वारा ही गिट्टी जीएसबी मार्ग का पुराने समय में ही निर्माण कार्य करवाया गया जबकि विभाग द्वारा यहां पर केवल डामर ही कुछ जगह पर बिछाया गया आज भी इस मार्ग से निकलने में परेशानी हो रही है। शिकायतकर्ता द्वारा मय दस्तावेजों के आधार पर मार्ग के फोटो सहित मापदंड पुस्तिका सहित दस्तावेजों के आधार पर शिकायत की गई थी लेकिन लोक निर्माण विभाग के एसडीओ द्वारा गुपचुप तरीके से फर्जी जांच प्रतिवेदन बनाकर भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश की गई। लोक निर्माण विभाग में हुए भ्रष्टाचार की जांच अन्य विभाग को करने के लिए दिनांक ११ /९/ 201९ को लोक निर्माण विभाग के अधिकारी से नहीं कराते हुए अन्य विभाग से जांच करवाई जाए पत्र लिखा था पत्र में यह बताया गया था कि अगर विभाग यह जांच करता है तो यह जांच प्रभावित होगी और आखिर जांच में लीपापोती की गई।
साहेबगंज, (हि.स.)। केंद्र और राज्य सरकार की नजर बाढ़ पीड़ितों को दी जा रही राहत, पर है संसाधन की कमी । पदाधिकारी और कर्मचारी राहत कैम्पो पर सामग्री पहुचाने में कोताही बरत रहे हैं। ऐसे लोगो की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुँचायी जाएगी। यह बातें साहेबगंज प्रखण्ड के बंगरा निजामत मध्य विद्यालय स्थित राहत कैम्प का निरीक्षण करने के उपरांत पूर्व मंत्री डॉ महाचन्द्र प्रसाद सिंह ने पत्रकारों से कही । पूर्व मुखिया और वर्तमान मुखिया ने शिकायत कि है कि चार दिन से कैम्प चल रहा है करीब १४०० बाढ़ पीड़ित भोजन कर रहे हैं,लेकिन प्रशासन ने सिर्फ एक दिन का राशन दिया है । यह गम्भीर मामला है। उन्होंने कहा कि कैम्प में रह रहे लोगों की सेवा ,भगवान की सेवा है । पीएम की भी नजर बिहार के बाढ़ पर है। राहत में कंही से कोई कमी नही है । स्थानीय पदाधिकारी राहत देने में कोताही नही बरते । उन्होंने मौके पर मौजूद बीडीओ मो यूनुस सलीम ,कैम्प प्रभारी बी ई ओ चन्द्रेश्वर दास से भी बात की, जबकि सीओ अनिल कुमार श्रीवास्तव को मोबाइल पर निर्देश दिया | उन्होंने कैम्प में खिलाये जा रहे भोजन की क्वालिटी को भी देखा और सन्तुष्टि जताई । मौके पर पैक्स अध्यक्ष वृजकिशोर सिंह ,शम्भू सिंह ,सर्वेश सिंह ,डा ओम प्रकाश भी मौजूद थे ।
मुंबई: इस साल दिसंबर महीने में रिलीज़ होने जा रही साल की बहु प्रतीक्षित मूवी दंगल जिसमें बॉलीवुड एक्टर आमिर खान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। भारत के हरियाणा राज्य के कुश्तीबाज महावीर फोगट की जिंदगी पर निर्धारित इस फिल्म का प्रमोशन जोरों-शोरों से चल रहा है। कुछ दिन पहले ही जारी किया गया एक गाना हानिकारक बापू जिसमें बाप और बेटी के जटिल रिश्ते को दिखाया गया है पर ऐतराज जताया गया है। आपको बता दें कि विश्वात्मक सामाजिक सेवा ट्रस्ट नाम के एक एनजीओ ने इस गाने पर विरोध दर्ज कराया है और ट्रस्ट के अध्यक्ष ने फिल्म के निर्माताओं से अपील करते हुए कहा है कि वे इस गाने से बापू शब्द हटा दें क्योंकि देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को बापू के नाम से संबोधित किया किया जाता है और इस गाने से उनकी छवि धूमिल हो रही है। उनका कहना है कि जब भी लोग पहली बार ये गाना सुनेगे तो उन्हें बापू शब्द सुन गांधीजी का ही ख़याल आएगा क्योंकि लोग प्यार से उन्हें बापू बुलाते थे। सूत्रों के मुताबिक इस एनजीओ ने आमिर खान से भी इस मामले में अपील की है लेकिन आमिर ने अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया है।
अक्षय खन्ना, आमिर खान और सैफ अली खान स्टारर फिल्म दिल चाहता है अब भी लोगों के दिलों में ताजा है। इस कल्ट फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स ने भी काफी पसंद किया था। फिल्म के सीक्वल को लेकर अक्सर चर्चा होती है। मंगलवार को इस बारे में अक्षय खन्ना से एक मजेदार सवाल किया गया। बता दें, वह अपनी आने वाली फिल्म सेक्शन ३७५ के ट्रेलर लॉन्च पर मौजूद थे। बात करें अक्षय की आने वाली फिल्म सेक्शन ३७५ की तो इसमें अक्षय के साथ ऐक्ट्रेस रिचा चड्ढा अहम किरदार में नजर आएंगी। डायरेक्टर अजय बहल की यह फिल्म १३ सितंबर २०१९ को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
रवीश कुमार। १०२६ में सोमनाथ मंदिर पर महमूद ग़ज़नी हमला करता है। इस घटना को लेकर आज तक नई नई व्याख्याएं होती रहती हैं और उस पर धारणाओं की परतें चढ़ाई जाती रहती हैं। उस वक्त भी और उसके बाद की सदियों में सोमनाथ मंदिर को लेकर अलग अलग लिखित ग्रंथों में दर्ज किया जाता है। फ़ारसी, अरबी, संस्कृत, जैन, राजपूत दरबारों की वीर-गाथाएं, ब्रिटिश शासक और इतिहासकार, स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के राष्ट्रवादी नेता। ये सब सोमनाथ को लेकर स्मृतियां गढ़ रहे थे। इतिहासकार रोमिला थापर ने इन अलग अलग ग्रंथों, दस्तावेज़ों और इतिहास लेखन में सोमनाथ मंदिर की घटना को कैसे दर्ज किया गया है, उसका अध्ययन किया है। वो पहले ही साफ कर देती हैं कि घटना क्यों हुई, किस मकसद से हुई, इसकी पड़ताल नहीं कर रही हैं बल्कि उसके बाद वो कैसे स्मृतियों और इतिहासलेखन में दर्ज होती है, उसे समझने का प्रयास कर रही हैं। घटना के ४०० साल बाद के संस्कृत दस्तावेज़ों में इस बात का ज़िक्र है कि सोमनाथ मंदिर सिर्फ मंदिर नहीं था, उस वक्त अपने इलाके का राजनीतिक प्रशासक था जो फारसी व्यापारियों को कारोबार करने का परमिट भी जारी करता था। फारसी व्यापारियों से संबंध बहुत मधुर थे। १९५१ में वहां उत्खनन होता है जिससे कई बार धारणाओं पर विराम लगता है। टूटने के बाद जो निर्माण होता है उससे पता चलता है कि मंदिर कई बार नहीं बल्कि तीन बार टूटा या तोड़ा गया। जबकि धारणाओं में मंदिर का विध्वंस कई बार होता है। उत्खनन से यह भी पता चलता है कि ग्रंथों में जिस तरह से मंदिर को विशाल रूप में दर्ज किया गया है, वास्तविक रूप उससे काफी अलग है। जैन व्यापारियों और दरबारी लेखकों के दस्तावेज़ों में भी मंदिर को लेकर अलग-अलग बातें मिलती हैं। १९ वीं सदी के शुरू में महमूद ग़ज़नी को लेकर जो मौखिक किस्से हैं उनका संग्रह किया जाता है, उन किस्सों से अलग ही इतिहास पता चलता है। आपको यही समझना है हर किस्सा इतिहास नहीं होता मगर वो इतिहास का हिस्सा हो जाता है। इतिहास वहीं तक है जहां तक प्रमाण हैं। बाकी किस्सों का इतिहास है मगर एक वो वास्तविक इतिहास नहीं है। क्योंकि कई किस्सों में पीर, फ़क़ीर, साधु और गुरु महमूद की तारीफ़ भी करते हैं। रोमिला थापर इन अलग अलग किस्सों को आमने-सामने रखकर सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निमाण के इतिहास को समझने का प्रयास कर रही हैं। क्या इस घटना को भारत के अलग अलग समुदायों ने अलग-अलग निगाहों से देखा, क्या हमला सिर्फ धार्मिक शत्रुता के कारण हुआ, क्या राजनीतिक कारणों से इस घटना को बढ़ा-चढ़ा कर दर्ज किया जाता रहा है?
लखनऊ। प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने के लिए भर्तियां करने जा रही है। सूबे के ४१ जिलों के ४६८ ब्लॉकों में यह भर्तियां की जाएंगी। सरकार ने भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इसमें राज्य स्तरसे लेकर ब्लॉक स्तर के कर्मियों की नियुक्ति की जाएंगी।वाह्य सहायतित आईसीडीएस सिस्टम स्ट्रेंथनिंग एंड न्यूट्रीशियन इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (स्निप) के लिए होने वाली इन नियुक्तियों के लिए प्रदेश सरकार नेहरी झंडी दे दी है। सरकार ने कुल १०२९ पदों पर भर्तियां करने की इजाजत दी है। यह सभी पद संविदा के आधार पर भरे जाएंगे। इसमें राज्य स्तर पर जहां सलाहकार रखे जाएंगे वहीं ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक समन्वयक व परियोजना सहायक की नियुक्तियां की जाएंगी। इन कर्मियों को प्रतिमाह ८ से ६० हजार रुपये तक का नियत वेतन दिया जाएगा। इन पदों पर भर्ती के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश विभाग की वेबसाइट ( पर उपलब्ध है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया जा सकता है। आवेदन १९ जनवरी तक किए जा सकते हैं। निदेशक बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार ने बताया कि इन पदों पर भर्ती के बाद आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन और बेहतर हो जाएगा।
हमारे वातावरण में बहने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की खतरनाक दर पौधे के जीवन को दिलचस्प तरीके से प्रभावित कर रही है - लेकिन शायद उस तरीके से नहीं जिस तरह से आप उम्मीद करेंगे। भूमि की सफाई, सूखे और जंगल की आग से बड़े नुकसान के बावजूद, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित किया जाता है और बढ़ती दर पर वनस्पति और मिट्टी में संग्रहीत किया जाता है। इसे "भूमि कार्बन सिंक" कहा जाता है, यह वर्णन करता है कि दुनिया भर में वनस्पति और मृदा प्रकाश संश्लेषण से कार्बन डाइऑक्साइड को कैसे अवशोषित करती हैं। और पिछले ५० वर्षों में, सिंक (उन पौधों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के तेज और रिलीज के बीच का अंतर) बढ़ रहा है, जो औसत वर्ष में कम से कम एक चौथाई मानव उत्सर्जन को अवशोषित करता है। सिंक बड़ा हो रहा है एक की वजह से पादप प्रकाश संश्लेषण में तेजी से वृद्धि, तथा हमारे नए शोध बढ़ते कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता को काफी हद तक बढ़ाता है। इसलिए, इसे सरलता से कहने के लिए, मानव अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्पादन कर रहे हैं। यह कार्बन डाइऑक्साइड अधिक पौधे के विकास का कारण बन रहा है, और कार्बन डाइऑक्साइड को चूसने की उच्च क्षमता है। इस प्रक्रिया को "कार्बन डाइऑक्साइड निषेचन प्रभाव" कहा जाता है - एक घटना जब कार्बन उत्सर्जन प्रकाश संश्लेषण को बढ़ावा देता है और बदले में, पौधे की वृद्धि होती है। जब तक हमें यह पता नहीं चला कि हमारे अध्ययन में जमीन पर वैश्विक प्रकाश संश्लेषण में वृद्धि में कार्बन डाइऑक्साइड निषेचन प्रभाव का कितना योगदान है। लेकिन भ्रमित मत हो, हमारी खोज का मतलब यह नहीं है कि कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करना एक अच्छी बात है और हमें अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को पंप करना चाहिए, या यह कि भूमि-आधारित पारिस्थितिक तंत्र हम पहले से सोचा की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को हटा रहे हैं (हम पहले से ही जानते हैं कि कैसे यह वैज्ञानिक माप से है)। और निश्चित रूप से इसका मतलब यह नहीं है कि हमें ऐसा करना चाहिए, जैसा कि जलवायु संशयवादियों के पास है किया, जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को कम करने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड निषेचन की अवधारणा का उपयोग करें। बल्कि, हमारे निष्कर्षों से दुनिया भर में वनस्पति का कारण बनता है की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करने के लिए एक नई और स्पष्ट व्याख्या प्रदान करता है। क्या अधिक है, हम जलवायु परिवर्तन की दर को धीमा करते हुए, मानव उत्सर्जन के अनुपात को अवशोषित करने के लिए वनस्पति की क्षमता को उजागर करते हैं। यह जंगलों, सवाना और घास के मैदानों की तरह स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करने और बहाल करने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है और उनके कार्बन शेयरों को सुरक्षित करता है। और जबकि वातावरण में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड, परिदृश्य को अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की अनुमति देता है, लगभग आधा (४४%) हमारे उत्सर्जन का वातावरण में बना रहता है। पिछली शताब्दी की शुरुआत के बाद से, वैश्विक पैमाने पर प्रकाश संश्लेषण वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड में वृद्धि के लगभग निरंतर अनुपात में बढ़ गया है। दोनों हैं अब लगभग ३०% अधिक है १९ वीं सदी की तुलना में, औद्योगीकरण से पहले महत्वपूर्ण उत्सर्जन उत्पन्न करना शुरू कर दिया। कार्बन डाइऑक्साइड निषेचन प्रकाश संश्लेषण में इस वृद्धि के कम से कम ८०% के लिए जिम्मेदार है। बाकी के अधिकांश को तेजी से वार्मिंग में लंबे समय तक बढ़ते मौसम के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है उत्तरी वन और आर्कटिक। तो अधिक कार्बन डाइऑक्साइड कैसे अधिक संयंत्र विकास के लिए नेतृत्व करता है? कार्बन डाइऑक्साइड की उच्च सांद्रता पौधों को अधिक उत्पादक बनाती है क्योंकि प्रकाश संश्लेषण कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से चीनी को संश्लेषित करने के लिए सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करने पर निर्भर करता है। पौधों और पारिस्थितिक तंत्र दोनों का उपयोग ऊर्जा स्रोत के रूप में और विकास के लिए बुनियादी निर्माण खंड के रूप में करते हैं। जब एक पौधे की पत्ती के बाहर हवा में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बढ़ती है, तो इसे प्रकाश संश्लेषण की दर से अधिक तेजी से लिया जा सकता है। अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का मतलब पौधों के लिए पानी की बचत भी है। अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उपलब्ध होने का मतलब है कि वाष्पीकरण (जिसे स्टोमेटा कहा जाता है) को नियंत्रित करने वाली पौधों की पत्तियों पर छिद्र थोड़ा बंद हो सकता है। वे अभी भी कार्बन डाइऑक्साइड की समान मात्रा या अधिक अवशोषित करते हैं, लेकिन कम पानी खो देते हैं। परिणामी पानी की बचत अर्ध-शुष्क परिदृश्य में वनस्पति को लाभ पहुंचा सकती है जो ऑस्ट्रेलिया में बहुत अधिक हावी है। हमने २०१३ के एक अध्ययन में ऐसा देखा, जिसका विश्लेषण किया गया उपग्रह डेटा ऑस्ट्रेलिया की समग्र हरियाली में परिवर्तन को मापना। इसने उन स्थानों में अधिक पत्ती वाला क्षेत्र दिखाया जहां समय के साथ वर्षा की मात्रा नहीं बदली थी। इससे पता चलता है कि कार्बन डाइऑक्साइड-समृद्ध दुनिया में पौधों की जल दक्षता बढ़ जाती है। अन्य में अनुसंधान हाल ही में प्रकाशित, हमने दुनिया भर के विभिन्न युगों के जंगलों के कार्बन अपटेक को मैप किया। हमने वनों को छोड़ी गई कृषि भूमि पर एक बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है, और विश्व स्तर पर पुराने विकास वाले जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड खींचते हैं। लेकिन क्यों? एक परिपक्व जंगल में, पुराने पेड़ों की मृत्यु प्रत्येक वर्ष उगाई जाने वाली नई लकड़ी की मात्रा को संतुलित करती है। पुराने पेड़ अपनी लकड़ी को मिट्टी में खो देते हैं और अंततः सड़न के माध्यम से वायुमंडल में पहुंच जाते हैं। दूसरी ओर एक डूबता हुआ जंगल, अभी भी लकड़ी जमा कर रहा है, और इसका मतलब है कि यह कार्बन के लिए काफी सिंक के रूप में कार्य कर सकता है जब तक कि पेड़ की मृत्यु दर और अपघटन वृद्धि की दर के साथ पकड़ नहीं लेता है। यह आयु प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड निषेचन प्रभाव पर लागू होता है, जिससे युवा जंगल संभावित रूप से बहुत मजबूत डूब जाते हैं। वास्तव में, विश्व स्तर पर, हमने पाया है कि कुल मिलाकर वनों द्वारा कुल कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने के लिए लगभग ६०% जिम्मेदार हैं। वनीकरण द्वारा उनके विस्तार को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इतने सारे कारणों से वन समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं - जैव विविधता, मानसिक स्वास्थ्य, मनोरंजन, जल संसाधन। उत्सर्जन को अवशोषित करके वे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हमारे उपलब्ध शस्त्रागार का भी हिस्सा हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम उनकी रक्षा करें।
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में जमीन खरीदना के लिए अब आपको और अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। मैदानी क्षेत्रों में पांच और पर्वतीय क्षेत्रों में तीन प्रतिशत तक जमीनों के दामों में वृद्धि हो सकती है। सर्किल रेट एक वर्ष पहले बढ़े थे। जनवरी-२०१८ में सर्किल रेट बढ़ाए गए थे। १५ प्रतिशत की औसत वृद्धि सभी पर्वतीय जिलों में हुई थी जबकि २०८ प्रतिशत जमीन के दाम हल्द्वानी की रामपुर रोड और कालाढूंगी रोड की जमी पर बढ़े थे। साथ ही नैनीताल शहर के पॉश इलाके में जमीन सबसे महंगी हुई थी। नैनीताल शहर के पॉश इलाके में ६० हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर जमीन के दाम थे। प्रदेश सरकार एक बार फिर सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी कर रही है। जिलों ने क्षेत्र के हिसाब से नए सर्किल रेट का प्रस्ताव शासन को भेजे हैं। जल्द ही कैबिनेट में सर्किल रेट को लेकर प्रस्ताव आ सकता है। हल्द्वानी में प्रतिदिन १५ से २० लोग जमीन की रजिस्ट्री कराते हैं। डीएम विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में चार से पांच प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्रों में दो से तीन प्रतिशत सर्किल रेट बढ़ाने का प्रस्ताव तीन माह पहले शासन को भेजा गया था। सर्किल रेट में बहुत अधिक वृद्धि होने से लोग जमीन की रजिस्ट्री कराना कम कर देंगे।
प्रतापगढ़ में महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करते हुए गृहमंत्राी राजनाथ सिंह ने हमारे इतिहास लेखन की एक विसंगति की ओर हमारा ध्यान खींचा था कि अगर अकबर को महान कहा जा सकता है तो महाराणा प्रताप को क्यों नहीं? लेकिन हमारे इतिहास लेखन की विसंगति केवल इन दो व्यक्तियों के तुलनात्मक चित्राण में नहीं है। विसंगति मुगल शासन को भारत के राजनैतिक इतिहास की निरंतरता में देखने में है। हमारे इतिहासकारों के लिए मुस्लिम काल के किसी और शासन को गौरवमंडित करना आसान नहीं था। इसलिए उन्होंने अकबर को महानता से मंडित करते हुए विदेशी मुगल शासन को अपवाद समझने की बजाए उसे भारत के राजनैतिक इतिहास की निरंतरता में दिखाने को प्रयत्न किया है। यह सब जानते हैं कि भारत के इतिहास लेखन की पीठिका अंग्रेजों ने तैयार की थी। मुगल शासन भी उन्हीं की तरह का विदेशी शासन था। अंग्रेज इतिहासकार चाहते थे कि भारत के लोग मुगल काल को सकारात्मक दृष्टि से देखें। क्योंकि तभी वे ब्रिटिश शासन को भी सकारात्मक दृष्टि से देख सकेंगे। उन्हें भारत के बौद्धिक वर्गों में अपने प्रभाव का विस्तार करने में सहायता मिलेगी। उनका यह उद्देश्य अधिकांशतः पूरा हुआ है। क्योंकि यह मान लिया गया है कि विदेशी होने के बावजूद मुगल और अंग्रेज भारत को प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक हुए थे। यह कितनी विचित्रा बात है कि मुस्लिम और ब्रिटिश शासन को सकारात्मक रूप से दिखाने का यह अभियान केवल एक अकबर के महिमामंडन पर टिका हुआ है। मुगलकाल और अकबर के शासन की समीक्षा करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि इतिहास लेखन को इस दिशा में मोड़ने से हमारी क्या क्षति हुई है। मुस्लिम काल हमारे इतिहास का एक मोड़ है जहां से हमारी अपनी राजनीतिक व्यवस्थाएं क्षीण होती गईं, और मुगलकाल ने उन पर दृढ़तापूर्वक इरानी और उस्मानी राज्य व्यवस्थाओं को थोप दिया। इस प्रतिरोपण ने ही अंग्रेजों को भारत पर अपनी व्यवस्थाएं लादने में सहायता पहुंचाई। मुसलमानों और अंग्रेजों के शासन का यह पूरा काल केवल इस अर्थ में विदेशी नहीं है कि उस काल के शासक विदेशी थे। बल्कि वह इस गहरे अर्थ में विदेशी है कि उसने भारतीय राज-तंत्रा को विदेशी राज-तंत्रा में बदल दिया और समाज को अपनी नैतिक व्यवस्थाएं चलाने के लिए, जिस कवच की आवश्यकता होती है, वह नष्ट हो गया। यह मामूली मूल नहीं है कि हमारे इतिहासकारों ने यह समझने का ठीक से प्रयत्न ही नहीं किया कि मुस्लिम काल में राजनैतिक ढांचे को किस तरह बदला गया और उसने समाज की व्यवस्थाओं को किस तरह क्षत-विक्षत किया। मुस्लिम शासन ने कैसे हमें अपने राजनैतिक इतिहास से विच्छिन्न कर दिया, यह समझने के लिए यह याद करना आवश्यक है कि हमारी राज्य-व्यवस्था क्या थी। सबसे पहली बात यह कि भारत में समाज के सभी साधनों पर समाज का ही अधिकार था, राज्य का नहीं। लोग जो भी उत्पादित-अर्जित करते थे उसका एक भाग समाज की सभी व्यवस्थाओं को चलाने के लिए अलग कर लिया जाता था। यह विभाजन परंपरा से होता आ रहा था और समयानुसार उसमें कोई परिवर्तन सबकी सहमति से होता था। राज्य भी समाज की व्यवस्थाओं का एक हिस्सा था। उसका भाग उसे मिले यह दायित्व भी स्थानीय संस्थाओं का ही था, जिनकी प्रतिबद्धता जितनी राज्य से थी, उतनी ही समाज से भी थी। राज्य सैनिक अभियानों में लगे रहते थे, जिनका उद्देश्य गांधीजी के शब्दों में शौर्य की परंपरा को बनाए रखना था। लेकिन उनका प्राथमिक दायित्व समाज के शील, समृद्धि और न्यायशीलता की रक्षा करना था। इस तरह राज्य समाज की व्यवस्थाओं का रक्षक था। इस्लाम के उदय के कुछ समय बाद आठवीं शताब्दी में भारत पर भी मुस्लिम आक्रमण आरंभ हो गए थे। लेकिन अरब आक्रमणकारियों का उद्देश्य राजधानियों और मंदिरों के धन को लूट कर ले जाने से अधिक नहीं था। लगभग तीन शताब्दी तक भारतीय राजा छिटपुट पराजयों के बाद उन्हें खदेड़ते रहने में सफल रहे। मोहम्मद बिन कासिम को सिंध में पैर जमाने का मौका मिला, पर भारतीय राजाओं के प्रभाव का विस्तार भी बीच-बीच में सुदूर गांधार तक होता रहा। इस बीच तुर्क आए और उन्होंने अरबों से उनकी सत्ता छीन ली। उन्होंने भारत पर आक्रमण किए और ११९२ में पृथ्वीराज चौहान की एक युद्ध में पराजय के बाद दिल्ली में मुस्लिम शासन की नींव पड़ गई। मुगलों के आने से पहले दिल्ली सल्तनत पर पांच राज्यवंशों का अधिकार रहा। ३२० वर्ष की इस अवधि में ३५ सुल्तान गद्दी पर बैठे जिनमें से १९ की उत्तराधिकार की लड़ाई में हत्या हो गई। इन राजवंशों में सबसे कम खिलजी और सबसे अधिक तुगलक राजवंश का शासन रहा और ये दोनों राजवंश अपनी क्रूरता और उत्पीड़न के लिए अधिक प्रसिद्ध हुए। तुगलक वंश की नींव जिस गाजी मलिक ने रखी थी, उसका पिता तुर्क था और मां हिंदू। सत्ता में पहुंचकर उसने अपना नाम गियाजुद्दीन तुगलक रख लिया और गद्दी पर बैठते ही मुस्लिम किसानों का कर घटा दिया और हिंदू किसानों का कर बढ़ा दिया। यह वह काल था जब मध्य एशिया से अफगानिस्तान तक का सारा क्षेत्रा, सैनिक अभियानों के लिए पेशेवर योद्धा प्रदान करने वाले क्षेत्रा में बदल गया था। इन पेशेवर योद्धाओं का उद्देश्य लूटमार से समृद्ध होना तो था ही, इस्लाम ने उसे एक नया उद्देश्य भी दे दिया था- जेहाद। मुस्लिम शासन ही नहीं हर सैनिक अपने आप को गाजी समझता था और इस्लाम न मानने वालों का कत्लेआम उनके जीवन का दूसरा उद्देश्य हो गया था। इन दोनों उद्देश्यों ने मुस्लिम आक्रांताओं को कभी अपने अभियान के लिए सैनिकों की कमी नहीं होने दी। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस्लाम की शक्ति के उदय ने यूरोेप को भी झकझोर दिया था और दोनों के संघर्ष में युद्ध की नई सामग्री विकसित हो रही थी। तोपखाना और तोड़ीदार बंदूकें इस दौर के नये हथियार थे। जिन्हें पाकर मुस्लिम आक्रांताओं की शक्ति बढ़ गई थी, इन्हीं सब कारणों ने तुर्कों-मुगलों को अजेय बना दिया था और भारत इस काल चक्र में फंस गया था। इस पृष्ठभूमि में मुगल शासन की नींव पड़ी। बाबर उज्बेक था और पिता फरगाना के शासन थे। उनकी मृत्यु के समय बाबर अवयस्क था। इसलिए फरगान की सत्ता पाते ही उसका विरोध शुरू हुआ और उसे वहां से खदेड़ दिया गया। बाबर उलुगबेग के शिशु उत्ताराधिकारी की फौजों को हराकर काबुल का शासक बन बैठा। दिल्ली सल्तनत के निरंतर चलने वाले अंतर्संघर्ष के कारण इब्राहिम लोदी से असंतुष्ट दौलत खां लोदी के निमंत्राण पर उसने दिल्ली पर आक्रमण किया। उसे वास्तविक सफलता तब मिली जब उसने अपने तोप खाने के बल पर उस समय के सबसे शक्तिशाली राजा संग्राम सिंह को हरा दिया। बाबर के पिता तैमूर के वंशज थे और मां चंगेज। केवल वह ही नहीं बल्कि सभी मुगल सम्राट अपने को मुगल के बजाय तैमूरी कहलाना ही पसंद करते थे तैमूर और चंगेज उस दौर के सबसे क्रूर योद्धा थे। तैमूर ने १३९८ में दिल्ली विजय के बाद उसके एक लाख निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतरवा दिया था। इतिहासकारों का आकलन है कि तैमूर के आक्रमणों में १.७ करोड़ लोगों की जानें गईं थी जो उस समय विश्व की जनसंख्या का ५ प्रतिशत था। तैमूर का वंशज होने के कारण मुगल शासकों को ईरानी शासकों का सहयोग प्राप्त होता रहा। 4७ वर्ष की आयु में बाबर की मृत्यु हो गई और हुमायूं गद्दी पर बैठा। लेकिन कुछ समय बाद अफगान शेरशाह सूरी से पराजित होकर उसे इरान में सफाविद शासकों की शरण लेनी पड़ी। १५4५ में शेरशाह और १५५4 में उसके बेटे की मृत्यु के बाद हुमायूं को फिर दिल्ली पर आक्रमण की हिम्मत हुई। १५५५ में मिली इस सफलता के अगले ही वर्ष उसकी मृत्यु हो गईं। उस समय अकबर केवल १3 वर्ष का था। अकबर की आरंभिक सफलता शिया बैरम खां के कारण हुई। उसे पानीपत की लड़ाई में राजा हेमचन्द्र के अचानक घायल हो जाने के कारण हारते-हारते सफलता हासिल हो गई थी। वास्तव में अकबर से ही भारत में मुगल शासन का आरंभ माना जाना चाहिए। उसके बाद १७०७ तक लगभग डेढ़ शताब्दी तक मुगल शासन में स्थिरता रही। अकबर को अन्य सब मुस्लिम शासकों से अलग दिखाने के लिए यह कहा जाता है कि वह उदार था, दूसरे धर्मों के प्रति सहिष्णु था और उसने अपने विजय अभियान से भारत के अधिकाशं क्षेत्रों को एक शासन में बांध दिया। हालांकि अचेत हेमचन्द्र के साथ और चितौड़ विजय के बाद किले के ३० हजार निशस्त्रा लोगों के साथ उसने जो किया उससे उसकी वही छवि उभरती है जो सभी मुस्लिम शासकों की छवि थी- गाजी की छवि। लेकिन बाद में उसके व्यक्तित्व में उदारता और सहिष्णुता के लक्षण भी मिलते हैं। राजपूतों के हाथ मिलाना उसके राजनैतिक कौशल का परिचायक था, क्योंकि वे उस समय की एक बड़ी शक्ति थे। वह स्वभाव से कटट्र नहीं था और उसकी बहादुरी और उदारता के बहुत से किस्से उसे अन्य मुस्लिम शासकों से अलग सिद्ध करते हैं। लेकिन उसके नेतृत्व में जिस शासन की नींव पड़ी वह एक विदेशी शासन ही था, भारतीय शासन नहीं। अकबर को ४९ वर्ष शासन करने का अवसर मिला। औरंगजेब को छोड़कर किसी और शासन को इतना लंबा समय नहीं मिला। लेकिन अन्य सब शासकों की तरह इन दोनों का समूचा शासन काल भी युद्ध करते ही बीता। इतिहासकार शेरशाह सूरी को उसके पांच वर्ष के शासन में ही राजस्व व्यवस्था सुदृढ़ करने और अकबर को मनसबदारी स्थापित करने का श्रेय देते हैं। लेकिन यह दोनों व्यवस्थाएं भारत में एक औपनिवेशिक सत्ता स्थापित करने वाली व्यवस्थाएं ही थीं। इतिहासकारों ने यह तथ्य भुुला दिया है कि मुस्लिम काल सैनिक शासन का काल है। अकबर की मनसबदारी उसी सैनिक शासन को औपचारिक स्वरूप देकर और मजबूत बनाने वाली थी। इसके साथ ही सारे राजस्व पर केन्द्रीय सत्ता का नियंत्राण हो गया था और सुल्तान राजस्व की अधिकांश वसूली सीधे करने लगे थे। इस तरह स्थानीय व्यवस्थाओं को चलाने के लिए राजस्व का जो भाग अलग कर लिया जाता था उसे भी हड़प लिया गया। राज सत्ता का उपयोग सैनिक अभियान के अलावा धर्मांतरण और मस्जिदें, मकबरे बनवाने में हुआ, राजधर्म निभाने में नहीं। अकबर की मनसबदारी में ईरानी और तूरानी लोगों की भरमार थी। मंत्रिमंडल में जहां इरानी अधिक थे, वहीं मनसबदारी में उज्बेकों का दबदबा था। गिनती के राजपूतों को छोड़कर सभी मनसबदार मुस्लिम थे जिनमें ८७ प्रतिशत विदेशी थे। पैदल सेना में कुछ स्थानीय भर्ती के अलावा सेना में सब जगह विदेशी लोगों की ही भर्ती होती थी। इस रूप में मुस्लिम काल ने भारत को निशस्त्रा कर दिया था। राजस्व के केंद्रीकरण से मुस्लिम शासकों को बड़ी सेनाएं रखने की सुविधा मिल गई थी। इस तरह स्पष्ट है कि मुस्लिम शासन के आरंभ में स्वशासन की भारतीय व्यवस्था को सैनिक शासन की केंद्रीय व्यवस्था में बदल दिया गया था। ऐसे शासन से साधारण लोगों को कोई अपेक्षा नहीं हो सकती थी। किसानों की आधी उपज सुल्तान की घोषित की गई। लेकिन राजस्व की वसूली की सारी मशीनरी बाहरी और विदेशी थी, इसलिए जबरन कहीं अधिक वसूली होती थी। न्याय की पंचायती व्यवस्था निर्जीव हो गई थी और बहुसंख्यक हिंदुओं के उत्पीड़न को रोकने की किसी से आशा नहीं की जा सकती थी। यह अराजकता की स्थिति थी जिससे केवल वे क्षेत्रा बचे रहे जहा स्थानीय हिन्दू शासन थे। राजपूतों, मराठों, बुंदेलों, दक्षिण के हिंदू राजाओं या मुगल निंयत्राण से बचे रहे पहाड़ी राजाओं के क्षेत्रा ही इस अराजकता से बचे थे। यह अराजकता अंग्रेजी राज तक तो चली ही, कलेक्टर राज के रूप में आज भी कायम है। आज भी देश की अधिकांश आबादी के लिए शासन का अर्थ पुलिस के बल पर चलने वाला कलेक्टर राज ही है। इसकी नींव अंग्रेजों से भी पहले अकबर के शासन काल में पड़ गई थी, क्योंकि मनसबदारी के द्वारा सारा शासन बाहरी हाथों में चला गया था। जब तक हम अपने इतिहास को इस रूप में नहीं समझते, हम यह नहीं देख पाएंगे कि १३वीं शताब्दी से जो विदेशी शासन आरंभ हुआ उसने हमको अपने इतिहास से विच्छिन्न कर दिया और इस तरह विदेशी शासकों में महानता नहीं देखी जाती है।
कानपुर देहात-कुछ ऐसा अजीब नजारा था डेरापुर में शहीद रोहित के नगर का, चारो तरफ आंसुओ का सैलाब बह रहा था। जुसक घर के लिए कदम बढ़े थे लेकिन कुछ ही दूरी पहले जोर शोर से चीखें व दहाड़े मारती हुई महिलाओं की आवाजें आने लगीं। सुनकर गला रुंध गया, फिर भी आगे बढ़ते हुए घर से ५० कदम पहले ही खड़ा हो गया और वहां का दृश्य देख आंखे खुली रह गयी। घर के बाहर लोगों का तांता लगा था। सभी एक दूसरे को ढांढस बंधा रहे थे। एक तरफ चारपाई पर शहीद के पिता गंगादीन सिर झुकाए मस्तक पर हाँथ रखकर बैठे थे। लोग कुछ बोल रहे थे लेकिन उनके होंठ नहीं हिल पा रहे थे। सिर्फ आंखों में आंसू तैर रहे थे। देखा तो घर की दहलीज पर मां विमला, पत्नी वैष्णवी, बहन प्रियंका दहाड़े मारकर रो रहे थे। क्योंकि किसी ने भाई, किसी ने पति, किसी ने बेटा तो किसी ने अपना दोस्त यार देश के लिए बलिदान जो कर दिया था। जहाँ में कुछ सवाल उमड़ रहे थे, इसलिए समीप ही खड़े एक सख्श पर नजर पड़ी, जो आंखों में तो गम लिए लेकिन कलेजे पर पत्थर रखकर लोगों से कुछ बता रहा था। जानकारी से पता लगा कि वह सुरजीत यादव है, जो रोहित का भाई और उसका पक्का यार था। जब उससे पूंछा गया तो उसने बताया कि वह और रोहित दोनों सगे भाई की तरह थे लेकिन उससे ज्यादा हम लोग पक्के दोस्त थे। साथ पढ़े लिखे और साथ खेले कूदे। यहां तक कि हमारा सेना में चयन हुआ। ठीक उसके ७ या ८ माह बाद रोहित भी सेना में भर्ती हो गया। हम दोनों ने हर पल साथ बिताया। जब घर आना होता था तो फोन पर बात करके एक साथ छुट्टी लेने की कोशिश में जुट जाते थे। फिर यहां डेरापुर घर आकर खूब मस्ती करते थे। बोलते हुए अचानक उसकी आवाज़ टूटने लगी, कुछ पल शब्दो को विराम देने के बाद उसने कहा कि ऐसा लग रहा जैसे सब कुछ चला गया। फौजी हूँ तो सभी से कहना है कि मेरे भाई दोस्त के लिए दुआ करना। इतना कहकर वह चुप हो गया। घर से महिलाओं की चीत्कारें सुन सभी का दिल दहल रहा था। डेरापुर के अंबेडकर नगर में पुलवामा के शोपियां में शहीद हुए रोहित के घर का कुछ ऐसा आलम था।
राजनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार गन्ना किसानों की पाई-पाई चुकता कराएगी। कैराना. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो गुंडे बदमाश जेल में होंगे। भाजपा का वादा है कि बहन-बेटी की आन-बान-शान पर आंच नहीं आने देगी। किसी को गुंडों के डर से पलायन नहीं करना पड़ेगा। कानून-व्यवस्था का राज होगा। हर व्यक्ति को सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं आएगी तब तक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। राजनाथ ने मोदी सरकार के कामों को गिनाते हुए कहा कि किसानों के लिए बीमा फसल योजना लागू की है। केंद्र सरकार गन्ना किसानों की पाई-पाई चुकता कराएगी। वे सोमवार को यहां परिवर्तन यात्रा पहुंचने पर विजय सिंह पथिक राजकीय महाविद्यालय में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। पलायन के लिए चर्चित कैराना में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना संबोधन को किसानों के इर्द-गिर्द फोकस रखा। उन्होंने कहा कि किसानों का दुख दर्द मैं जानता हूं। मैं भी किसान हूं। उन्होंने किसानों से पूछा-क्या इस साल यूरिया अथवा खाद की कोई दिक्कत हुई। नहीं आवाज आने पर उन्होंने भी कहा नहीं हुई क्योंकि मोदी सरकार ने इतना यूरिया और खाद उपलब्ध करा दिया है कि वह आज गांव-गांव तक में उपलब्ध है। मोदी सरकार ने किसानों के लिए फसल बीमा योजना शुरू की है।
सिखों के सिर की शान पगड़ियां, अब जरूरतमंद बच्चों को कोरोना वायरस से बचाएंगी। घर-घर से पुरानी पगड़ियां लेकर उनसे मास्क बनाकर बच्चों को बांटा जा रहा है। सिख समाज ने पूरे देश में 'टरबन फॉर मास्क' अभियान चलाकर दस लाख मास्क बच्चों को बांटने की तैयारी की है। भारतीय जनता पार्टी के नेशनल सेक्रेटरी सरदार आरपी सिंह और उत्तरी दिल्ली के महापौर अवतार सिंह ने सोमवार को दिल्ली में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता को ५० हजार मास्क उपलब्ध कराकर अभियान की शुरूआत की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भाजपा कार्यकतार् घर-घर जाकर स्कूली बच्चों के अभिभावकों को पगड़ियों से बने मास्क देंगे। बच्चों को कोरोना से बचाने के इस अभियान में भाजपा, शिरोमणि अकाली दल जैसे राजनीतिक संगठनों के अलावा यूनाइटेड सिंह सभा फाउंडेशन आदि समाजसेवी संगठन जुड़े हैं। सरदार आरपी सिंह ने कहा कि पगड़ी के लिए सिखों ने कई शहादतें दी है और अब जरूरत के समय इसे मास्क बनाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। उत्तरी दिल्ली के महापौर अवतार सिंह ने कहा कि पगड़ियां सिखों की शान होती हैं। यह मास्क सूती और मलमल की पगड़ियों से तैयार किए गए हैं जिसे धोया भी जा सकता है। मास्क को सिलने में हर धर्म के लोगों ने अपना योगदान दिया और इसे सिलते वक्त साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन का विशेष ध्यान रखा गया।
राजस्थान की राज्य सरकार ने हर वर्ग के लोगो को ध्यान मे रखते हुए कई प्रकार की योजनाए शुरू कर रखी है। उसी तरह, अब राजस्थान सरकार ने विकलांग पेंशन योजना की भी शुरुआत की हुई है। इस योजना के तहत राज्य के विकलांग लोगो को आर्थिक मदद दी जाएगी। इस विकलांग पेंशन योजना राजस्थान २०१९ के तहत , लाभार्थियो को हर महीने ७५०रुपए दिये जाएंगे। ताकि वह लोग इस राशि से अपने जीवन के निर्वाह के लिए जरूरी चीजे बाजार से खरीद सके। राजस्थान के सामाजिक एवं न्यायिक और सशक्तिकरण विभाग के द्वारा ही इस विकलांग पेंशन योजना राजस्थान को दिया जाता है। इस पेंशन योजना के तहत, राज्य का हर विकलांग व्यक्ति आवेदन कर सकता है। और हर व्यक्ति को विकलांग पेंशन योजना राजस्थान के तहत हर महीने ७५० रुपए उसके खाता मे दिये जाएंगे। आवेदन करने के बाद, विभाग उन लाभार्थियो की सूची को तैयार करता है, जो इस पेंशन योजना के पात्र होते है। तो हम आपको विकलांग पेंशन योजना राजस्थान २०१९ की लाभार्थी सूची की जानकारी भी देंगे। राजस्थान मे इस समय कई प्रकार की पेंशन और योजनाए चल रही है। राज्य के हर आम आदमी के लिए उसके वर्ग ने अनुसारा योजनाओ और पेंशन के अधीन लाभ दिया जाता है। इन सभी मे विकलांग लोगो को ध्यान से रखते हुए ही इस विकलांग पेंशन योजना राजस्थान की शुरुआत की है। आप इस योजना की हर जानकारी वैसे तो राजस्थान की सामाजिक सुरक्षा पेंशन की आधिकारिक वैबसाइट पे जाके ले सकते है। आवेदन करने वाला आवेदन, राजस्थान का स्थायी निवासी होना जरूरी है। आवेदक के परिवार की सलान आय ६० हज़ार रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। व्यक्ति की विकलांगता कम से कम ४०% से अधिक होनी चाहिए । भामाशाह योजना के तहत पात्र व्यक्ति भी इस योजना के तहत लाभ ले सकता है। अगर आप भी विकलांग पेंशन योजना राजस्थान २०१९ के तहत लाभ लेना चाहते है तो आपको इस योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए आपके पास अपंगता प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। राजस्थान विकलांग पेंशन योजना के आवेदन के लिए आपको इस योजना से जुड़ी आधिकारिक वैबसाइट पे जाना जरूरी है। इस वैबसाइट से आपको आवेदन पत्र जोकि हिन्दी भाषा मे होगा को डाऊनलोड करना है। फिर आपको सही जानकारी देते हुए इस योजना के आवेदन फॉर्म को ध्यान से भरना है। आपको इस योजना क तहत प्पो नंबर प्राप्त करना होगा, जिसके लिए आपको अधिकारियों के पास आवेदन पत्र जमा करवाना होगा। आवेदन के बाद, ही आप सभी इस योजना के तहत हर महीने पेंशन का लाभ ले सकते है। जब आप इसके लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म जमा कर देते है तो उसके बाद आपको कैसे पता चलेगा की आपको पेंशन मिलेगी या नहीं। तो दोस्तो आपको आवेदन के बाद अपने आवेदन फॉर्म की स्थिति जानने के लिए एक बार फिर से आधिकारिक वैबसाइट पे जाना जरूरी है। यहा से आपको पता चलेगा की आपका आवेदन फॉर्म मंजूर हुआ है, पेंडिंग है या फिर रद्द कर दिया गया है। जिसकी जानकारी वहा पर दी होगी। आवेदन की स्थिति जानने के लिए आपको आधिकारिक वैबसाइट पे जाना होगा। यहा पर आपको एक रिपोर्ट वाले लिंक पर क्लिक करना है। यहा पर अपना आवेदन पत्र की संख्या को भरे और शो स्टेट्स पर क्लिक करे। आधिकारिक वैबसाइट पे जाये और व्हा पर रिपोर्ट वाले लिंक पे क्लिक करे। आप यहा पर जिला वाइज़ लाभार्थियो की सूची को डाऊनलोड कर सकते है। हमने आपको विकलांग पेंशन योजना राजस्थान २०१९ लाभार्थी सूची की हर जानकारी दे दी है। अगर आपको किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नजर आ रही है तो हमसे बात करे।
खेड़ा कच्छवासा के सरदार पटेल युवा मंडल नेजपुर व सर्व समाज के युवाओं द्वारा रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मनाई गई। युवाओं ने मौन रखकर रानी लक्ष्मीबाई को याद किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुनील पटेल, विशिष्ट अतिथि उज्जवल आमलिया व अध्यक्षता शुभम सुथार ने की। मौके पर युवाओं ने लक्ष्मी बाई के शौर्य, पराक्रम को याद करते हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संकल्प लिया। बतौर मुख्य अतिथि सुनील पटेल, नेजपुर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई की वीरता व पराक्रम का प्रतिमान अतुलनीय है। साल १८५८ में जून का १७वां दिन था जब खूब लड़ी मर्दानी, अपनी मातृभूमि के लिए जान देने से भी पीछे नहीं हटी। मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी अदम्य साहस के साथ बोला गया यह वाक्य बचपन से लेकर अब तक हमारे साथ है। साथ ही विशिष्ट अतिथि उज्जवल आमलिया ने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई का जन्म १९ नवंबर, १८२८ को बनारस के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ। उन्हें मणिकर्णिका नाम दिया गया और घर में मनु कहकर बुलाया गया। ४ बरस की थीं, जब मां गुज़र गईं। पिता मोरोपंत तांबे बिठूर ज़िले के पेशवा के यहां काम करते थे और पेशवा ने उन्हें अपनी बेटी की तरह पाला। अध्यक्षता कर रहे शुभम सुथार ने कहा कि लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में १९ नवम्बर १८२८ को हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था लेकिन प्यार से उन्हें मनु कहा जाता था। उनकी माँ का नाम भागीरथीबाई और पिता का नाम मोरोपंत तांबे था। मोरोपंत एक मराठी थे और मराठा बाजीराव की सेवा में थे। माता भागीरथीबाई एक सुसंस्कृत, बुद्धिमान और धर्मनिष्ठ साल की थी तब उनकी माँ की मृत्यु हो गयी। क्योंकि घर में मनु की देखभाल के लिये कोई नहीं था इसलिए पिता मनु को अपने साथ पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में ले जाने लगे। जहाँ चंचल और सुन्दर मनु ने सब लोग उसे प्यार से छबीली कहकर बुलाने लगे। मनु ने बचपन में शास्त्रों की शिक्षा के साथ शस्त्र की शिक्षा भी ली। सन् १८४२ में उनका विवाह झाँसी के मराठा शासित राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ और वे झाँसी की रानी बनीं। विवाह के बाद उनका नाम लक्ष्मीबाई रखा गया। सन् १८५१ में रानी लक्ष्मीबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। परन्तु चार महीने की उम्र में ही उसकी मृत्यु हो गयी। सन् १८५३ में राजा गंगाधर राव का स्वास्थ्य बहुत अधिक बिगड़ जाने पर उन्हें दत्तक पुत्र लेने की सलाह दी गयी। पुत्र गोद लेने के बाद २१ नवम्बर १८५३ को राजा गंगाधर राव की मृत्यु हो गयी। दत्तक पुत्र का नाम दामोदर राव रखा गया। ब्रितानी राज ने अपनी राज्य हड़प नीति के तहत बालक दामोदर राव के ख़िलाफ़ अदालत में मुक़दमा दायर कर दिया। हालांकि मुक़दमे में बहुत बहस हुई, परन्तु इसे ख़ारिज कर दिया गया। ब्रितानी अधिकारियों ने राज्य का ख़ज़ाना ज़ब्त कर लिया और उनके पति के कर्ज़ को रानी के सालाना ख़र्च में से काटने का फ़रमान जारी कर दिया। इसके परिणामस्वरूप रानी को झाँसी का क़िला छोड़ कर झाँसी के रानीमहल में जाना पड़ा। पर रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होनें हर हाल में झाँसी राज्य की रक्षा करने का निश्चय किया। भाविक पाटीदार,भूपेंद्र सिंह,हितेश पाटीदार, दर्शन यादव,पंकज यादव,हितेश पाटीदार, दर्शन यादव, हीना सुथार, महावीर सिंह, कोमल तेली, पायल कलाल, दिव्या जोशी, अंजनी भगोरा व आँचल यादव मौजूद थे।
अल्हागंज १ अक्टूबर 20१6. नगर के देवस्थान बाराह पत्थर के पास में मैला जमा होने से श्रद्धालुओं तथा भक्तों को काफी तकलीफ हो रही है। इस स्थिति के चलते सामाजिक संगठन परशुराम सेना तथा जय बाबा बर्फ़ानी सेवा समिति ने आज नगर पंचायत चेयरमैन के माध्यम से डीएम को ज्ञापन प्रेषित किया है। जानकारी के अनुसार चेयरमैन चंद्रेश गुप्ता ने पाँच मैला ढोने वालों को नोटिस जारी कर दिए हैं। सर पर मैला ढोने तथा कच्चे शौचालयों पर शासन द्वारा प्रतिबंध लगाऐ जाने के बावजूद नगर में अभी भी कुछ कच्चे शौचालय हैं जिनको लोग जल प्रवाहित शौचालयों में परिवर्तित नहीं कर रहे हैं। जिसके चलते अभी भी तकरीबन अाधा दर्जन महिलायें मैला ढोने का काम करते हुए उसे मंदिर के पास प्रमुख मार्ग के किनारे डालती हैं। नगर पंचायत प्रशासन ने कई बार उनको आगाह भी किया लेकिन वो अपनी जिद पर अडी हुई हैं। जिसकी वजह से मंदिर आने जाने वालों को गंदगी और बदबू से होकर गुजरना पडता है। इसी के चलते सामाजिक संगठनों में आक्रोश व्याप्त हुआ और आज शनिवार को परशुराम सेना व जय बाबा बर्फ़ानी के सदस्यों ने नगर पंचायत चेयरमैन चंद्रेश गुप्ता की मार्फत जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर उनसे सर पर मैला ढोने की प्रथा को समाप्त कराने तथा इलाके में सफाई कराने की माँग की है। ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से अमित बाजपेयी, मनोज मिश्रा, उर्जितेश्वर शुक्ला, लाली अग्निहोत्री, कमलेश शुक्ला, चंदन शुक्ला, केशव तिवारी, भानू मिश्रा, अजय गुप्ता, महेश, राधेश्याम सक्सेना, मुंशी लाल, श्याम पाल, धीरेन्द्र सिंह सहित तमाम लोग शामिल थे।
हैथवे ने 'ईटीऑनलाइन डॉट कॉम' को बताया, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि सबकुछ इतना अच्छा होगा और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अभी भी इतनी कड़ी मेहनत करूंगी जितना मैं कर रही हूं। लेकिन, मैं इसे पसंद करती हूं। मैं सच में ऐसा कर खुद को खुशकिस्मत मानती हूं।" फिल्म 'ओशंस ८' की अभिनेत्री ने कहा कि अभिनय करना कभी आसान नहीं होता और शोहरत हासिल करने के बाद भी कलाकारों को अलग तरीके से कड़ी मेहनत व काम करना होता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में आपको उतनी ही कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी जितनी कि आप तब करते हैं जब शुरू में आपको कोई नहीं जानता है।
हांगकांगः सबसे बड़े लोकतंत्र समर्थक समूहों में से एक नेता जिमी शाम पर हांगकांग में हथौड़ों से हमला हुआ है। इससे लोग और आक्रोश हो गए। इस हमले को सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया है। यह हमला हथौड़ा चलाने वाले एक समूह ने किया था। घायल अवस्था में जिमी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में एक बिल पास किया है। उसमें मानवाधिकार पर चिंता व्यक्त की गई है। अमेरिका के इस कदम से चीन भी बौखला गया है। चार महीने पहले चीन के साथ प्रत्यर्पण संधि के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब लोकतंत्र की मांग के आंदोलन में तब्दील हो गया है। इसे अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों का समर्थन हासिल है। बीते सप्ताह सरकार ने जब फेस मास्क पर प्रतिबंध लगाया तो आंदोलनकारी भड़क उठे। इसके बाद दसियों हजार आंदोलनकारी सड़कों पर उतरकर दर्जनों स्थानों पर पुलिस से जूझे। सरकार ने उस रात को स्वायत्त क्षेत्र की काली रात कहा था।
- पुलिस के रवैय्ये से लोग खफा, लखीमपुर खेरी न्यूज इन हिन्दी -अमर उजाला बेहतर अनुभव के लिए अपनी सेटिंग्स में जाकर हाई मोड चुनें। क्रासर करबला की जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए फोर्स नहीं भेजने का आरोपबिजुआ। पिछले कई सालों से करबला की जमीन पर एक फार्मर के अवैध कब्जे को हटवाने का प्रशासन का आदेश पुलिस फोर्स न भेजे जाने से फुस्स हो गया। थाने में चार घंटे से अधिक समय चली बातचीत में हजारों की तादाद में ग्रामीण थाने को घेरे रहे। भीरा के उत्तर दिशा में करबला की ९.९7 एकड़ जमीन पर नगर के अलावा मगही, गोदाटांडा, सलामत नगर, पसियापुर व चक गांव के ताजिए सालों से दफनाए जाते रहे हैं। इस जमीन के ढाई एकड़ के करीब हिस्से पर इलाके के कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था, जिसे हटवाने के लिए अंजुमन मुस्लिम तालिमा उत्थान कमेटी, जामा मस्जिद भीरा के सदर रियासत और सेक्रेटरी इश्तियाक खां की अगुवाई में मार्च माह से मुस्लिम समुदाय के लोग अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले हफ्ते सैकड़ों ग्रामीणों ने एसडीएम पलिया दफ्तर का घेराव करके जमीन की नाप कराके हदबंदी कराए जाने का आदेश करवाया था। जिससे कुछ दिन पहले इस जमीन की नाप में एक एकड़ में दो लोगों का चारा बोया था, जिसे उसी दिन खाली करा लिया गया, लेकिन डेढ़ एकड़ में एक फार्मर का गन्ना बोए होने से कब्जा नही हट सका था, चार दिन पहले फिर से कमेटी के लोग एसडीएम से मिले। एसडीएम पलिया ने करबला की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किए लोगों को बेदखल करने के लिए एसओ भीरा के नाम दस्ती आदेश बनाकर ग्रामीणों को दे दिया। शनिवार को कब्जा दिलाने के लिए कानूनगो रामपाल राजवंशी के भीरा पहुंचने पर ग्रामीण फोर्स मुहैय्या कराने के लिए एसडीएम का आदेश लेकर एसओ राजेश कुमार के पास पहुंचे। आरोप है कि एसओ ने गन्ना कटवाने के लिए फोर्स भेजने से इंकार कर दिया, नाराज ग्रामीण कई घंटे थाने को घेरे जमा रहे। इस बीच कमेटी के प्रतिनिधि एसओ से वार्ता करने पहुंचे। वहीं आरोपी कब्जेदार के थाने न पहुंचने पर एसओ ने ही कमेटी के लोगों से मुआवजा लेने की बात कही। चार घंटे तक चले इस घटनाक्रम में थाने के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा रही। ०००००वर्जन...मेरे पास कमेटी के लोग आए थे, इस दौरान भीड़ जमा नहीं हुई थी मैने ही लोगों को वार्ता के लिए बुलाया था। दोनों पक्ष राजी हो गए हैं। करबला की जमीन से कब्जा हटाने के लिए फार्मर गन्ना काटने के बाद खाली करवा देगा। इस मामले में मुझे कब्जा हटवाने का आर्डर नही मिला है।-राजेश कुमार, एसओ भीरा०००० वर्जन....एसडीएम के आदेश की दस्ती कागज लेकर कमेटी के लोगों के साथ गांव के लोग पहुंचे थे, लेकिन एसओ ने कब्जा हटवाने वाला आदेश मानने से इंकार कर दिया था।-इश्तियाक, सेक्रेटरी/मैनेजर, अंजुमन कमेटी भीरा।
नयी दिल्ली, २३ सितंबर (भाषा) वैश्विक बाजार के सकारात्मक संकेतों के बीच सटोरियों के अपने सौदे बढ़ाने से सोमवार को सोना वायदा भाव ०.२९ प्रतिशत बढ़कर ३७,8०5 रुपये प्रति दस ग्राम रहा। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोना वायदा भाव १०8 रुपये यानी ०.२९ प्रतिशत बढ़कर ३७,8०5 रुपये प्रति दस ग्राम रहा। इसके लिए २,२74 लॉट का कारोबार हुआ। इसी प्रकार दिसंबर डिलीवरी के लिए यह भाव 5२ रुपये यानी ०.१४ प्रतिशत तेजी के साथ ३८,5२4 रुपये प्रति १० ग्राम रहा। इसके लिए 7०3 लॉट का कारोबार हुआ। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में सोना भाव ०.५५ प्रतिशत की तेजी के साथ १,5२३.5० डॉलर प्रति औंस रहा।
जौनपुर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष अनुसुइया यू.के. ने सोमवार को कलेक्ट्रेट मीटिंग हाल में जिलाधिकारी अरविन्द मलप्पा बंगारी एवं सम्बंधित जिलास्तरीय अधिकरियों के साथ बैठक की। जिसमें उन्होंने कहा कि जिले में उनके आने का उद्देश्य है कि यहां पर रह रहे अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना। उन्होंने कहा कि संज्ञान में आया है जिले में जाति प्रमाण पत्र के लिए अनुसूचित जनजाति के लोगों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व रिकार्ड, फसली रिकार्ड, कुटुंब परिवार एवं टीसी में अगर गोंड जाति नाम रजिस्टर्ड है तो यह तीनों चीजें प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए उपयुक्त है। लेखपाल द्वारा गलत रिपोर्ट लगाकर आवेदन निरस्त करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ लोग फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी कर रहे हैं जिस पर अनुसूचित आयोग बहुत ही गंभीर है। कुछ समूह हैं जो नहीं चाहते कि अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत हो सके। प्रमाण पत्र निर्गत न होने के कारण अनुसूचित जनजाति के लोगों को नौकरी, छात्रवृत्ति एवं सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की सुविधा प्राप्त करने में असुविधा हो रही है तथा वे लाभ पाने से वंचित भी रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि जाति निर्धारण का कार्य तहसीलदार अथवा लेखपाल द्वारा नहीं किया जा सकता, अगर कोई आपत्ति आती है तो उसे जॉच कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करें। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में गोंड समाज के लोगों के चल रहे धरने को भी समाप्त करवाया। आश्वासन दिया कि शासन की अनुसूचित जनजातियों से सम्बन्धित योजनाओं का लाभ अनुसूचित जनजाति के लोगों को प्रदान किया जायेगा। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने कहा कि उपाध्यक्ष द्वारा जो भी निर्देश दिए गए हैं उनका कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। उन्होंने समस्त उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि इस सम्बन्ध में समस्त तहसीलदार एवं लेखपालों की बैठक बुलाकर इस समस्या के निस्तारण के लिए आवश्यक कार्यवाही करें। इसमें लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गौरव वर्मा, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) आरपी मिश्र, अपर जिलाधिकारी (भू.रा.) रामआसरे सिंह, समस्त उपजिलाधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी विपिन यादव, जिला प्रोबेशन अधिकारी संतोष कुमार सोनी, तहसीलदार केराकत, सदर एवं गोंड समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
ओम कैपिटल के रिसर्च प्रमुख राजेश अग्रवाल (राजेश अग्रवाल) ने गुरुवार के एकदिनी कारोबार के लिए टेक महिंद्रा (टेक महिंद्रा), वेदांत (वेदनता) और युनाइटेड ब्रेवरीज (यूनाइटेड ब्रेवरीज) के शेयर बेचने, कोल इंडिया (कोल इंडिया) तथा अशोक लेलैंड (अशोक लीलैंड) के शेयर खरीदने की सलाह दी है। राजेश अग्रवाल ने टेक महिंद्रा (६०३.१०) को ५८९.०० रुपये के लक्ष्य के साथ बेचने की सलाह दी है और इस सौदे में घाटा काटने का स्तर (स्टॉप लॉस) ६१५.०० रुपये रखने के लिए कहा है। वेदांत (३१५.७०) के लिए उन्होंने सलाह दी है कि इसे ३०७.०० रुपये के लक्ष्य के साथ बेचें। इस खरीदारी सौदे में घाटा काटने का स्तर ३२१.०० रुपये होगा। यूनाइटेड ब्रेवरीज (१०94.४५) को १०60.०० रुपये के लक्ष्य के साथ बेचने के लिए कहा गया है और इसमें घाटा काटने का स्तर ११२५.०० रुपये का है। राजेश अग्रवाल ने कोल इंडिया (२९७.६०) को ३०७.०० रुपये के लक्ष्य भाव के साथ खरीदने के लिए कहा है, जबकि इस सौदे में घाटा काटने का स्तर २९०.०० रुपये का है। उन्होंने अशोक लेलैंड (१३२.९०) को १४०.०० रुपये के लक्ष्य के साथ बेचने की सलाह दी है और इसमें घाटा काटने का स्तर १२८.०० रुपये पर रखने की सलाह दी है।
सभी मनुष्य एक ईश्वर की संतान होने के नाते एक परिवार के सदस्य होते हुए भी विचारों में भिन्नता होने के कारण अनेक संपद्राय, समाज और धर्मों में बंट गए हैं। धर्म के मौलिक तत्व शांति, प्रेम, पवित्रता इन सभी से हम वंचित हो गए हैं ये बात ओड़िशा के संबलपुर में माउंट आबू से आए धार्मिक प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके रामनाथ ने पावन सरोवर में आयोजित एक ईश्वर-एक विश्व परिवार विषय पर आयोजित सर्वधर्म सम्मेलन के दौरान कही। इस मौके पर हिंदू धर्म से स्वामिनी विष्णुप्रिया नंदा, मुस्लिम से मौलाना साहाबुद्देन खान, सिक्ख धर्म से सुरजीत सिंह, क्रिश्यन धर्म से फादर आल्फांस टोप्पो, सेवाकेंद्र प्रभारी बीके पार्वती ने भी खुदा को पाने के लिए पहले अपने आप को जानने की जरूरत बताई। सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को सेवाकेंद्र के द्वारा ईश्वरीय सौगात भी भेंट की गई और माउण्ट आबू आने का निमंत्रण दिया गया। स्व उन्नति के लिए ४ दिनों के लिए विशेष कार्यक्रम भी सेवाकेंद्र पर आयोजित किया गया। जिसमें विधायक डॉ. राजेश्वरी पानीग्रही, विकास ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के मैनेजिंग डायरेक्टर जी भास्कर, स्पेशल लैंड एक्विशन ऑफिसर सीतांशू त्रिपाठी, बीके रामनाथ, सेवाकेंद्र प्रभारी बीके पार्वती समेत अनेक वक्ताओं ने मन जीते जगतजीत पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि जितना हमारा मन उत्तेजित होता जा रहा है हम खुद से दूर होते जा रहे हैं जिसके लिए राजयोग के अभ्यास द्वारा मन को कंट्रोल कर सकते हैं। ४ दिनों तक सेवाकेंद्र से जुड़े युवा, महिला और वरिष्ठ लोगों के लिए अलग अलग कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें राजयोग की अनुभूति के साथ प्रश्नोत्तर का भी सेशन रखा गया। इसके अलावा बुर्ला में बसंतपुर के वीएसएसयूटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में बीके रामनाथ ने मोटिवेशनल योगा प्रोग्राम के तहत युवाओं को बताया कि मन को कैसे स्थिर और शांत बनाएं तथा एकाग्रता की शक्ति से सफलता हासिल करें।
नई दिल्ली : कांग्रेस ने कर्नाटक भाजपा के प्रवक्ता के इस दावे को चौंकाने वाला बताया कि बी एस येद्दियुरप्पा को कल शपथ दिलायी जाएगी। इसके साथ कांग्रेस ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या करने, संविधान को कुचलने तथा सभी परंपराओं की अनदेखी किए जाने के समान होगा।कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यह भी कहा कि बहुमत को भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की मनमर्जी से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।सुरजेवाला ने ट्विटर पर कहा, अगर यह सच है तो चौंकाने वाला है ? यह लोकतंत्र की हत्या, संविधान को कुचलने और सभी परंपराओं की अनेदखी के समान होगा। भाजपा और मोदी सरकार की मनमर्जी से बहुमत को कमजोर नहीं किया जा सकता है। वह सुरेश कुमार द्वारा कन्नड़ में लिखे गए एक ट्वीट पर प्रतिव्रिया व्यक्त कर रहे थे। कुमार ने ट्वीट किया , बी एस येदियुरप्पा कल सुबह ९.३० बजे राज भवन में मुख्यमंत्री के रुप में शपथ लेंगे। हम सभी इस अवसर पर एकत्र हों। कर्नाटक भाजपा ने भी इस बारे में ट्वीट किया लेकिन दोनों पोस्ट को बाद में हटा दिया गया।इस बीच राजभवन से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है।
अंतिम जन : क्या पुलिस विश्वविद्यालय/कॉलेज परिसर में बिना अनुमति के प्रवेश कर सकती है? क्या पुलिस विश्वविद्यालय/कॉलेज परिसर में बिना अनुमति के प्रवेश कर सकती है? इस बात को लेकर हर कहीं बहस छिड़ी हुई है कि क्या पुलिस को किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने से पहले कॉलेज/विश्वविद्यालय प्रशासन या किसी अन्य प्राधिकरण से अनुमति लेने की आवश्यकता होती है? दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी एवं उत्तर प्रदेश के अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पुलिस द्वारा प्रवेश किये जाने के बाद यह सवाल सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चा में छाया हुआ है। जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने को लेकर पुलिस ने यह कहा है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ही विश्वविद्यालय परिसर में घुसे थे, जब प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणी दिल्ली में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके के पास हिंसा की थी। इसके अलावा पुलिस सूत्रों की ओर से यह भी बताया गया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ एक प्रदर्शन के दौरान, दक्षिणी दिल्ली में हिंसा भड़कने के तुरंत बाद, पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर में प्रवेश किया और विश्वविद्यालय के द्वार को बंद कर दिया जिससे कुछ "बाहरी लोगों" को, जो छिपने के लिए परिसर में घुस गए थे, पकड़ा जा सके। इस लेख में हम इस सवाल पर चर्चा करेंगे की क्या पुलिस को ऐसे कॉलेज/यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश करने के लिए किसी की अनुमति लेने की आवश्यकता होती है अथवा नहीं और क्या हैं इससे सबंधित पुलिस के अन्य अधिकार। यदि एक वाक्य में इस सवाल का जवाब दिया जाना हो तो यह कहा जा सकता है कि, 'नहीं, पुलिस को किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने के लिए किसी से भी अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।' देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो पुलिस को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी स्थान में प्रवेश करने से रोकता हो (इसमें विश्वविद्यालय/कॉलेज परिसर भी शामिल हैं)। कानूनी रूप से, दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ की धारा ४१ के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी, किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए, किसी भी स्थान (कॉलेज और विश्वविद्यालय सहित) में प्रवेश कर सकता है। साथ ही, विश्वविद्यालय प्रशासन को इस प्रक्रिया में पुलिस अधिकारियों की मदद करने की भी आवश्यकता होती है। इसके अलावा, वर्ष २०१६ की शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसरों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उग्क) द्वारा जारी किये गए सुरक्षा दिशानिर्देश यह कहते हैं कि रात में कैंपस में गश्त करने के लिए पुलिस को आमंत्रित किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (उग्क) के इस दिशा-निर्देश में भी यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रवेश करने को लेकर पुलिस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। पुलिस की वर्तमान एसओपी (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर/मानक सञ्चालन प्रक्रिया) के अंतर्गत भी, कैंपस में प्रवेश करने से पूर्व अनुमति लेना, केवल स्थानीय पुलिस और विश्वविद्यालय के बीच एक समझ भर है और इसको लेकर पुलिस पर कोई बाध्यता नहीं है। गौरतलब है कि अगर कोई विश्वविद्यालय/कॉलेज प्रशासन, ऐसा कोई नियम बनाता है जिसके अंतर्गत पुलिस को कैंपस में प्रवेश करने से पूर्व अनुमति लेनी होगी, तो ऐसा नियम निरर्थक साबित होगा क्योंकि दंड प्रक्रिया सहित, १९७३ के अंतर्गत पुलिस को किसी भी स्थान में प्रवेश करने का अधिकार है। किन परिस्थितियों में पुलिस ऐसा कर सकती है इसे हम आगे समझेंगे। गौरतलब है कि विजयकुमार बनाम केरल राज्य २००४ (२) कल्ट 6२7 के मामले में केरल उच्च न्यायालय ने यह माना था कि यदि परिस्थितियां ऐसी बनती हैं तो पुलिस, बिना किसी के अनुरोध या अनुमति के कॉलेज परिसर में प्रवेश कर सकती है, ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों को रोका जा सके या अपराध करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। केरल उच्च न्यायालय का यह निर्णय, दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ की विभिन्न धाराओं के साथ दिखाई पड़ता है। जैसा कि हम जानते हैं, सामान्य तौर पर, दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (सीआरपीसी) की धारा ४१, पुलिस को गिरफ्तारी करने के लिए अधिकृत करती है। सीआरपीसी, मजिस्ट्रेट से प्राप्त वारंट के साथ या उसके बिना भी, पुलिस को गिरफ्तारी की विस्तृत शक्तियां प्रदान करती है। सीआरपीसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के सम्बन्ध में पुलिस को किसी भी स्थान पर प्रवेश करने से प्रतिबंधित करता हो। इसके विपरीत, सीआरपीसी की धारा ४८, स्पष्ट रूप से यह कहती है कि "एक पुलिस अधिकारी ऐसे किसी व्यक्ति को, जिसे गिरफ्तार करने के लिए वह प्राधिकृत है, वारंट के बिना गिरफ्तार करने के प्रयोजन से भारत के किसी स्थान में उस व्यक्ति का पीछा कर सकता है।" इस प्रकार, यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत है, तो वह ऐसे व्यक्ति का, भारत में किसी भी स्थान तक पीछा कर सकता है, भले ही वह स्थान उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हो। "यदि गिरफ्तारी के वारंट के अधीन कार्य करने वाले व्यक्ति को, या गिरफ्तारी करने के लिए प्राधिकृत किसी पुलिस अधिकारी को, यह विश्वास करने का कारण है कि वह व्यक्ति जिसे गिरफ्तार किया जाना है, किसी स्थान में प्रविष्ट हुआ है, या उसके अन्दर है तो ऐसे स्थान में निवास करने वाला, उस स्थान का भारसाधक कोई भी व्यक्ति, पूर्वोक्त रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा या ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा मांग किये जाने पर उसमे उसे अबाध प्रवेश करने देगा और उसके अन्दर तलाशी लेने के लिए सब उचित सुविधाएँ देगा।" इसके अलावा, सीआरपीसी की धारा १६५ और १६६, पुलिस को, बिना किसी तलाशी वारंट के, किसी संज्ञेय अपराध में अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए, किसी भी स्थान पर तलाशी के लिए अनुमति देती हैं। इस तरह की तलाशी के संचालन की प्रक्रिया, सीआरपीसी की धारा १०० में अधिनियमित है, और इस धारा की उपधारा (२) में यह प्रावधान है कि धारा ४७ (२) के प्रावधान के अनुसार ही, तलाशी के प्रयोजन के लिए उस स्थान के भीतरी द्वार या खिड़की को तोड़कर प्रवेश किया जा सकता है। भले वर्ष २०१५ में पुलिस द्वारा ज्नू में प्रवेश करना रहा हो या वर्ष २०१६-१७ में, सुरक्षाकर्मियों और पुलिस द्वारा पुलवामा विश्वविद्यालय के एक कॉलेज परिसर में प्रवेश करना रहा हो (जहाँ पुलिस द्वारा, भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में बुक किए गए छात्रों को गिरफ्तार करने के लिए प्रवेश किया गया था), हर बार ऐसी घटनाएँ बहुत सारे सवाल छोड़ जाती हैं। अंत में, मौजूदा कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके चलते पुलिस को किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए, जिसकी गिरफ्तारी का अधिकार पुलिस के पास है, या तलाशी के लिए, विश्वविद्यालय में प्रवेश करने से लिए पहले विश्वविद्यालय के कुलपति (वीसी) से औपचारिक रूप से अनुमति लेनी चाहिए। यह केवल एक शिष्टाचार के तौर पर है कि आम तौर पर पुलिस एक शैक्षणिक संस्थान के उच्च अधिकारियों को ऐसा कुछ भी करने से पूर्व विश्वास में लेती है (या तो उसकी अनुमति लेकर या अग्रिम में उसे सूचित करके)।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होती है और भारत भाग्यशाली है कि उसके पास कौशल से परिपूर्ण अभिलाषी युवा शक्ति है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यकुशलता पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कई बार अस्पतालों में बेड बढ़ाने का निर्देश दे चुके हैं, लेकिन अधिकारी अनसुना कर रहे है। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने बुधवार को घोषणा की कि दिल्ली के सुदेवा फुटबॉल क्लब और विशाखापत्तनम के श्रीनिधि फुटबॉल क्लब को हीरो आई लीग में खेलने का अधिकार दिया गया है। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त ने अपने पति को फाइटर बताया और उनलोगों को धन्यवाद दिया है, जिन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए दुआ की है। गुरुग्राम। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग में देश अच्छे मुकाम पर खड़ा है। शाह ने यहां केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल के अखिल भारतीय वृक्षारोपण अभियान में भाग लेते हुए कहा कि यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया एक बड़े संकट (कोविड-१९ महामारी) का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों के इतिहास में इस तरह की महामारी का जिक्र नहीं मिलता है और आज पूरे विश्व में कोरोना महामारी व मानव जीवन के अस्तित्व के बीच लड़ाई चल रही है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस जंग को अच्छी तरह से लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में जब बड़े से बड़े विकसित देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ चरमरा गयीं वहीं घनी आबादी वाले देशों में से एक देश (भारत) ने सफलता से यह जंग लड़ी है। उन्होंने कहा कि यहां स्वास्थ्य सेवाओं का आधारभूत ढांचा अन्य विकसित देशों की तुलना में सशक्त भी नहीं था तो सबके मन में आशंकाएं थीं कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई भारत जैसा देश कैसे लड़ेगा, किंतु आज पूरी दुनिया देख रही है कि कोरोना के खिलाफ पूरे विश्व में सफलता से जंग यदि कहीं लड़ी गई है तो वह भारत में लड़ी गई है।
नई दिल्ली: कोरोना का संक्रमण हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। देश में लॉकडाउन लगा होने के बाद भी कोरोना के मामले एक लाख ७३ हजार के पार पहुंच गए है। हालांकि रोज मरीज ठीक भी हो रहे है। पिछले २४ घंटे में अब तक के सबसे ज्यादा ७९६४ नए मामले सामने आए है और २६५ लोगों की मौत हुई है। इन बुरी ख़बरों के बीच एक अच्छी खबर भी आई है। दरअसल, पहली बार एसा हुआ है जब कोरोना के एक्टिव केस बढ़ने की बजाय घट गए है। पिछले २४ घंटे में रिकॉर्ड ११ हजार से ज्यादा मरीज ठीक होकर अपने घर गए है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के ठीक होने के बाद देश में एक्टिव केस की संख्या घट गई है। शुक्रवार को जहां एक्टिव केसों की संख्या ८९,९८७ थी, जो अब घटकर ८६,४२२ हो गई है। शुक्रवार को ११२६४ कोरोना के मरीज ठीक हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। अब तक देश भर में ८२३७० मरीज़ ठीक होकर घर वापस लौट गए हैं। देश में कोरोना का अब रिकवरी रेट ४७.४० पर पहुंच गई है। खास बात ये है कि इसमें हर दिन इज़ाफा हो रहा है। २४ मार्च को जब देश में लॉकडाउन लगा था तब मरीजों के ठीक होने की दर ७.१% थी. दूसरे लॉकडाउन में ये ११.४२% तक पहुंच गया। इसके बाद इसमें और इजाफा हुआ और ये रेट २६.५९ फीसदी पर पहुंच गई। १8 मई को जब लॉकडाउन का चौथा फेज शुरू हुआ तो ये आंकड़ा ३८% पर आ पहुंचा। और अब ये 4७ फीसदी को पार कर गिया है. आने वाले दिनों में इसमें और इजाफे की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा दूसरे देशों के मुकाबले भारत में मौत की दर भी काफी कम है। यहां कोरोना के २.८६ फीसदी मरीज़ों की मौत हो रही है। कोरोना से होने वाली मौत की दरों में बेल्जियम टॉप पर है। यहां १६.२4% मरीजों की मौत हो रही है। फ्रांस में ये आंकड़ा १५.३७ % है. इटली और ब्रिटेन में मौत की दर १४% से ज्यादा है। जबकि अमेरिका में ५.८३ फीसदी मरीजों की मौत हो रही है।
बिहार सरकार ने २००६ में स्कूल जाने के लिए साइकल खरीदने के लिए कक्षा ९ की लड़कियों को नकद रुपए देने का एक कार्यक्रम शुरू किया था। वर्ष २०१६ में किए गए एक सर्वे के आधार पर इस आलेख में दर्शाया गया है कि इससे लाभार्थियों के लिए अपनी पढ़ाई पूरी करने, कृषि के बाहर अधिक उत्पादक काम खोजने और देर से विवाह करने की संभावना बढ़ गई। हालांकि उनमें से बहुतों को काम करने की अनुमति नहीं दी गई या उन्हें उपयुक्त काम नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री बालिका साइकल योजना का आरंभ बिहार सरकार द्वारा २००६ में किया गया था। योजना के तहत कक्षा ९ में नामांकित हर लड़की को साइकल खरीदने के लिए नकद रकम मिलती है ताकि उसका उपयोग वह स्कूल जाने के लिए करे। इसके पीछे यह विचार था कि क्यूंकि जनसँख्या के अनुपात में स्कूलों की संख्या कम है और लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं इसलिए साइकल होने से दूर-दराज के स्कूलों तक पहुंचने का उनका समय घटेगा। इस तरह बिना अधिक निवेश किए उनके स्कूलों को नजदीक किया जा सकेगा। योजना के आरंभिक रिपोर्ट अत्यंत अनुकूल थे। बिना अधिक दुरुपयोग हुए यह योजना कारगर रही थी : पहले साल में ही नामांकन ३० प्रतिशत से अधिक बढ़ गया था (मुरलीधरन एवं प्रकाश २०१७) जबकि योजना से रकम का रिसाव ५ प्रतिशत से भी कम था (घटक, कुमार एवं मित्रा २०१६)। ये परिणाम काफी प्रभावशाली हैं। साइकल पर चलने वाली लड़की महज स्कूल जाने वाली लड़की नहीं है : वह समाज में हुए बदलाव और नए सामाजिक प्रचलनों तथा आकांक्षाओं में हुई वृद्धि को भी दर्शाती है। साइकल कार्यक्रम के प्रभाव का महज नामांकन की संख्या बढ़ने के रूप में मूल्यांकन करना योजना की संभावनाओं को सीमित कर देगा। कुल प्रभाव में समाज में लड़कियों और महिलाओं की भूमिका के बारे में पुरुषों और महिलाओं, दोनो के नजरिए में होने वाले बदलाव को शामिल किया जाना चाहिए। इसलिए इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में हम साइकल कार्यक्रम के दीर्घकालिक प्रभाव का अध्ययन करते हैं (मित्रा एवं मोइन २०१७)। हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि इस योजना के तहत साइकल पाने वाली किसी लड़की द्वारा दसवीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी करने की संभावना साइकल नहीं पाने वाली लड़कियों से २७.५ प्रतिशत अधिक थी। यह योजना का प्रत्यक्ष इच्छित प्रभाव है। हालांकि आश्चर्य की बात यह है कि साइकल से कोई प्रत्यक्ष मदद नहीं मिलने के बाद भी लड़कियों ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बिहार में उच्च माध्यमिक विद्यालय और कॉलेज आम तौर पर गांवों से दूर हैं और उनकी संख्या बहुत कम है। इसका अर्थ हुआ कि लड़कियां वहां साइकल से नहीं जा सकती हैं। तब भी हमारे परिणाम दर्शाते हैं कि साइकल योजना शुरू होने के बाद स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए पढ़ाई जारी रखने और अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने की संभावना साइकल नहीं पाने वाली लड़कियों की तुलना में २२.९ प्रतिशत बढ़ गई। अतः साइकल माध्यमिक विद्यालयों तक पहुंचने की बाधा दूर करने में ही मदद नहीं कर रही है। यह परिवर्तन का साधन और नई आकांक्षाओं के लिए माध्यम भी है। टिप्पणी : आरेख दर्शाता है कि बिहार में योजना के तहत साइकल पाने वाली किसी लड़की के लिए किसी खास स्तर तक पढ़ाई पूरी करने या विवाह होने अथवा काम करने के मामले में, साइकल नहीं पाने वाली बिहार की लड़की की तुलना में कितनी अधिक संभावना है जबकि दोनो श्रेणी की लड़कियों के लिए अन्य सारी चीजें समान हैं। साइकल पाने वाली लड़कियों के लिए कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने की संभावना साइकल नहीं पाने वाली बिहार की लड़कियों की तुलना में ५ प्रतिशत अधिक है। हालांकि यह सप्लाई साइड की बाधाओं का संकेत देती है, तब भी बिहार में वास्तव में कॉलेज जाने वाली लड़कियों के निम्न प्रतिशत को देखते हुए यह कोई छोटी संख्या नहीं है। साइकल कार्यक्रम शिक्षा के प्रति मानसिकता बदलने में सक्षम है, जैसा कि स्कूली शिक्षा पूरी करने की उच्च दरों से स्पष्ट होता है। कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के मामले में अचानक गिरावट लड़कियों को आगे पढ़ने देने की अनिच्छा के बजाय उनके क्षेत्रों में कॉलेजों के नहीं होने का सूचक हो सकती है। अध्ययन करने के लिए लड़कियों के लिए रास्ते खोलने से उनके द्वारा किए जाने वाले अन्य चुनावों पर चक्राकार प्रभाव पड़ता है। हमने दो निर्णयों का अध्ययन किया : काम के प्रति उनकी पसंद और विवाह के संबंध में उनके निर्णय। काम के संबंध में हमारे परिणाम दर्शाते हैं कि जिन लड़कियों को साइकल मिली, उनके काम करने की संभावना (कृषि में) कम रहती है। यह देखते हुए कि वे अधिक पढ़ रही हैं, यह आश्चर्यजनक लग सकता है। लेकिन गहराई से छानबीन करने पर हमने पाया कि लड़कियों के लिए उपलब्ध प्राथमिक पेशा कृषि में काम करना था। लड़कियों ने जमीन पर काम करने के बजाय अधिक उपयुक्त काम पाने के लिए इंतजार करना पसंद किया। हमारे अध्ययन में पाया गया कि साइकल वाली लड़कियों द्वारा कृषि में काम करने की संभावना ४.१७ प्रतिशत कम थी। जब उनसे पूछा गया कि वे काम क्यों नहीं कर रही हैं, तो ४5 प्रतिशत से भी अधिक ने कहा कि वे काम करना चाहेंगी लेकिन उनके परिवार के लोग उन्हें अनुमति नहीं देते हैं। वहीं १० प्रतिशत से अधिक ने कहा कि उन्हें उपयुक्त काम नहीं मिला है। अधिक शिक्षा ने लड़कियों की आकांक्षाओं को बदल दिया है और वे अपनी जिंदगी में कुछ अधिक हासिल करने की चाहत रखती हैं। वे कृषि में कम भुगतान वाला काम करने के बजाय कोई उपयुक्त काम पाने के लिए इंतजार करना चाहती हैं। काम की कमी उनके लिए बाधा बनती है। यह भी ऐसी अन्य नीतियों की जरूरत का संकेत देती है जो मुख्यमंत्री साइकल योजना द्वारा किए गए काम के पूरक काम करे। लड़कियों का कई तरीकों से सशक्तिकरण हुआ है, लेकिन अब उन्हें स्वतंत्र होने के साधन उपलब्ध कराने की जरूरत है। इसके लिए अधिक काम उपलब्ध कराने के लिहाज से राज्य द्वारा अधिक प्रयास और नई नीतियों की जरूरत है। हमने जिस दूसरे निर्णय पर अध्ययन किया वह विवाह संबंधी निर्णय है। भारत में विवाह की उम्र कम रहती है। वर्ष २०११ के जनगणना (सेन्सस) आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के विवाह की औसत उम्र २१.२ वर्ष (ग्रामीण महिलाओं की २0.७ वर्ष) है जो बिहार में २0.७ वर्ष (ग्रामीण महिलाओं के लिए २0.५ वर्ष) है। कम उम्र में विवाह के साथ अनेक जटिलताएं जुड़ी रहती हैं। हालांकि समाज की मानसिकता को बदलना मुश्किल है। हमने यह आश्चर्यजनक बात पाई की साइकल से स्कूल जाने वाली लड़कियां विवाह देर से कर रही हैं। हमने पाया कि साइकल कार्यक्रम से साइकल पाने वाली लड़कियों की शादी के समय उम्र बिना साइकल वाली लड़कियों से औसतन छह महीने अधिक थी। यह लड़कियों के लिए शिक्षा को आसान बनाने के एक अन्य सकारात्मक पक्ष को दर्शाता है। कुल मिलाकर साइकल कार्यक्रम के चलते लाभार्थियों की आकांक्षाएं बढ़ी हैं और महिलाओं के बारे में मानसिकता में बदलाव आया है। लड़कियों द्वारा स्कूली शिक्षा पूरी करने, कॉलेज जाने और कृषि से बाहर उत्पादक काम खोजने की संभावना बढ़ गई है। सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी, इससे महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। लड़कियों की कम उम्र में शादी की आशंका घटी है और वे बच्चों को जन्म देने में देर कर रही हैं। हमारे विश्लेषण में उन अन्य अड़चनों और बाधाओं की भी पहचान की गई है जिनका सामना साइकल पाने वाली लड़कियों को अपने नए सपने पूरे करने के मामले में करना पड़ता है। उन्हें काम पाने में कठिनाई होती है और उनके इलाके में पर्याप्त अच्छे कॉलेज नहीं हैं। यह भी एक गंभीर बाधा है कि समाज धीमी गति से बदलता है और अनेक लड़कियों को अपनी आकांक्षाएं पूरी करने के लिए अपने घर में अभी भी विरोध-प्रतिरोध झेलना पड़ता है। लेखक परिचय : शबाना मित्रा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बैंगलोर (आइआइएमबी) के सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी में असिस्टेंट प्रॉफेसर हैं। कार्ले मोइन ऑस्लो यूनिवर्सिटी के इकनॉमिक्स विभाग में स्टडी ऑफ इक्वौलिटी, सोशल ऑर्गनाइजेशन एंड परफॉर्मेंस में प्रॉफेसर हैं। यह लेख आइडियाज फॉर इंडिया की अनुमति से पुनर्मुद्रित किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की अनिवार्यता पर अहम फैसला लिया और आधार कार्ड की कानूनी मान्यता को बरकरार रखी है और साथ ही आधार की वैध पर कई शर्ते रख दी हैं । कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कोर्ट के इस फैसले पर कहा कि, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय शासन को शक्ति देता है और लोकतंत्र को शक्ति देता है । केंद्रीय मंत्री के इस बयान का वीडियो साझा करते हुए आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अंकित लाल मोदी सरकार पर वार करने से पीछे नहीं हटे । कानून मंत्री के कहे पर आप कार्यकर्ता अंकित लाल ने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ही क्यों प्रजातंत्र मजबूत होता है ? अंकित ने ट्विटर पर कहा कि, प्रजातंत्र को थोड़ी बहुत मजबूती तो सरकार भी दे सकती है । अपने इस कहे पर चुटकी लेते हुए आप कार्यकर्ता ने लिखा की, ओह, मेरी गलती है, मैं तो भूल ही गया था कि देश में भाजपा की सरकार है और इसका बस चले तो देश में प्रजातंत्र ही खत्म कर दे । सुप्रीम कोर्ट की फ़टकार के बाद ही क्यों प्रजातंत्र मज़बूत होता है? बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने आधार पर फैसला लिया की आधार को बैंक अकाउंट, मोबाइल से लिंक करने को ज़रूरी नहीं और अब निजी कम्पनियां आधार नहीं मांग सकती है। फैसले पर कोर्ट ने आधार एक्ट में कई प्रावधानों में बदलाव कर दिए है। आधार कार्ड पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई में ५ जजों की बेंच ने कहा कि सरकार को निर्देश दिए की सरकार बायॉमीट्रिक डेटा को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कोर्ट की इजाजत के बिना किसी और एजेंसी से शेयर नहीं करेगी।
शिक्षक दिवस ५ सितम्बर को हर साल मनाया जाता हैं । इस दिन ५ सितम्बर १८८८ को डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्म हुआ था । वे लोकप्रिय शिक्षक थे। उनके स्टूडेंट्स उनका जन्म दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाने लगें । वें अच्छे शिक्षक अच्छे इंसान थे । सभी से बहुत विन्रमता से बोलना व सभी की बातों को सुनना समझना उनके कुछ गुण रहें। देश के प्रथम उपराष्ट्रपति व दूसरे राष्ट्रपति भी रहे । शिक्षा के क्षेत्र में अनेक काम किये व शिक्षा को एक अलग मुकाम तक ले कर के गए । उनके काम समाज के लिये बहुत अच्छे रहें व उन्होंने समाज को एक नई दिशा प्रदान की । शिक्षक दिवस के कई उददेश्य है सच्चाई , अच्छी शिक्षा , सम्मान , आदि ।
इस साल कर्क राशि के लोगों को अपनी लव लाइफ में मुश्किल से ही खुशियां मिल पाएंगीं। इनके खुले विचारों के बावजूद परिस्थिति इनके विपरीत नज़र आएगी। पंचमेश दसवें भाव का स्वामी है और छठे और पांचवे घर में बैठा है। आमतौर पर मंगल का स्वभाव है कि वो किसी एक रिश्ते में बंधने को प्रेरित नहीं करता है। इसके प्रभाव के कारण जातक के एक से ज्यादा संबंध होते हैं इसलिए इस साल आपके ब्रेकअप की भी संभावना है। प्रेम संबंधों के मामले में ये साल काफी अच्छा नहीं रहने वाला है। इस साल आपका ब्रेकअप हो सकता है। निजी मामलों को लेकर गंभरी बहस हो सकती है। गुरु, शनि, मंगल, राहू और केतु, ये सभी ग्रह अशुभ प्रभाव डालने की स्थिति में हैं। इस साल प्रेम संबंधों से ज्यादा अपने काम, बिजनेस और पढ़ाई पर ध्यान देंगें तो बेहतर होगा। मंगल की दशा, पंचमेश के कारण आपकी लव लाइफ में भूचाल आ सकता है। गलतफहमियां बढ़ेंगी और दोनों के बीच मारपीट भी हो सकती है। शनि और गुरु दोनों ही आपको प्यार से दूर रखने वाले हैं। आप उदास और अकेलापन महसूस करेंगें। इस साल प्यार के बारे में ना ही सोचें तो बेहतर होगा। अकेले ही रहें। इस मामले में भी इस साल आपको निराशा ही हाथ लगेगी। धोखे की वजह से आपके प्रेम संबंध का अंत हो सकता है। अपने धर्म से बाहर किसी व्यक्ति के साथ रिश्ता बना सकते हैं। इस साल प्रेम संबंधों के लिए अच्छा समय नहीं है। शनि और गुरु की दशा के कारण आपको ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। बेहतर होगा कि आप बाकी चीज़ों पर ध्यान दें। अच्छा समय आने का इंतज़ार करें।
गोविंदगढ़. भरतपुर जिले के नगर कस्बे के समीप पीलूकी मंदिर के पास रविवार सुबह ट्रक व बोलेरो की टक्कर में पांच जनों की मौत हो गई और चार जने घायल हो गए। मृतकों में चार जने एक ही परिवार के हैं। गोविंदगढ़ कस्बे के कुंडा वाला मोहल्ला निवासी बाबूलाल गुप्ता परिजनों, रिश्तेदारों तथा परिचितों के साथ सुबह बोलेरो सहित तीन वाहनों में सवार होकर गोवर्धन सवामणी करने जा रहे थे। घना कोहरा होने के कारण नगर थाना क्षेत्र के ग्राम पीलूकी मंदिर के पास सामने से आ रहे ट्रक से बोलेरो टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए और उसमें बैठे लोग वाहन में ही फंस गए। घटना की सूचना मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और वाहन में फंसे लोगों को मुश्किल से बाहर निकाला। इस हादसे में घटनास्थल पर ही बाबूलाल गुप्ता (५५ ),उर्मिला देवी (४५)पत्नी रमेश गुप्ता, अनुराग (१२) व भानू (१३ ) पुत्र रमेश गुप्ता सहित बोलेरो चालक उमरदीन निवासी शाखीपुर की मौत हो गई। वहींं एक ही परिवार के चार लोग घायल हो गए। मृतकों का नगर के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद परिजन व ग्रामीण मृतकों को गोविंदगढ़ उनके निवास पर ले आए। वहीं घायलों को नगर के सरकारी अस्तपाल से अलवर व जयपुर के लिए रैफर कर दिया गया। एक ही घर से निकली चार अर्थियों को देख कस्बे में माहौल गमगीन हो गया। उनकी शव यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। वहीं शोक में कस्बे का बाजार पूरी तरह बंद रहा। गमगीन परिवार को सांत्वना देने के लिए रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा, पूर्व जिला प्रमुख साफिया खान, जिला पार्षद हरिशंकर रावत पहुंचे ।
हमने आप को कल एक रिपोर्ट मई बताया था की केंद्र सर्कार जल्द ही फसे हुए मजदुर और छात्रों को घर भेजने की तयारी कर रही है। आज केंद्र सर्कार ने सभी फसे हुए लोगो को उन के घर पहोचने के लिए स्पेशल ट्रैन चलने की अनुमति देदी है। कोरोना लॉकडाउन के बीच देश के विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए अब केंद्र सरकार ने स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इससे पहले कल ही गृह मंत्रालय ने इनकी घर वापसी के लिए नई गाइडलाइंस जारी की थी, जिनमें कई तरह की छूट दी गई थी। रेलवे ने कहा है कि जिस राज्य से मजदूर घर के लिए रवाना होंगे, वहां की सरकार को उनकी जांच करनी होगी। एसिंप्टोमेटिक को ही यात्रा की इजाजत होगी। राज्य को मजदूरों को समूह में स्टेशन तक सैनिटाइज किए हुए बसों में लाना होगा। बिहार और पंजाब सहित ४ राज्यों ने की थी स्पेशल ट्रेन की मांग बिहार, पंजाब, तेलंगाना और केरल ने केंद्र सरकार से लोगों को लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाने की मांग की थी। राज्यों ने कहा था कि लोगों की संख्या काफी है। ऐसे में बसों से इन लोगों को घरों तक पहुंचाने में काफी समय लग जाएगा। वहीं, संक्रमण का भी खतरा रहेगा, क्योंकि कई राज्यों से होकर आना होगा। लॉकडाउन में फंसे १२०० मजदूरों को लेकर तेलंगाना से झारखंड के लिए पहली स्पेशल ट्रेन आज यानी शुक्रवार को रवाना हो गई। बता दें कि लॉकडाउन में फंसे मजदूरों के लिए यह किसी बड़े राहत से कम नहीं है। हालांकि, आगे और कितनी ऐसी ट्रेनें चलेंगी, अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि तेलंगाना से खुली इस स्पेशल ट्रेन के २४ डिब्बों में लगभग १२०० प्रवासी हैं। अधिक ट्रेनें चलाई जाएंगी या नहीं, इस पर निर्णय आज लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ट्रेन आज सुबह ४:५० बजे तेलंगाना के लिंगरपल्ली से खुली है, जो झारखंड के हटिया जा रही है।
जब एक लड़की की शादी होती है तो नए घर में वो बहुत से नए रिश्तों में बंधती है। सास-ससुर के साथ रिश्ता, देवर के साथ और इन सबके अलावा जो एक और ख़ास रिश्ता होता है वो है ननद-भाभी का रिश्ता। ननद-भाभी का रिश्ता खट्टे-मीठे भावनाओं से भरा होता है लेकिन फिर भी यह कहा जाता है की ननद की खुशियां और भाभी की खुशियां एकदूसरे से जुड़ी होती है। अगर ननद-भाभी को अपनी दोस्त की तरह समझें और भाभी अपनी ननद को बहन की तरह मानें तो बहुत हद तक यह रिश्ता सुलझ सकता है। जब एक लड़की शादी करके नए घर में जाती है तो एक अच्छी ननद ही अपने भाभी को कम्फर्टेबल महसूस करा सकती है और भाभी को भी अपनी ननद की भावनाओं को समझाना चाहिए तभी यह रिश्ता ज़िंदगीभर मज़बूत बना रहेगा। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम आपको बता रहे हैं की कैसे आप ननद-भाभी के रिश्ते को खुशनुमा और मज़ेदार बना सकती हैं। ननद-भाभी के रिश्ते को दोस्ती के रिश्ते में बदलिए, ननद के साथ वक़्त बिताइए, उन्हें अपने साथ शॉपिंग के लिए ले जाएँ, उनके साथ घूमें इससे आपकी ननद को भी अच्छा लगेगा। उन्हें लगेगा की आप उन्हें महत्व दे रही हैं और वो भी आपके साथ को एन्जॉय करने लगेगी। अपनी ननद को उतना ही प्यार दें जितना आप अपनी बहन को देती हैं, उन्हें अपनी बहन की तरह समझें और मानें। उन्हें एहसास दिलाएं की आप उनकी फ़िक्र करती हैं बिलकुल अपनी बहन की तरह। आप अपनी ननद के लिए गिफ्ट ले सकती हैं और ज़रूरी नहीं की इसके लिए आप कोई खास मौका ढूंढें या कोई बहुत महंगी गिफ्ट लें। आप अपनी ननद की पसंदीदा चॉकलेट्स या कुछ पसंदीदा चीज़ें भी दे सकती हैं। इसके अलावा ननद भी अपनी भाभी को गिफ्ट देकर उन्हें खुश कर सकती हैं। अगर आपको किसी चीज़ से परेशानी है और आप अपनी बात किसी से कह नहीं पा रही है तो आप अपनी बात को ननद से शेयर करें। आप ऐसा करेंगी तो आपकी ननद भी आपसे अपनी स्कूल, कॉलेज या ऑफिस की बातें आपसे शेयर करना शुरू करेंगी और आपदोनों के बीच एक अच्छा तालमेल बनेगा। अगर आपके मन में कोई उलझन हो तो अपनी ननद से बात करें और सलाह लें, इसके अलावा अगर आपको आपकी ननद परेशान दिखें तो उनसे बात करके, उन्हें सलाह दें। इन सबके अलावा अगर आपकी पति के साथ कुछ नोंकझोंक हुई है तो अपनी ननद के साथ बात करें या आपकी ननद की आपके पति के साथ लड़ाई हो गई हो तो आप दोनों के बीच सुलह करवाने की कोशिश करें। इन सब छोटी-छोटी पर अहम् बातों को ध्यान में रखकर आप अपनी ननद-भाभी के रिश्ते को हमेशा खुशनुमा और मौज-मस्ती से भरपूर बनाएं रख सकती हैं, बस ज़रूरत है तो आपदोनों को मिलकर अपने स्वभाव से इस रिश्ते को निखारने की।
७३ करोड़ के लाठी... तनकी संभल के... २१ सिप्तंबर २०१० न्यूज डेस्क लखनऊ। अयोध्या विवाद पर २४ सितंबर के आवे वाला हाईकोर्ट के फैसला के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार परिस्थिति से निपटे के पुरी तैयारी कर रहल बिया। चाक चौबंद व्यवस्था के तहत सरकार पूरे प्रदेश भर में पुलिस के सबसे प्रभावी हथियार लाठियन के खरीद में जुट गइल बिया। अउर सरकार का ओर से एकरा खातिर ७२.५ करोड़ रुपया के स्वीकृति मिल चुकल बाटे। अयोध्या में विवादित स्थल के स्वामित्व विवाद पर फैसला २४ सितंबर के आवे वाला बा। आशंका बा कि फैसला जउन भी आये, कुछ जगह पर भीड़ प्रदर्शन कर सकत बिया। एही आशंका के तहत पुलिस खुद के मजबूत कर रहल बिया। हाल ही में कानून व्यवस्था के मुददा पर लखनऊ में भइल बइठक में पुलिस अफसर लोग इ मानलं की फोर्स के पास लाठी के काफी कमी बा। लाठियन के खरीद २४ सितंबर के पहले ही करे के तैयारी बा। एगो पुलिस अधिकारी के अनुसार पुलिस विभाग में एके-४७, इंसास रायफल, बुलेट प्रूफ जैकेट आदि के खरीददारी त होते रहेला, लेकिन लाठी खरीदे पर केहु के ध्यान ना जात रहे, लेकिन जब बइठक में इ मामला उठल त सरकार द्वारा तुरंत कारवाई भइल। लाठियन के अधिकांश खरीददारी उतर प्रदेश के रामपुर जिला से हो रहल बाटे। इहँवा सामान्य लाठी के कीमत ३०० रुपया बा, जबकि पॉलीकार्बोनेटेड लाठी के कीमत करीब ५00-७०० रुपया के बीच बा। विभाग अधिकांश पॉलीकार्बोनेटेड लाठी ही खरीद रहा बाटे, काहें कि एकरा पिटाई से दर्द त काफी होला, लेकिन जख्म ना होला।
देश की साझी विरासत सुरक्षित है, आप तो अपनी सीट की चिंता करिए शरद जी ! शरद यादव ने यह नहीं बताया कि साझी विरासत को खतरा कहां उत्पन्न हुआ है। भारत की साझी विरासत शरद यादव, राहुल गाँधी, मनमोहन सिंह, लालू यादव, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी आदि की वजह से नहीं है। यह भारतीय सभ्यता-संस्कृति का प्रभाव है। इसे कुछ अराजक तत्व समाप्त नहीं कर सकते। ऐसी कुछेक घटनाएं यदि हुई हैं, तो वे कानून व्यवस्था की समस्या हैं। इससे विरासत पर कोई असर नहीं पड़ा है। हमारा समाज आज भी पहले जैसा है। अतः शरद यादव के लिए ठीक होगा कि वे साझी विरासत की नहीं, अपनी सीट बचाने की चिन्ता करें। विपक्षी पार्टियों का जमावड़ा बड़े अर्न्तद्वन्द से गुजर रहा है। शरद यादव के साझी विरासत बचाओ सम्मेलन में यही त्रासदी दिखाई दी। नामकरण से लग रहा था कि इसमें कोई बड़ा वैचारिक धमाका होने वाला है। साझी विरासत के रूप देश की गौरवपूर्ण सामाजिक व्यवस्था पर चर्चा होगी। यह भी सोचा गया कि इस विरासत को बचाने के लिए कोई नया प्रस्ताव आयेगा। लेकिन फिर वही ढांक के तीन पात। तीन वर्षों से जो बातें चल रही हैं, वही यहां भी दोहरायी गयीं। लेकिन ये तदवीर भी उनकी कमजोरी को छिपा नहीं सकी। इससे कई तथ्य उजागर हुए। पहली बात यह कि विपक्ष की हताशा सामने आ गयी। सभी ने एक स्वर में भाजपा के मुकाबले के लिये एकजुटता का राग अलापा। इसका सीधा तात्पर्य है कि इनमें से किसी पार्टी में अब अकेले चलने की क्षमता नहीं रही। दूसरी बात यह है कि जमावडे़ में सर्वमान्य नेतृत्व का अभाव है। सभी नेता अपने-अपने लिये संभावना तलाश रहे हैं। शरद यादव भी इसी कवायद में लगे हैं। शरद के सामने नयी समस्या आ गयी है। उनका अपना जनाधार नहीं है। संसद में पहुंचने के लिये उन्हें किसी न किसी के सहारे की जरूरत हमेशा रही है। इस समय भी वह नीतीश कुमार की मेहरबानी से राज्यसभा में हैं। शरद अपनी स्थिति देख लें। बिहार में जद(यू) के सभी विधायक नीतीश कुमार के साथ हैं। अभी कुछ दिन पहले शरद बिहार की यात्रा से लौटे तो किसी एक वर्तमान विधायक ने उनसे मिलने की जरूरत नहीं समझी। यहां तक कि जद(यू) के गिने-चुने कार्यकर्ताओं के अलावा कोई उनके साथ नहीं था। राजद के सहयोग से शरद ने लाज बचायी। इसी के साथ शरद यादव के सामने समस्या उत्पन्न हुई है। नीतीश कुमार से अलग स्टैंड लेने के बाद शरद का आधार दरक गया है। लेकिन, उनकी समस्या यहीं तक सीमित नहीं है। लालू यादव ने अपनी पार्टी की विरासत बेटे तेजस्वी को सौंप दी। कांग्रेस में सोनिया गांधी की सक्रियता कम हुई है। वहां राहुल गांधी अघोषित रूप से अध्यक्ष की भूमिका में हैं। शरद को इसी कारण अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता हो रही है। उन्हें अब अपनी वरिष्ठता को किनारे रखते हुए तेजस्वी और राहुल के पीछे चलना होगा। अपनी अहमियत दिखाने के लिए उन्होंने साझी विरासत बचाओ सम्मेलन आयोजित किया। इसी तरह शरद यादव अपना नेतृत्व आगे करने का प्रयास कर रह रहे थे। इसके लिये वह नया शब्द तलाश करके लाये थे। लेकिन, उनकी साझी विरासत में पश्चिम बंगाल, केरल की घटनाओं का जिक्र नदारद थे। जिन साथियों के साथ शरद यादव अपनी विरासत बचाने का प्रयास कर रहे हैं, उनमें से कांग्रेस तो पूरी तरह से टूट गयी है। आज कांग्रेस के पास उत्तर भारत में पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सिवा कोई राज्य नहीं बचा है, जहां वो सत्ता में हो। जो कांग्रेस अपनी सियासी जमीन बचाने में खुद नाकाम है, वो शरद यादव को कितना मजबूत कर सकती है, यह अपने आप में बड़ा प्रश्न है। शरद ने यह नहीं बताया कि साझी विरासत को खतरा कहां उत्पन्न हुआ है। भारत की साझी विरासत शरद यादव, राहुल, मनमोहन सिंह, लालू यादव, अखिलेश यादव, सीताराम येचुरी आदि की वजह से नहीं है। यह भारतीय सभ्यता-संस्कृति का प्रभाव है। इसे कुछ अराजक तत्व समाप्त नहीं कर सकते। ऐसी घटनाएं कानून व्यवस्था की समस्या है। इससे विरासत पर कोई असर नहीं पड़ा है। हमारा समाज आज भी पहले जैसा है। अतः शरद यादव साझी विरासत की नहीं, अपनी सीट बचाने की चिन्ता करें। साझी विरासत में उनकी भूमिका नहीं हो सकती। यहां जो भाषण हुए, वह भी विपक्ष की बासी विरासत से ज्यादा नहीं था। राहुल गांधी अपने पुराने अंदाज में थे। कहा कि भाजपा जीत नहीं सकती, इसलिए अपने लोगों को विभिन्न संस्थाओं में तैनात कर रही है। राहुल बतायें कि उनकी सरकार किसे तैनात करती थी। वह इनके बल पर जीत कर क्यो नहीं आ गये। कुल मिलाकर विपक्ष पूरी तरह से हारा हुआ नजर आ रहा है। इस कार्यक्रम के जरिए शरद ने अपनी सियासी ताकत का प्रदर्शन करने का प्रयास जरूर किया है, लेकिन जिन नेताओं और दलों के सहारे शरद यादव अपनी सियासी ताकत जुटाने को तैयार हैं, उनके पैरों तले से पहले ही सियासी जमीन खिसक चुकी है। ये मुसलमानों का तुष्टिकरण करने वाली नहीं, उनके समग्र विकास के लिए काम करने वाली सरकार है ! अब चीन के हर पैंतरे का माकूल जवाब देने लगा है भारत !
नई दिल्ली जेएनएन। नेशनल राइफल शूटर तारा शाहदेव को शादी के बाद प्रताड़ित करने और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में दिल्ली सीबीआइ ने सीबीआइ की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआइ ने इस यह चार्जशीट मामले की जांच के बाद दाखिल की है। अधिवक्ता अविनाश कुमार पांडेय ने बताया कि चार्जशीट में तारा शाहदेव के कथित पति रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन, उसकी मां कौशल रानी और हाई कोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद के नाम शामिल हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सीबीआइ टीम को इस मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। रंजीत सिंह कोहली से जुड़े तीन मामलों को दिल्ली सीबीआइ ने टेक ओवर करते हुए २०१५ में जांच शुरू की थी। सीबीआइ की जांच शुरू होने के पूर्व पुलिसिया केस की सुनवाई के दौरान कोहली को २७ अगस्त, २०१४ को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। २८ अक्टूबर को रांची कोर्ट में पेशी के बाद उसे बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में भेज दिया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह लगातार जेल में बंद है। जबकि उसकी मां कौशल रानी को जेल जाने के बाद जमानत मिल गई थी। रंजीत सिंह कोहली ने नेशनल राइफल शूटर तारा शाहदेव के साथ शादी की थी। आरोप है कि इसके बाद तारा को धर्म परिवर्तन करने के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। तारा शाहदेव ने रंजीत सिंह कोहली से तलाक की याचिका भी रांची के परिवार न्यायालय में दायर की है। इस मामले पर भी सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है।
वेतन सब्सिडी की नीति वर्तमान में केन्द्र एवं राज्य स्तरों पर जितनी भी सब्सिडी दी जाती है। सभी पूंजी के रूप में दी जाती हैं-चाहे वह ब्याज पर हो या ऋण पर हो। हमारे सकल घरेलू उत्पाद में सब्सिडी का हिस्सा लगभग ५ प्रतिशत है। ये सब्सिडी पूंजी आधारित उत्पादन के तरीकों को बढ़ावा देती है। इसमें परिवर्तन करके इसे वेतन आधारित बनाया जा सकता है। यानी कोई भी उद्यमी जितनी अधिक नौकरियाँ देगा, उसे उतनी अधिक सब्सिडी मिलेगी। कौशल विकास कौशल विकास का वर्तमान कार्यक्रम अधिक गति नहीं पकड़ पाया है। कौशल विकास मंत्रालय ने भी ३० करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने के अपने लक्ष्य को त्याग दिया है। जुलाई २०१७ तक जिन ३० लाख लोगों ने किसी प्रकार का व्यावसायिक प्रशिक्षण लिया है, उनमें से १० प्रतिशत से भी कम को रोजगार प्राप्त हुआ है। इस क्षेत्र में हमें स्थानीय व्यवसायियों को जर्मन मॉडल की तरह काम करने को तैयार करना होगा। जर्मनी में विश्व का सफलतम व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया है। इस मॉडल में जर्मनी के व्यवसायी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए काफी धन खर्च करते हैं। इससे उन्हें प्रशिक्षु के रूप में ही बहुत अच्छे कर्मचारी मिल जाते हैं। किसी भी स्थिति में रोजगार की गारंटी के बिना व्यावसायिक प्रशिक्षण देना व्यावहारिक नहीं है। तीसरा मार्ग कृषि क्षेत्र से संबंधित है। आज की युवा पीढ़ी अपने पारंपरिक कृषि व्यवसाय से बाहर निकलने को आतुर है। दरअसल, इस व्यवसाय को अधिक उत्पादक एवं अधिक आय वाला बनाने की आवश्यकता है। अनाज की फसल से अधिक लाभ फल, सब्जी एवं पशुपालन में है। ये उद्यम भी रोजगार के कई अवसर देते हैं। परन्तु इस क्षेत्र को अधिक उत्पादक एवं रोजगारोन्मुख बनाने के लिए कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रीजरेटेड परिवहन की संख्या को बढ़ाना होगा। १९१७ में हुई रूस की अक्टूबर क्रांति की चर्चा के बिना २०वीं शताब्दी का इतिहास लिखा नहीं जा सकता। ७ नवम्बर को रूसी समाजवादी क्रांति की शताब्दी पूर्ण हुई। एक देश के लिए यह ऐसी कहानी है, जिसने उसे बहुत ही कम समय में एक गरीब कृषि प्रधान देश से सैनिक और औद्योगिक ताकत बना दिया। इसे रूसी लोगों के साहस, त्याग और पीड़ा की कथा भी कहा जा सकता है। क्रांति के इस शताब्दी वर्ष में ऐसे भी कई विद्वान हैं, जो इसे विफल मानते हुए, उस दृष्टिकोण से इसका अध्ययन करना चाहते हैं। परन्तु तथ्य कुछ और ही बयां करते हैं। अक्टूबर क्रांति का विचार इतना शक्तिशाली था कि इसने विश्व के अधिकांश दमित लोगों के दिलों को छू लिया। शोषण एवं गुलामी से मानव मात्र को स्वतंत्र करना ही क्रांति का मुख्य लक्ष्य था। इसने ऐसे पूंजीवाद को नकारकर समाजवाद की स्थापना की, जिसमें एक मानव दूसरे का शोषण करता है। इस क्रांति ने प्रकृति और मानव के बीच के संबंध को सद्भावपूर्ण बनाया एवं हर व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक सोपान के लिए तैयार कर दिया।अक्टूबर क्रांति ने पूरे विश्व के ऐतिहासिक एवं वैचारिक परिदृश्य को ही बदलकर रख दिया। इसने न केवल जार के शासन को परिवर्तित किया, बल्कि समस्त विश्व पर दूरगामी प्रभाव डाला। समस्त विश्व के स्वतंत्रता आंदोलनों पर क्रांति का व्यापक प्रभाव पड़ा। इसमें भारत भी शामिल था। भारतीय स्थितियों में आज भी इसका उतना ही प्रभाव है। वर्तमान के समाजवादी एवं माक्र्सवादी दल इसका उदाहरण हैं। हमारे स्वतंत्रता संघर्ष के प्रणेताओं ने भी रूसी क्रांति के विचारों का समर्थन किया था।अक्टूबर क्रांति के नेता लेनिन ने एशियाई देशों के समाजवादियों से अपील की थी कि वे अपने देश के अनुभवों एवं जरूरतों के अनुसार क्रांति की नई विचारधारा बनाएं। यद्यपि रूसी समाजवादी अतिवादी थे, लेकिन उन्होंने बाकी देशों को रूसी क्रांति की नकल न करने की ही सलाह दी। काँक्रीट एनालिसिस ऑफ़ काँक्रीट कंडीशन्स (ठोस परिस्थितियों का यथार्थपूर्ण विवेचन), यही लेनिन के द्वंद्ववाद की परिभाषा थी। दरअसल, एशियाई देशों की परिस्थितियाँ काफी जटिल रही हैं। इसकी सामाजिक-आर्थिक संरचना की ऐतिहासिक परंपरा है। माक्र्स ने भी कहा था कि एशिया के सामाजिक एवं आर्थिक संबंध एक- दूसरे पर आरोपित हैं। माक्र्स ने इसे एशियाटिक मोड ऑफ़ प्रोडक्शन का नाम दिया था। लेनिन ने इन देशों के माक्र्सवादियों को अपने यहाँ की स्थितियों का विवेचन करके रणनीति बनाने को कहा था। भारत में जातिभेद और लिंगभेद जैसी जटिल संरचना रही है। लेनिन के साम्राज्यवाद के विचार ने भी एशियाई देशों के समाज को समझने में सहयोग दिया। पूर्वी देशों में पूंजीवाद का स्वरूप जटिल है। पूंजीवाद की पश्चिमी अवधारणा पूर्वी देशा में विध्वंसक साबित हो रही है। इसने इन देशों की जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों, आदिवासियों, कृषकों एवं पर्यावरण के लिए संवेदनशील तंत्र को नष्ट कर दिया है। पूंजीवाद पर आधारित विकास का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण ने किसानों को कंगाल कर दिया है। यही कारण है कि वे आत्महत्या करने को मजबूर हो गए हैं। रासायनिक खाद के अत्याधिक प्रयोग से खाद्यान्न, दूध, सब्जी का दूषित होना प्राणघातक बीमारियाँ तथा आए दिन होने वाले सड़क हादसे भी अन्य ऐसे ही उदाहरण हैं, जो भारत में पूंजीवादी विकास का नमूना पेश करते हैं। पूंजीवादी-साम्राज्यवादी विकास का ही नया नाम नवउदारवाद है। इसने समाज में बहुत अधिक असमानता उत्पन्न कर दी है। सामाजिक मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। अपनी राजनीतिक शक्ति को सुरक्षित रखने के लिए सत्ताधारी दक्षिणपंथी वर्ग और अधिक फासीवादी होता जा रहा है, और वह प्रजातंत्र तथा उससे संबंद्ध संसद जैसी प्रजातांत्रिक संस्थाओं में सेंध लगा रहा है।अक्टूबर क्रांति पूर्वी देशों में पूंजीवाद को बेहतर समझने में हमारी मदद कर सकती है। भारत में धर्मनिरपेक्ष प्रजातंत्र, सामाजिक न्याय एवं समाजवाद की रक्षा के लिए सभी शोषित एवं दमित वर्गों को एकजुट होना होगा। यह अनिवार्य हो गया है कि भारतीय परिस्थितियों में समाजवादी माक्र्सवाद को वैज्ञानिक विचारधारा के रूप में सामने रखें। अभी मानवता को कई अक्टूबर क्रांतियों की आवश्यकता है। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित डी. राजा के लेख पर आधारित।
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बाद आज पांचवी बार विश्व विख्यात गंगा सेवा निधि की गंगा आरती का स्थान बदल दिया गया है। ये वही आरती है जिसे देखने पीएम मोदी अक्सर वाराणसी आते है। इसके साथ ही पीएम मोदी के साथ भी कई देशों के मेहमान भी यहां शिरकत कर चुके है। ऐसे में बीते २४ घण्टे में तेज़ बारिश के कारण गंगा का जलस्तर काफी बढ़ गया है। अब गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर गंगा आरती होना शुरू कर दिया गया है। वही आज इसकी शुरुआत होने के साथ ही आज ही भीषण बारिश भी हुई। जिसके बाद दैनिक होने वाली गंगा आरती को भीषण बारिश में करना पड़ा। एक तरफ भीषण बारिश हो रही थी तो वही बारिश में भीग कर विदेशी मेहमान आरती में शामिल हुए। यही नही वाराणसी में होने वाली आरती को भारत सहित विदेशो से भी लोग देखने आते हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई प्रकार के शारीरिक, हॉर्मोनल और मानसिक बदलावों से झूझना पड़ता है, जिसमें से उल्टी होना, जी मिचलाना, चक्कर आना सामान्य घटनाएं है, लेकिन प्रेग्नेंसी में अक्सर महिलाओं को खून की कमी भी देखी गयी है जो की मां और बच्चे दोनों के लिए ही खतरनाक साबित हो सकती है। भारत में ज्यादातर महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान हीमोग्लोबिन का लेवल सामान्य से कम ही पाया जाता है और इसलिए डॉक्टर उन्हें दूसरे-तीसरे महीने से ही आयरन की गोलियां लेने की सलाह देते हैं। आयरन शरीर में हिमोग्लोबिन बनाता है,इसलिए गर्भवती महिलाओं को आयरन से भरपूर चीज खाने की भी सलाह डॉक्टर्स द्वारा दी जाती है। प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को नियमित रूप से अपने आहार में खजूर और सूखे मेवों को शामिल करना चाहिए क्योकि इनके सेवन से आयरन की कमी दूर होने के साथ साथ शरीर को ताकत भी मिलती है। अंजीर में विटमिन ए, बी१, बी२, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैगनीज, सोडियम, पोटैशियम और क्लोरीन पाया जाता है। दो अंजीर को रात को पानी में भिगोकर, सुबह उसका पानी पीने और अंजीर खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ता है। पालक में विटामिन ए,बी,सी, लोहा, कैल्शियम, प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट,फाइबर,खनिज पदार्थ, मैग्निशियम, आयरन, अमीनो अम्ल तथा फोलिक अम्ल जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे आप कच्चा और पक्का कर, दोनों तरीकों से खा सकते हैं। पालक का जूस आपके पाचन तंत्र की अच्छे से सफाई करके आपके शरीर में विषाक्त कीटाणुओं से उत्पन्न होने वाले रोगों से रक्षा करता है। पालक में आयरन काफी अधिक मात्रा में होता है अतः प्रेग्नेंसी में इसके सेवन से खून की कमी को पूरा किया जा सकता है। चुकुंदर में मौजूद फॉलिक ऐसिड प्रेगनेंसी में स्वास्थ्यवर्धक होता है । साथ ही इसमें कैल्शियम, सल्फर, पौटाशियम,क्लोरीन, आयोडीन एवं आयरन आदि पाए जाते हैं। ये गर्भवती स्त्री के शरीर में खून की कमी नहीं होने देता जिसके कारण वो सुरक्षित प्रसव के लिए तैयार हो पाती है । यह शिशु के संपूर्ण विकास में भी मदद करता है । इसके अलावा इसके नियमित सेवन से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को थकावट तथा ऊर्जा की कमी महसूस नहीं होती है।
मुंबई: मायानगरी के नाम से मशहूर मुंबई में कई ऐसी ख़ूबसूरत और अनोखी चीज़ें हैं, जिसके बारे में जानकार लोगों को हैरानी होती है। उन्ही में से एक है चमक-धमक से भरा हुआ बॉलीवुड। जी हाँ बॉलीवुड की दुनिया आम दुनिया से बिलकुल भी अलग है। इस दुनिया में हमारे और आपके जैसे दिखने वाले लोग ही रहते हैं, लेकिन इनका रहन-सहन और ठाठ-बाठ आम लोगों से बिलकुल अलग होता है। बॉलीवुड में कई ऐसे स्टार्स हैं जो अपनी बेहतरीन लाइफ़स्टाइल के लिए जाने जाते हैं। हर किसी का सपना होता है कि वह अपना जीवन काफ़ी आराम और ठाठ-बाठ से गुज़ारे। लेकिन सभी लोग ऐसा नहीं कर पाते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह होती है पैसे की कमी। बॉलीवुड के कई ऐसे स्टार्स हैं जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है। आम लोग जितने पैसे में अपना पूरा जीवन गुज़ार देते हैं, उतने में ये स्टार्स अपने महीने भर का खाना खाते हैं। बॉलीवुड स्टार्स को आलीशान कार रखने का भी काफ़ी शौक़ है। उनका यह शौक़ पुराने ज़माने से चला आ रहा है। आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे स्टार्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके पास इतनी महँगी कारें हैं, जिनकी क़ीमत जानकार आप हैरान हो जाएँगे। आपको यह जानकार और भी हैरानी होगी कि इन सुपरस्टार्स के पास ऐसी महँगी कारें एक नहीं बल्कि कई हैं। बॉलीवुड के महानायक के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है। इसके साथ ही उनके कार प्रेम के बारे में भी बताने की ज़रूरत नहीं है। अमिताभ बच्चन को कारों का बहुत शौक़ है। २०१३ में अमिताभ बच्चन ने रॉल्स रॉयस फैंटम ख़रीदी थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें इस कार की क़ीमत उस समय ३.५ करोड़ रुपए थी। अमिताभ बच्चन के पास इसी तरह की 2५ आलीशान कारें हैं। बॉलीवुड में किंग खान के नाम से मशहूर शाहरुख़ खान को भी कारों का काफ़ी शौक़ है। महँगी गाड़ियाँ रखने के मामले में शाहरुख़ खान पूरे बॉलीवुड में पहले नम्बर पर आते हैं। शाहरुख़ खान के पास बुग़ाती वेरॉन है, जिसकी क़ीमत लगभग १२ करोड़ रुपए है। शाहरुख़ खान के पास इसके साथ ही बीएमडब्ल्यू ६, ऑडी ६, रॉल्स रॉयस फैंटम और बेंटली जैसी महँगी गाड़ियाँ भी हैं। प्रियंका चोपड़ा भी कार के मामले में किसी से पीछे नहीं है। प्रियंका के पास रॉल्स रॉयस घोस्ट है। इसकी क़ीमत २ करोड़ रुपए है। इसके साथ ही प्रियंका के पास मर्सीडिज-बेंज़, पोर्श और बीएमडब्ल्यू जैसी गाड़ियाँ भी है। ऋषि कपूर के लाल रणबीर कपूर को भी कारों का काफ़ी शौक़ है। इनके पास ऑडी आर ८ है। इस कार की क़ीमत २ करोड़ रुपए है। रणबीर के पास रेंज रोवर स्पोर्ट, मर्सीडिज बेंज़ जैसी गाड़ियाँ भी है। ऋतिक रोशन को भी महँगी कारों का काफ़ी शौक़ है, ऋतिक रोशन ने अपने जन्मदिन के मौक़े पर २०१६ में रॉल्स रॉयस घोस्ट सीरीज़ २ ख़रीदी थी। इस कार की क़ीमत ७ करोड़ रुपए है। इसके साथ ही रितिक रोशन के पास रॉल्स रॉयस घोस्ट सीरीज़ १, फ़ेरारी ३६० मोडेना और मसराती स्पाइडर जैसी कारें भी हैं। बॉलीवुड के दबंग सलमान खान महँगी कार रखने के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। सलमान खान के पास ऑडी आर एस ७ का स्पोर्टियर वर्जन है। इस कार की क़ीमत १.३६ करोड़ रुपए है। इसके साथ ही सलमान खान के पास टोयोटा की लैंड क्रुजर, लेक्सस की एलएक्स 5७0, बीएमडब्ल्यू एक्स ६, मर्सीडिज बेंज़ जैसी कारें भी हैं।
उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में आयोजित सिख समागम में कहा कि जब तक कश्मीर में हिंदू शासक था, तब तक वहां सभी धर्मों के लोग सुरक्षित थे। लेकिन बदलते समय में जब हिंदू राजा का पतन हुआ तो वहां हिंदू और सिख समाज के लोगों का भी पतन होना शुरू हो गया। सीएम ने अपने बयान में कहा कि आज कश्मीर की स्थिति क्या है, इसपर विचार होना चाहिए। सवाल यह है कि क्या घाटी में आज कोई भी खुद को सुरक्षित बोल सकता है? जवाब है-नहीं। ऐसे में हमें इतिहास से कुछ सीखना चाहिए। बता दें कि सीएम योगी से पहले यूपी पहुंचे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी रविवार को कहा था कि कश्मीर घाटी के आतंकवाद को बंदूक के बल पर खत्म नहीं किया जा सकता। मेरठ के एक कार्यक्रम के दौरान मलिक ने कहा था कि घाटी का आतंकवाद सीमा पार से प्रायोजित है, इसलिए इसे बंदूक की गोली से समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर असल में घाटी से आतंकवाद का अंत करना है तो इसके लिए यहां के युवाओं से संवाद स्थापित करना होगा। मलिक ने कहा था कि घाटी में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। इसके अलावा निकाय चुनाव के दौरान भी हालात सामान्य रहे हैं। ऐसे में हाल में हुए चुनाव घाटी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत हैं। उन्होंने कहा कि पहले कश्मीर में चुनाव के दौरान आए दिन हत्या जैसी वारदात होती थी, लेकिन इस बार ऐसी घटनाएं नहीं हुईं।
- फिर अंबेडकर की मूर्ति टूटी, हाइवे जाम, संत कबीर नागर न्यूज इन हिन्दी -अमर उजाला बेहतर अनुभव के लिए अपनी सेटिंग्स में जाकर हाई मोड चुनें। मनियरा/कांटे। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के लहुरादेवा गांव में रविवार रात डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को कुछ अराजक तत्वों ने तोड़ दिया। खबर मिलने पर सोमवार को गुस्साई भीड़ ने कांटे पुलिस चौकी का घेराव किया। मांग अनसुनी होने पर लोगों ने भुजैनी चौराहे पर हाइवे जाम कर दिया। एसडीएम, सीओ और कोतवाल फोर्स के साथ पहुंच गए। लोगों को पीएसी के जवानों ने लाठी चलाकर भगाया। सन १९९७ में लहुरादेवा गांव के चौराहे पर भंते अशोक प्रिय ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का शिलान्यास किया था। रविवार रात अंबेडकर की प्रतिमा का दाहिना हाथ अराजक तत्वों ने तोड़ दिया। जानकारी मिलने पर लहुरादेवा, पैली, भुजैनी, कांटे, फुलवरिया, सरौली आदि कई गांवों के लोग सोमवार को मौके पर पहुंच गए। ट्रैक्टर ट्राली से लोग पहले कांटे चौकी पर पहुंचे, यहां अराजक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मौके पर चौकी इंचार्ज नहीं मिले। नाराज लोगों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में बालकेश्वर बौद्ध के नेतृत्व में भुजैनी चौराहे पर हाइवे जाम कर दिया गया। करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। सूचना पर एसडीएम विनय सिंह, सीओ आरके शर्मा, कोतवाल अशोक यादव पीएसी के साथ पहुंच गए। लाठी चलाकर पुलिस ने जाम समाप्त करवाया। बताया जा रहा है कि प्राथमिक स्कूल की छत पर मूर्ति का टूटा हाथ मिल गया। कोतवाल ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ मूर्ति खंडित करने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही अराजक तत्वों का पता लगा लिया जाएगा। इनसेट शहर में प्रदर्शन कर जताया विरोध बुद्धा मानव मानव कल्याण संस्थान के उपाध्यक्ष रामकिशुन के नेतृत्व में २४ लोगों ने कोतवाली खलीलाबाद के पास सड़क पर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि लहुरादेवा में अंबेडकर की प्रतिमा खंडित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ उनकी गिरफ्तारी की जाए। नई मूर्ति प्रशासन स्थापित कराए। बौद्ध भिक्षुओं, बौद्ध उपासकों की सुरक्षा प्रशासन मुहैया कराए। डीएम को भी अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
चंडीगढ, ४ मई हरियाणा पुलिस ने नशे के कारोबार पर रोकथाम लगाते हुए कैन्टर मे सवार तीन व्यक्तियों को फतेहाबाद जिला से काबू कर उनके कब्जे से ६८८ ग्राम हेरोइन बरामद कर सफलता हासिल की है। हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राकेश उर्फ कालु निवासी माखुसुरानी, विजय निवासी डिग मंडी व तीसरे आरोपी की पहचान रघुवीर सिह निवासी गांव बोदीवाली के रुप मे हुई है। जब्त की गई हेरोइन की कीमत करोड़ रुपए के करीब बताई गई है। जानकारी के अनुसार पुलिस टीम नैशनल हाईवे नजदीक टी प्वाईट मोहम्दपुर रोही रोङ पर नाकाबंदी कर चैकिंग कर रहे थे। उसी दौरान हिसार की तरफ से आ रही एक कैन्टर को चैकिंग के लिए रुकवाया जिसमे तीन लोग सवार थे। पुछताछ करने पर कैन्टर मे बैठे तीनो व्यक्ति कोई सन्तोषजनक जवाब नही दे सके। पुलिस ने शक के आधार पर उनकी तलाशी लेने पर तीनों के कब्जे से ६८८ ग्राम हेरोइन बरामद की है। पुछताछ पर आरोपियो ने बताया यह हेरोइन हम कैस्वपुर मन्डी दिल्ली से रोहीत नाम के लङके से लेकर आये थे। पुलिस ने आज तीनों आरोपियों को कोर्ट मे पेश किया गया।
भोपाल: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शौच को लेकर दलित मासूमों की हत्या पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दुखद और अति निंदनिय करार दिया है। मायवती ने इस मामले में दोषियों का फांसी देने की मांग की है। घटना के बाद से ही गांव में तनाव का बना हुआ है। मायावती ने ट्वीट कर मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार और केंद्र सरकार से सवाल किया है कि गरीब दलितों व पिछड़ों आदि के घरों में शौचालय की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई है। मायावती ने ट्वीट कर लिखा है कि देश के करोड़ों दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों को सरकारी सुविधाओं से काफी वंचित रखने के साथ-साथ उन्हें हर प्रकार की द्वेषपूर्ण जुल्म-ज्यादतियों का शिकार भी बनाया जाता रहा है और ऐसे में मध्य प्रदेश के शिवपूरी में २ दलित युवकों की नृशंस हत्या अति-दुःखद च अति-निन्दनीय। उन्होंने ने दूसरे ट्वीट में लिखा कांग्रेस व बीजेपी की सरकार बताए कि गरीब दलितों व पिछड़ों आदि के घरों में शौचालय की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई है? यह सच बहुत ही कड़वा है तो फिर खुले में शौच को मजबूर दलित युवकों की पीट-पीट कर हत्या करने वालों को फांसी की सजा अवश्य दिलायी जानी चाहिए। बता दें, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के गांव भावखेड़ी में बुधवार की सुबह सड़क पर शौच करने को लेकर गांव के ही दो युवकों ने २ बच्चों की लाठी से पीट पीटकर हत्या कर दी। दोनों बच्चे आपस में बुआ-भतीजे थे। दोनों शौच के लिए घर से निकले थे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भवखेड़ी गांव पहुंची और दोनों आरोपियों हाकिम और रामेश्वर को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस आरोपियों को शिवपुरी कोतवाली ले आई है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
भारत-चीन सीमा पर वास्तवितक नियंत्रण रेखा अब करोड़ों रुपए की तस्करी का जरिया बन गई हैं। जहाँ भारतीय कारोबारी तस्करी के जरिए करोड़ों रुपए मूल्य के रोजमर्रा के उपयोग केसामान तिब्बत में भेज कर वहाँ से चीन के फैंसी उत्पादों को भारत लाते हैं। यह इलाका है लद्दाख के दक्षिण पश्चिम में स्थित शंगथांग, जो तस्करों के लिए स्वर्ग बन गया है। यहाँ से गेहूँ, चावल, सिगरेट, बीड़ी तथा कुकिंग तेल जैसी दैनिक उपभोग की वस्तुओं का तस्करी होती है। लद्दाख क्षेत्र के सैन्य तथा प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भारतीय कारोबारी बदले में पश्मीना शाल, चीनीबर्तन, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, कंबल आदि लाते हैं। अधिकारियों के अनुसार पिछले साल के ओलिम्पिक से पहले चीन ने शंगथांग इलाके के दूसरी ओर अपनी भूमि मेंदुमशेले में दो अस्थाई स्थल बनाए। यहाँ दोनों तरह के कारोबारी इकट्ठे होते और सामान की अदला-बदली करते।लेकिन ओलिम्पिक के दौरान तिब्बती विरोध के चलते चीन के अधिकारियों ने इस व्यवस्था को बंद कर दिया। इसके बाद दोनों तरफ के तस्करों के लिए अदला-बदली के रूप में तस्करी का मार्ग खुल गया। कुछ अधिकारियों का मानना है कि चीन के अधिकारी इस तस्करी को अनुमति दे रहे हैं क्योंकि उनके लिए मुख्यचीन से पश्चिमी तिब्बत में आवश्यक वस्तुओं की समुचित आपूर्ति बनाए रखना कठिन है। सूत्रों का कहना है कि हालाँकि भारत तिब्बत सीमा पुलिस तथा सेना इन तस्करों पर काबू करने की कोशिश कररही है लेकिन बड़ी संख्या में पहाड़ी दर्रों के चलते इस पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। कुछ अन्य अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों परनियंत्रण कड़ा करने पर लद्दाखी राजनीतिक हस्तक्षेप होता है। स्थानीय स्तर पर इस तरह के कारोबार की अनुमति का आग्रह किया जाता है क्योंकि अनेक लोगों की आजीविका इससे चल रही है।
अक्टोबर १, 20१5 प्रिया नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) भर्ती अधिसूचना के माध्यम से प्रबंधक / वरिष्ठ प्रबंधक की भर्ती के लिए एक भर्ती अधिसूचना जारी की है । पूरा करने वाले उम्मीदवारों को ब.टेक/ब.ए,म.स्क,म्का नेशनल से नई भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई)। योग्य उम्मीदवारों को या उससे पहले प्रबंधक / वरिष्ठ प्रबंधक नौकरी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते २८/१०/२०१५ । कैसे आदि लागू करने के लिए नीचे पाया जा सकता आयु सीमा, चयन प्रक्रिया, योग्यता, आवेदन शुल्क, जैसे रिक्ति के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करें। नौकरी विवरण: अंत का विस्तृत ज्ञान एक संदेश / दोहरी संदेश सिस्टम्स, संदेश संहिताओं और ऑनलाइन / ऑफलाइन प्राधिकरण के मापदंडों के ज्ञान सहित कार्ड भुगतान समाशोधन और निपटान, सुलह प्रक्रियाओं को समाप्त करने के लिए। खड़ी होकर प्रसंस्करण परीक्षण और पैरामीटर सेटअप का ज्ञान। अन्य नेटवर्क के इंटरचेंज शुल्क गणना और इंटरचेंज शुल्क प्रसंस्करण संरचना प्रभावित करने वाले कारकों का विस्तृत ज्ञान। काम कर क्लियरिंग और निपटान, अनुपालन पर अनुभव और संपादन और पूर्वसंपादित प्रसंस्करण सहित पूरे इंटरचेंज प्रणाली की अस्वीकृति हैंडलिंग। चैनलों में नप्सिस कार्ड भुगतान नेटवर्क के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार है। डेबिट / प्री के लेन-देन का प्रवाह और वापस कार्यालय के संचालन के अनुभव क्रेडिट कार्ड / इकॉम / मोबाइल / एटीएम / आईवीआर / भुगतान किया। निगरानी और उद्योग के उत्पाद के प्रदर्शन ज्ञान, बाजार के रुझान का मूल्यांकन, और प्राधिकरण शुरुआत पूरा लेन-देन चक्र के संबंध में विभिन्न प्रतियोगियों और लेन-देन के निपटारे।
नौगांव तहसील के सफाई कर्मचारियों ने एक बैठक का आयोजन किया। जिसमें अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन जिला अध्यक्ष आदित्य बाल्मिक व जिला पदाधिकारी बैठक प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इस दौरान रवि बालमीक जिला महामंत्री, विष्णु बालमिक संगठन मंत्री, नीरज बालमिक सहित जिला कार्यकारिणी के सदस्यों को सम्मिलित किया गया। इस बैठक में नौगांव सफाई कर्मचारियों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। सफाई कर्मचारियों ने बताया कि नियमितिकरण की प्रक्रिया को लेकर प्रदेश में दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मचारी के लिए चलाई जा रही है। वहीं नौगांव नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा न तो उसकी कोई वरिष्ठ सूची प्रकाशित की गई और न ही कर्मचारियों को इसके बारे में सूचना दी गई है। बल्कि गोपनीय तरीके से, बगैर वरिष्ठता और सफाई कार्य नहीं करते वालों का विनियमितीकरण कर दिया गया है। इससे वहां के सफाई कर्मचारियों में रोस है। बैठक में सर्व सहमति से यह निर्णय लिया गया कि जल्द ही ट्रेड यूनियन के बेनरतले नौगांव नपा अधिकारी व कलेक्टर को ज्ञापन के माध्यम से इस भ्रष्टाचार से अवगत कराया जाएगा। अगर सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ तो जिले के साथ सभी तहसील, ब्लाक अौर नौगांव में कर्मचारियों के समर्थन में अनिष्चित कालीन काम बंद हडताल पर की जाएगी। इसी अवसर पर सभी सफाई कर्मचारियों की सहमति से जीतेंद्र बालमिक को अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन नौगांव तहसील का अध्यक्ष बनाया गया। छतरपुर। नियमतीकरण की मांग को लेकर कर्मचारियों की हुई बैठक्।
हिन्दी में कथा साहित्य अकूत संपदा से परिपूर्ण है। कहानी, निबंध, रिपोर्ताज, जीवनी, संस्मरण, नाटक आदि विविध विधाओं के माध्यम से कितने ही रचनाकारों ने हिन्दी को साहित्य-संपदा से आप्लावित कर देने का कार्य किया है। इन्हीं में से एक अनन्य विधा नाटक भी है। नाटक को आधुनिक गद्यकाल के प्रारंभ में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने ही विशिष्ट पहचान दिलाने का कार्य किया। प्राचीन हिन्दी नाट्य साहित्य में कालिदास से लेकर आधुनिक काल के द्वार पर आकर हम भारतेंदु हरिश्चंद्र से साक्षात्कार करते हैं और उनके कुछ बाद के वर्षों तक हरिकृष्ण प्रेमी, वृंदावनलाल वर्मा, धर्मवीर भारती, मोहन राकेश, लक्ष्मीनारायण लाल, रामकुमार वर्मा, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना आदि का भी नाम ले सकते हैं, जिन्होंने नाटक को अपना विशेष योगदान दिया। इन्हीं गिने-चुने नामों में एक नाम जगदीशचंद्र माथुर का भी आता है। इन्होंने अपनी कई नाट्य रचनाओं से हिन्दी नाट्य साहित्य को समृद्ध करने का कार्य किया। यशस्वी लेखक, नाटककार एवं संस्कृतिकर्मी जगदीशचंद्र माथुर का ये जन्मशती वर्ष है। इनके जीवन की सबसे बड़ी बात ये है कि इनके जीवन का अधिकांश सरकारी सेवा में बीता। इसके बावजूद ये हिन्दी नाट्य साहित्य के लिए नियमित रूप से अपना समय निकालते रहे। फलत: आज भी इन्हें एक सरकारी सेवक से अधिक एक साहित्यकार के रूप में जाना जाता है। एक साहित्यकार के रूप में इन्होंने कई लेखों, नाटकों आदि की रचना की। लेकिन नाटकों के लिए इनके उल्लेखनीय योगदान के कारण हिन्दी साहित्य में इनका नाम एक नाटककार के रूप में अधिक शुमार है। प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर उनके बारे में कहते हैं कि जगदीशचंद्र माथुर एक साथ ही इंडियन सिविल सर्विस के वरिष्ठ प्रशासक, साहित्यकार और संस्कृतिपुरुष थे। १६ जुलाई १९१७ को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में स्थित एक छोटे से गाँव खुर्जा में जन्मे जगदीशचंद्र माथुर ने सरकारी सेवा में रहते हुए एक ओर जहाँ बिहार के शिक्षा सचिव के पद को सुशोभित किया, वहीं १९५५ से १९६२ तक भारत सरकार के अधीन आकाशवाणी के महासंचालक के रूप में भी रहे। १९६३ से १९६४ तक तिरहुत (उत्तर बिहार) के कमिश्नर रहे, इसी दौरान वे अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विजिटिंग फेलो के रूप में नियुक्त हो कर अमेरिका चले गए। इसके अलावा वे दिसंबर १९७१ से कई वर्षों तक भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार भी रहे। और इसी वर्ष वे बैंकाक में भी प्रतिनियोजित किए गए। सरकारी सेवक के रूप में भी इन्होंने अपने विशिष्टतम प्रयोगों से सब को चौंका दिया। ऑल इंडिया रेडियो को इन्होंने आकाशवाणी का नाम दे दिया और भारत में टीवी को दूरदर्शन का नाम दे दिया। मजे की बात ये हो गई कि कालांतर में आकाशवाणी और दूरदर्शन नाम ही भारत सरकार के द्वारा एवं तमाम भारतीयों के द्वारा स्थायी रूप से स्वीकार कर लिया गया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि हिन्दी नाट्य साहित्य के साथ-साथ उन्होंने आकाशवाणी एवं दूरदर्शन को भी अपना विशिष्ट योगदान दिया। जगदीशचंद्र माथुर का हिन्दी नाट्य प्रेम उनके विद्यालयीय जीवन से ही अपने चरम पर रहा। इसी कारण उन्होंने १९३० के आसपास जहाँ तीन छोटे-छोटे नाटकों की रचना की, वहीं कालांतर में उनके नाटक चाँद, रूपाभ, भारत, माधुरी, सरस्वती जैसी उस समय की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में छपने लगे। हिन्दी नाटकों को उन्होंने अपना योगदान अपनी कलम चला कर भी दिया और इसके साथ ही कई नाटकों को कई मंचों पर अभिनीत कर भी दिया। इस कारण से हम कह सकते हैं कि जगदीशचंद्र माथुर ने हिन्दी नाटक को अपना योगदान सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों ही माध्यम से दिया। श्री माथुर के नाटकों में किसी खास का नाम नहीं लिया जा सकता है। उनके सारे नाटक अपनी बनावट, बुनावट एवं कसावट की दृष्टि से अप्रतिम है। ओ मेरे सपने, कोणार्क, पहला राजा, रीढ़ की हड्डी, आदि कोई भी नाम लिया जाए, उनके सभी नाटक रंगमंच की दृष्टि से तो सफल हैं ही, नाटक के विभिन्न तत्त्वों, कथावस्तु, देश-काल, पात्र-योजना, कथोपकथन एवं उद्देश्य की दृष्टि से भी अपना विशिष्ट स्थान रखते हैं। १९४६ में प्रकाशित एकांकी संग्रह भोर का तारा में स्वदेश प्रेम से परिपूरित पांच एकांकी संकलित हैं। भोर का तारा, कलिंग विजय, मकड़ी का जाला, रीढ़ की हड्डी एवं विजय की बेला। इस संकलन में युद्ध के वर्णन को केंद्र में रखकर कलिंग विजय एवं विजय की बेला की रचना की गई है। जिसमें से १९५० में प्रकाशित विजय की बेला में वीर कुंवर को केंद्र में रखा गया है। जबकि १९५० में प्रकाशित दूसरे एकांकी संग्रह ओ मेरे सपने में भी कुल पाँच एकांकी हैं-ओ मेरे सपने, घोंसले, कबूतरखाना, खिड़की की राह आदि। जगदीशचंद्र माथुर एक प्रयोगधर्मी नाटककार थे। इनकी प्रयोगधर्मिता का पता इस बात से भी चलता है कि १९५१ में प्रकाशित इनके नाटक कोणार्क में एक भी नारी पात्र नहीं है, फिर भी यह एक सफलतम मंचीय नाटक सिद्ध हुआ। इतिहास, संस्कृति एवं समकालीनता से युक्त इस सर्वोत्तम नाटक में संस्कृति की अनुभूति को समसामयिकता के परिप्रेक्ष्य में प्रामाणिकता प्रदान की गई है। १९५९ में प्रकाशित इनके नाटक संग्रह शारदीया के सारे नाटकों में समस्याओं को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रख कर देखने का आभास है, तो १९७० में प्रकाशित नाटक पहला राजा में व्यवस्था और प्रजाहित के आपसी रिश्तों को मानवीय दृष्टि से व्याख्यायित करने का प्रयास दिखाई देता है। इस नाटक में एक पौराणिक आख्यान के माध्यम से प्रकृति एवं मनुष्य के बीच के संबंधों की महत्ता को बड़े ही सलीके से रेखांकित करने का कार्य किया गया है। बताया गया है कि कैसे मुनियों के द्वारा पृथु को पहला राजा घोषित किया गया और उसके सत्ता क्षेत्र यानी धरती को उसके नाम के कारण से ही पृथ्वी का नाम मिल सका। १९७३ में प्रकाशित इनके नाटक दशरथ नन्दन में धर्म के प्रति समर्पण की भावानुभूति है। वहीं,रीढ़ की हड्डी नाटक में जगदीशचंद्र माथुर ने लिंग आधारित भेदभाव वाली मानसिकता से ग्रस्त हमारे समाज की विद्रूपता का पर्दाफाश करने का कार्य किया गया है। रघुकुल रीति इनका अंतिम नाटक हैं, जो उनकी मृत्युपरांत १९८५ में प्रकाशित हो सका। बंदी एवं मेरी बाँसुरी भी इनके उल्लेखनीय एकांकी रहे हैं। इन एकांकियों एवं नाटकों के अलावा श्री माथुर ने दो कठपुतली नाटक वीर कुंवर सिंह की टेक एवं गगन सवारी का भी प्रणयन किया। इसके साथ ही जगदीशचंद्र माथुर ने १९६८ में एक समीक्षा पुस्तक पंचशील नाट्य का भी सृजन किया। इस कृति के माध्यम से उन्होंने लोकनाट्य की परंपरा और उसके सामथ्र्य का विवेचन तो किया ही, नाटक की मूल दृष्टि को भी विवेचित करने का कार्य किया। एकांकियों एवं नाटकों का लेखन करने के अलावा श्री माथुर ने प्राचीन भाषा नाटक संग्रह का संपादन भी किया। १९६२ में प्रकाशित दस तस्वीरें एवं १९७२ में प्रकाशित जिन्होंने जीना जाना श्री माथुर के दो ऐसे जीवनी संकलन हैं, जिनमें उन्होंने समाज को दशा एवं दिशा देने में अपना अभूतपूर्व योगदान देनेवाले व्यक्तित्वों की जीवनियों को संकलित करने का कार्य किया है। ऐसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व का निधन हृदयगति रुक जाने से १४ मई १९७८ को राममनोहर लोहिया अस्पताल में हो गया। और इस तरह नाटकों के क्षेत्र में रचनात्मकता एवं प्रयोगधर्मिता की निर्बाध गति भी रुक सी गई। हालाँकि, बाद के कुछेक नाटककारों ने फिर से उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का कार्य किया है किंतु उनके योगदान को विस्मृत नहींकिया जा सकता। समग्र रूप से कहा जा सकता है कि हिन्दी नाट्य साहित्य के लिए अपना अप्रतिम योगदान देने में जिन लेखकों ने अपनी महती भूमिका अदा की है, उनमें जगदीशचंद्र माथुर का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
अलीगढ़। सपा-बसपा और रालोद का महागठबंधन भले ही हो गया हो लेकिन अभी भी प्रत्याशी को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। बसपा ने अजीत बालियान को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन घोषणा होने वाली सभा से लेकर आज तक वह जनता का उतना समर्थन नहीं जुटा पाएं जितना लोग आशा कर रहे थे। विगत दिनों नुमाइश के कृष्णाजलि में हुए कार्यक्रम में खाली कुर्सियां रहने के बाद से ही अजीत बालियान के टिकट को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थी। अब उन चर्चाओं को बल मिलता दिख रहा है। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी व पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय ने अब फतेहपुर सीकरी से दावेदारी खत्म करके अलीगढ़ पर दावेदारी कर दी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वो कहां से चुनाव लड़ेंगी लेकिन अलीगढ़ में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सियासी हल्कों में चर्चाएं यह भी हैं कि अजीत बालियान के प्रचार की सुस्त रफ़्तार और अधिक जनसमर्थन न मिलने से रामवीर उपाध्याय परिवार की दावेदारी ज्यादा मजबूत हो गई है। हालांकि रामवीर उपाध्याय ने अभी अलीगढ़ से लड़ने की बात नहीं स्वीकारी है, उन्होंने कहा है कि बहनजी (मायावती) जहां से कहेंगी वहां से चुनाव लडूंगा। अलीगढ़ से चुनाव लड़ने के सवाल पर रामवीर उपाध्याय ने कहा कि बहनजी जहां से लड़ने के लिए कहेंगी वहीं से लडूंगा। उन्होंने कहा कि बसपा से १९९६ में ही मैंने टिकट मांगा था। इसके बाद बहनजी का जो आदेश हुआ उसका पालन किया। अलीगढ़ में बसपा-सपा प्रत्याशी अजीत बालियान हमारे प्रत्याशी हैं, उन्हें लड़ाया जाएगा। भाजपा में जाने की उड़ी खबरों पर कहा कि ऐसा मैं सोच भी नहीं सकता। भाजपा में जाने की बातें कोरी अफवाहे हैं। मैं और मेरा परिवार बसपा के सिपाही हैं। बताते चलें कि अलीगढ़ में बसपा का एक धड़ा और नगर निगम के कुछ पार्षद अजीत बालियान का खुलकर विरोध कर रहे हैं। बसपा से जुड़े सूत्र कहते हैं कि दो से तीन दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अब देखना यह है कि अजीत बालियान की टिकट कटता है या नहीं?
बारिश खत्म होते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इसके बाद भी तामिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। तामिया . बारिश खत्म होते ही अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इसके बाद भी तामिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। इससे यहां मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां डॉक्टर की समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे लोगों को मजबूरी मे झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तामिया में तीन डॉ की पदस्थापना है जिसमें डॉ विजय सिंह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सा के अलावा बीएमओ का कार्यभार संभाल रहे हैं वही महिला डॉक्टर हिमांशु श्रीवास्तव १ माह से अनुपस्थित चल रही है इनके अलावा १0 वर्षों से तामिया में पदस्थ डॉ दिलीप मेहरा जिला चिकित्सालय में अटैच हैं इनकी वजह से तामिया में अन्य डॉक्टरों की स्थापना नहीं किया जा रहा है इसके बाद भी यहां सिर्फ एक ही डॉक्टर पदस्थ है। इससे यहां इलाज कराने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगती है। संविदा महिला डॉक्टर हिमांशु श्रीवास्तव ३१ अगस्त से लगातार अनुपस्थित है मौसम के कारण इन दिनों बुखार, मलेरिया, उल्टी.दस्त, सर्दी-खांसी सहित अन्य तरह की बीमारियां लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। अस्पताल में डॉक्टर के नहीं होने पर लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है।
नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के रायबरेली में हरचंदपुर के करीब बुधवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा हो गया। पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन से दिल्ली आ रही न्यू फरक्का एक्सप्रेस ट्रेन की इंजन समेत ६ बोगियां पटरी से उतर गई। इस भीषण हादसे में ६ लोगांे की मौत हो गई है और कई घायल हो गए हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर डिब्बों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। रेल के पटरी से उतरने की खबर मिलते ही रेलवे के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताते हुए अधिकारियों से बात कर हर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को २ लाख और घायलों के परिजनों को ५० हजार रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। गौरतलब है कि मालदा टाउन से दिल्ली आ रही न्यू फरक्का एक्सप्रेस सुबह करीब ६ बजे हरचंदपुर के करीब पटरी से उतर गई। दुर्घटना रायबरेली से ६ किलोमीटर दूर हरिचंदपुर रेलवे स्टेशन पर हुआ है। खबरों के अनुसार मरने वालों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है। घायलों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। यहां बता दें कि दुर्घटना इतना जबर्दस्त था कि डिब्बे एक दूसरे के अंदर पूरी तरह से घुस गए। अब उन्हें गैस कटर की मदद से काटकर लोगों को बाहर निकालने का काम किया जा रहा है। फिलहाल, लखनऊ और वाराणसी से एनडीआरएफ की टीमे मौके के लिए रवाना हो चुकी है। ग्रामीण और रेलवे स्टेशन कर्मचारी यात्रियों को बचाने में जुटे हैं। रेलवे प्रशासन की ओर से दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन की हेल्पलाइन नंबर जारी कर दी गई है।
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की दोहरी जिम्मेदारी संभालने वाले आईएएस अधिकारी एयरपोर्ट मैन डॉक्टर अरुण वीर सिंह को भारत विकास परिषद गौतम बुद्ध नगर द्वारा "अटल सम्मान" से विभूषित किया है। भारत विकास परिषद गौतम बुद्ध नगर शाखा के अध्यक्ष अजेय कुमार गुप्ता ने बताया कि डॉक्टर अरुण वीर सिंह एक जादुई व्यक्तित्व वाले आईएएस अधिकारी है। उन्होंने आवंटियों और स्थानीय किसानों के बहुपक्षीय मुद्दों को संबोधित किया है। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस क्षेत्र का विकास निर्धारित समय में पूरा हो। उन्होंने अपने समकक्ष आधिकारियो के लिए एक उदाहरण और आने वाले आधिकारियो के लिये एक मापदंड निर्धारित करता है।
नई दिल्ली। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी आज दौरे का अंतिम दिन है। रुहानी ने शनिवार सुबह राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान रुहानी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पीएम मोदी और रुहानी के बीच आज द्विपक्षीय वार्ता भी होनी है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर मुहर लग सकती है। माना जा रहा है कि ईरानी चाबहार बंदरगाह को लेकर भी अहम फैसला हो सकता है। इससे पहले रूहानी हैदराबाद के दो दिवसीय दौरे के बाद शुक्रवार को दिल्ली रवाना हुए थे। रूहानी ने मुस्लिम नेताओं व विद्वानों को गुरुवार की रात संबोधित किया। रूहानी ने शुक्रवार की सुबह कुतुब शाही मकबरे का दौरा किया। बाद में उन्होंने पुराने शहर की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में नमाज अदा की और सभा को संबोधित किया। अपने हैदराबाद दौरे का समापन उन्होंने हैदराबाद में बसे ईरानी लोगों को संबोधित कर किया। रूहानी दिल्ली में शनिवार को मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई करार हो सकते है।
पहले से ही जानलेवा मानी जाने वाली भारत की सड़कें अब २०१५ में और अधिक जानलेवा हो गई हैं। २०१४ के मुकाबले भारत की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में ५ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस इजाफे के बाद यह संख्या १.४६ लाख पहुंच गई है। इसका मतलब है कि भारत की सड़कों पर दुर्घटनाओं में हर रोज ४०० मौतें होती हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि हर ३.६ मिनट में एक व्यक्ति की मौत होती है। 20१४ में करीब ४.८९ लाख मौतें हुई थीं, जो 20१५ में ५ लाख के आंकड़े को भी पार कर गई हैं। यह आंकड़े परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को जगाने के लिए काफी हैं, जिन्होंने २०२० तक सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को ५० प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल इसमें कमी आने के बजाए बढोत्तरी ही होती जा रही है। राज्यों की तरफ से मिले आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक १७,६६६ मौतें हुईं। इसके बाद नंबर आता है तमिलनाडु का, जहां पर १५,६४२ लोग मारे गए। वहीं महाराष्ट्र में १३,२१२ कर्नाटक में १०,८५६ और राजस्थान में १०,5१० मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं। जहां एक ओर देश के बड़े राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं दूसरी ओर छोटे राज्यों और दिल्ली-चंडीगढ़ समेत सभी केन्द्रशासित प्रदेशों में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में कमी आई है। असम में मरने वालों की संख्या में ११५ की कमी आई और दिल्ली में ४९ मौतें कम हुईं।
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां ससुराल जान के लिए पति, पत्नी अपनी बेटी के साथ घर से हंसी-खुशी निकले थे। लेकिन तीनों का शव कुंदरकी रेलवे स्टेशन पर पड़ा हुआ मिला है। सूचना पर पहुंची जीआरपी पुलिस ने तीन शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। मुरादाबाद के कुंदरकी थाना क्षेत्र के नगला कमाल गांव के रहने वाले विजेंद्र शुक्रवार की सुबह अपनी पत्नी रेखा और कुट्टू (७) के साथ अपनी ससुराल जाने के लिए घर से निकले थे। कुछ देर बाद परिजनों को सूचना मिली की कि विजेंद्र ने परिवार सहित खुदकुशी कर ली है। विजेंद्र की कार कुंदरकी रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ी मिली और वहीं से थोड़ी दूरी पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास पटरी पर तीनों शव पड़े मिले। घटना की सूचना मिलते ही विजेंद्र के परिजन मौके पर पहुंच गए। तीनों शव देखकर परिजनों में कोहराम मच गया।
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कुछ विद्वानों का मानना है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज धरती का रुख करते हैं। ऐसे में हमें उनकी सेवा में और श्राद्ध कर्म में मन लगाना चाहिए। सेवा करने की बजाए यदि हम नई वस्तु की ओर ध्यान लगाएं तो हमारे पितृ आहत हो सकते हैं। यही वजह है कि पितृ पक्ष में नई वस्तु नहीं खरीदी जाती। श्राद्ध पक्ष को पितरों के प्रति समर्पण भाव से देखा जाता है। १५ दिनों की अवधि को पितरों का ऋण चुकाने के नजरिए से देखा जाता है। श्राद्ध करके, तर्पण करके, दान पुण्य करके उनका कर्ज उतारने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यह माना जाता है कि हम पहले से ही पितरों के कर्ज में डूबे हैं और कर्ज में डूबा व्यक्ति नई वस्तु कैसे खरीद सकता है। कुछ विद्वान ऐसे भी हैं जो पितृपक्ष में नई वस्तु की खरीद को अशुभ नहीं मानते। उनका यह मानना है कि पितृपक्ष में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में हमें नई वस्तुओं के साथ देखकर भला वे दुखी क्यों होंगे? श्राद्ध पक्ष की शुरुआत गणेश चतुर्थी के बाद और माता दुर्गा की पूजा से पहले होती है। तो अगर श्राद्ध पक्ष के आरंभ से पहले हम गणपति की पूजा कर चुके हैं तो वह अशुभ कैसे हो सकती हैं? श्राद्ध पक्ष के पीछे मां दुर्गा भी खड़ी हैं तो इसे अशुभ मानने की कोई वजह नहीं है। श्राद्ध पक्ष में हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में हमारे आस-पास ही रहते हैं और हमें आशीष देते हैं।
नेबुआ रायगंज। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र की बालिका के साथ रेप करने का मामला प्रकाश में आया है। मंगलवार को गांव में हुई पंचायत में बालिका की आबरू की कीमत ५० हजार रुपये लगाने के साथ ही आरोपी को २० चप्पल मारने की सजा सुनाई गई। बाद में इस मामले में सुलह समझौता हो जाने की बात कही जा रही है। पुलिस ने इस घटना से अनभिज्ञता जताई है। बताया जा रहा है कि थाना क्षेत्र के एक गांव की नौ वर्षीय बालिका रिश्ते में चाचा लगने वाले पड़ोस के आरोपी युवक के घर सोमवार की देर शाम टेलीविजन देखने गई थी। आरोप है कि घर में बालिका को अकेली पाकर युवक ने उसके साथ दुष्कर्म कर दिया। बालिका रोती हुई घर गई और आपबीती बताई। थोड़ी ही देर में वहां भीड़ जुट गई। लोग आरोपी के घर जाने को तैयार हुए, लेकिन कुछ लोगों ने रात का वक्त बताकर पीड़िता के घरवालों को रोक लिया। सुबह पीड़िता की मां ने डायल १०० की पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। आरोप यह भी है कि पुलिस के पहुंचते ही कुछ लोग पुन: पहुंच गए और मारपीट की बात बताकर पुलिस को लौटा दिया। बताया जा रहा है कि मंगलवार को दोपहर तक हुई पंचायत में बालिका के आबरू की कीमत ५० हजार रुपये लगाने तथा आरोपी को २० चप्पल मारने की सजा सुनाने के बाद सुलह समझौता करा लिया गया। नेबुआ नौरंगिया थाने के एसओ निर्भय सिंह ने बताया कि ऐसी कोई सूचना उन्हें नहीं मिली है। अगर ऐसी कोई बात है तो यह जघन्य अपराध है। तहरीर मिलते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव और कृति सैनन अभिनीत फिल्म बरेली की बर्फी दर्शकों को पसंद आ रही है। ऐसा बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से पता चलता है। फिल्म ने अब तक २०.०२ करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। फिल्म अपने पहले दिन २.4२ करोड़ कमाने में कामयाब रही। इस फिल्म ने शनिवार को ३.९५ करोड़ रुपये की कमाई करते हुए सप्ताहांत में अच्छी पकड़ जारी रखी। बरेली की बर्फी तीसरे दिन रविवार को ५.१५ करोड़ रुपये कमाते हुए एक बढ़िया वृद्धि दर्ज की। यह फिल्म १८ अगस्त को जारी हुई थी। फिल्म ने सोमवार को बॉक्स ऑफिस पर सफलतापूर्वक १.९० करोड़ रुपये कमाए, मंगलवार को २.०० करोड़ रुपये, बुधवार को १.6३ करोड़ रुपये और दूसरे सप्ताह के पहले दिन फिल्म ने १.३0 करोड़ रुपये बटोरे, जिससे फिल्म का कुल आंकड़ा २०.०२ करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
दतिया। (हिन्द न्यूज सर्विस)। उज्जैन में होने वाली मध्यप्रदेश राज्यस्तरीय कराते प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गुरूवार को कराते खिलाडिय़ों का दल रवाना हो गया है। इस दल में विभिन्न आयु वर्गो के बालक-बालिकाएं शामिल है। प्रतियोगिता के बारे में अधिक जानकारी देते हुए जिला प्रशिक्षक राजेन्द्र तिवारी ने बताया कि ५ जनवरी से ८ जनवरी के मध्य उज्जैन में मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय कराते प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों को कराते कोच हरि गुर्जर व विनय भार्गव लंबे समय से प्रशिक्षित कर रहे थे। इस राज्य स्तरीय कराते प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए दतिया जिले से अमन शर्मा, रंजित गुर्जर, सूरज पटेल, गौरव रायकवार, हनुमंत रायकवार, सुरेन्द्र साहू, सूरज तिवारी, आस्था गुप्ता, साधना उनिया आदि खिलाडिय़ों का चयन किया गया। गुरूवार को ग्वालियर संभाग कराते कोच संजय पाण्डे ने दतिया आकर खिलाडिय़ों से मुलाकात की तथा उन्हें प्रतियोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उनका उत्साहावर्धन किया। चयनित खिलाडिय़ों को प्रतियोगिता में भाग लेने पर खेल प्रतिनिधि राजेन्द्र निचरेले, लिटिल फ्लॉवर स्कूल के डायरेक्टर मंनिदर सिंह, संजय पाठक, प्रयास मित्रा, अखिल त्रिपाठी, अनवर अली, संजय तिवारी आदि ने बधाई दी।
फ्यूचर समाचार के जनवरी २०१४ के आलेख में आपको अपना पक्षी ज्ञात करने की विधि समझाई गई है तथा आपकी सुविधा के लिए सारणी भी संलग्न किया गया है ताकि आपको कोई असुविधा न हो तथा आप अपने जन्मपक्षी का निर्धारण आसानी से कर सकें। पंच पक्षी शास्त्र से दो भिन्न व्यक्तित्व के वर एवं कन्या के आगामी जीवन के आपसी संबंधों का विश्लेषण किया जाता है। प्रत्येक पक्षी का दूसरे पक्षी के साथ एक खास प्रकार का संबंध एवं आपसी व्यवहार होता है। दो पक्षियां आपस में मित्र हो सकते हैं, एक दूसरे के लिए सम अर्थात् न तो मित्र और न ही शत्रु अथवा एक-दूसरे के कट्टर शत्रु हो सकते हैं। आइए देखें कि दो भिन्न पक्षियों के वर एवं कन्या के बीच विवाहोपरांत कैसी समरसता अथवा सामंजस्य की भावना होती है अथवा नहीं होती है। पंच पक्षी से वैवाहिक मिलान वर-गिद्ध: कन्या-गिद्ध यद्यपि कि आप दोनों के स्वभाव एवं गुण एक जैसे हैं किंतु यह समानता वैवाहिक जीवन के लिए ठीक नहीं है क्योंकि आप दोनों सख्त, लापरवाह, बच्चों जैसी हरकतें करने वाले, जिम्मेवारी से मुंह मोड़ने वाले हैं। अपने सख्त बर्ताव के कारण आप हमेशा एक-दूसरे की भावनाओं, इच्छाओं एवं आवश्यकताओं की अवहेलना करेंगे तथा अनावश्यक रूप से लड़ते-झगड़ते रहेंगे। कठिन परिस्थितियों में आप एक-दूसरे का साथ नहीं देंगे। यदि आपको वैवाहिक सामंजस्य बनाए रखना है तो एक-दूसरे का सम्मान करें, उत्तरदायित्व को समझें। आज पति-पत्नी के बीच में तालमेल आवश्यक है। भगवान शिव की आराधना आपके लिए श्रेयस्कर है।
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज क्रिकेटर एलन बॉर्डर ने उम्मीद जताई है कि ३० मई से इंग्लैंड में शुरू हो रहे आईसीसी एकदिवसीय वर्ल्ड कप में विराट कोहली, इयोन मोर्गन और आरोन फिंच सर्वश्रेष्ठ कप्तान साबित हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया को १९८७ में अपनी कप्तानी में विश्व चैम्पियन बनाने वाले इस खिलाड़ी ने कहा कि आक्रामक शैली और तुरंत जवाब देने का कप्तानी कौशल कोहली को मोर्गन और फिंच से अगल तरह का कप्तान बनाता है। बॉर्डर ने क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू से कहा, मुझे लगता है कि विराट कोहली एक अलग प्रकार के कप्तान हैं। वह थोड़े आक्रामक किस्म के खिलाड़ी हैं और विरोधी टीम को उसी के अंदाज में जवाब देने के लिए तैयार रहते है। उन्होंने कहा, विरोधी खिलाड़ी को पता होता है कि अगर वह ऐसे कप्तान से भिड़ेंगे तो उन्हें तुरंत जवाब मिलेगा। ऑस्ट्रेलिया के १७८ मैचों में कप्तानी करने वाले बॉर्डर, मोर्गन से भी काफी प्रभावित हैं, जिनके नेतृत्व में इंग्लैंड एकदिवसीय क्रिकेट के शिखर पर पहुंचा है।
राज्य सहकारिता विभाग के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि कई प्रयासों के बावजूद, राज्य सरकार ७१० ग्राम पंचायत क्षेत्रों में बैंक शाखाएं स्थापित नहीं कर पाई और इसलिए सहकारी समितियों को बैंक के रूप में कार्य करने की अनुमति देने का फैसला किया गया। इस आईएएस अधिकारी ने कहा, 'इसी के कारण, हमने २,६६१ सहकारी समितियों को सहकारी बैंकों की शाखाओं के रूप में कार्य करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इससे बैंकिंग तंत्र के दायरे में अधिक किसानों को लाने में मदद मिलेगी।' अधिकारी ने कहा कि राज्य ने सहकारी बैंकों और सोसायटियों के माध्यम से स्व-सहायता समूहों के लिए १,२00 करोड़ रुपये के ऋण बांटने का भी फैसला किया है, और कहा कि पिछले साल यह राशि १000 करोड़ रुपये थी।
५१ मीन एगो चीन अब पाकिस्तान में ही पाकिस्तानियों पर लगा रहा नमाज पढ़ने पर पाबंदी! बेंगलुरु। कर्नाटक के १५ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों पर गुरुवार को हो रहे उपचुनावों में शाम पांच बजे तक ६० फीसदी मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचान आयोग के अनुसार शाम पांच बजे तक ६६ प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है जबकि अपराह्न चार बजे तक यह ४६.६२ प्रतिशत था। उपचुनाव राज्य में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की किस्मत तय करेगा। बीजेपी के पास विधानसभा में १०५ (एक निर्दलीय सहित) विधायक हैं। ऐसे में उसे बहुमत के लिए १५ सीटों में से कम से कम ६ सीटें जीतनी होंगी। कांग्रेस के ६६ और जेडीएस के ३४ विधायक हैं। बीएसपी के भी एक विधायक हैं। इसके अलावा एक मनोनीत विधायक और स्पीकर हैं। अगर बीजेपी ६ से कम सीटें जीतती है तो उसके लिए सरकार को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
हाथरस। यूपी के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ में शादी के तीसरे दिन ही नई नवेली दुल्हन की संदिग्ध परिस्थियों में गोली लग जाने से मौत हो गई। घटना की खबर मिलने के बाद पहुंचे दुल्हन के पिता ने ससुराली जनों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज करवाया है। मिली जानकारी के मुताबिक जयपुर निवासी सपना की शादी ९ नवंबर को सिकंदराराऊ निवासी संतोष कुमार के साथ हुई थी। १० नवंबर को अपने पिता के घर से विदा होकर वह अपने पति के घर आई थी। पति के घर में उसका तीसरा दिन था और पगफेरों की रस्म के लिए सपना को मायके भेजे जाने की तैयारियां चल रहीं थीं। तभी अचानक एक गोली चली और सारी खुशियों को ग्रहण लग गया। जब तक कोई कुछ समझता सपना गोली लगने से घायल हो गई थी। आनन फानन में ससुराल वालों ने उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। सपना की गंभीर हालत को देखते हुए डाक्टरों ने उसे अलीगढ़ मेडिकल कालेज रिफर कर दिया गया। जहां उसकी मौत हो गई। ससुराली जनों का कहना है कि रस्म के मुताबिक सपना को संतोष के साथ विदाई के दो दिन बाद मायके जाना था। जिसकी तैयारियां चल रहीं थी। इस बीच घटना हो गई। गोली कैसे चली किसने चलाई इस बात की पुष्टि नहीं पाई है। वहीं दूसरी ओर घटना की जानकारी मिलने के बाद सिकंदराराऊ पहुंचे सपना के पिता ने ससुरालीजनों के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज करवाया है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि घटना की असल वजह कोई बताने को तैयार नहीं है। अगर ससुराली जनों की सही माने तो वारदात दुर्घटनावश हुई प्रतीत होती है। उस समय सपना के साथ कौन मौजूद था? क्या शादी को लेकर पतिपत्नी के बीच कोई नपंसदी थी? ऐसी कई बातें हैं जिनको लेकर छानबीन की जानी है। फिलहाल पीड़ित पिता की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
मैं एक ही हत्मल पृष्ठ पर जावास्क्रिप्ट और ज्ञएरी कोड दोनों का उपयोग कर रहा हूँ। किसी कारण के लिए, ज्ञएरी के पुस्तकालय ठीक से काम करने से मेरे मूल जावास्क्रिप्ट कोड रोक रहा है। मुझे यह पृष्ठ मिला: ज्ञएरी कोई विरोध नहीं है जो कहते हैं कि आप ज्ञएरी.नोकॉन्फ्लिक्ट का उपयोग कर सकते हैं $ जावास्क्रिप्ट को वापस रिलीज़ करने के लिए। हालांकि, मुझे यकीन नहीं है कि यह कैसे करना है? विशेष रूप से, मुझे यकीन नहीं है कि यह कैसे सही तरीके से कार्यान्वित करें? ज्ञएरी कोड कहां जाता है, जहां जेएस कोड जाता है? यदि आप एपीआई पेज पर दिए गए उदाहरणों को देखते हैं तो यह है: उदाहरण: स्क्रिप्ट के बाकी हिस्सों में उपयोग करने के लिए ज्ञएरी के बजाए एक अलग उपनाम बनाता है। वर ज = ज्ञएरी.नोकॉन्फ्लिक्ट() ज्ञएरी में लाने के बाद वर ज = ज्ञएरी.नोकॉन्फ्लिक्ट() और फिर विवादित लिपियों में लाएं। फिर आप अपनी सभी ज्ञएरी आवश्यकताओं के लिए $ स्थान पर ज उपयोग कर सकते हैं और दूसरी स्क्रिप्ट के लिए $ उपयोग कर सकते हैं। उस के अतिरिक्त, $ $ सही नहीं जा रहा है । पिछले (यदि कोई हो) वैश्विक चर ज्ञएरी बहाल करेगा, ताकि प्लगइन्स को सही ज्ञएरी संस्करण के साथ आरम्भ किया जा सकेगा, जब एकाधिक संस्करण उपयोग किए जा रहे हों। नोकॉन्फ्लिक्ट () विधि $ शॉर्टकट पहचानकर्ता रिलीज़ करता है, ताकि अन्य स्क्रिप्ट अगली बार के लिए इसका उपयोग कर सकें।
यह खेल केवल एक मजेदार विध्वंस डर्बी अनुभव प्रदान नहीं करता है, लेकिन यह भी एक काफी यथार्थवादी सिम्युलेटर है कि वास्तविक विनाश और एक दूसरे के खिलाफ बसों दुर्घटना के रूप में मलबे अनुकरण प्रदान करता है; इसके अलावा खेल बहुत यथार्थवादी वाहन ड्राइविंग अनुभव बना भौतिकी बहुत प्रामाणिक महसूस लाता है। तो एक समर्थक आप यकीन है कि आप कुछ समय के लिए एक उच्च गति कार चालक और नियंत्रण के साथ प्रयोग के रूप में अभ्यास करने के लिए लेने के लिए बनाने की जरूरत बन गया है। डर्बी विनाश सिम्युलेटर नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा। अपनी राय के साथ एक समीक्षा छोड़ने के लिए मत भूलना। डर्बी विनाश सिम्युलेटर में कोई समीक्षाएं नहीं, पहल करें!
सैफ़ अल इस्लाम गद्दाफ़ी ने अपने संबोधन में कहा, "बेनग़ाज़ी पर विपक्ष का कब्ज़ा हो गया है और चरमपंथियों ने घोषणा की है कि देश का तीसरा बड़ा शहर अल बायदा इस्लामी अमीरात बन गया है. बैदा में केवल १४ लोग मारे गए थे और बेनग़ाज़ी में ८० लोग मरे थे. यदि ये स्थिति बनी रहती है तो देश में गृह युद्ध, विभाजन, मौतें और हिंसक संघर्ष होगा. इससे तेल और गैस के भंडार नष्ट हो जाएँगे और देश ग़रीबी और भुखमरी का शिकार हो जाएगा." उनका कहना था, "लीबिया ट्यूनिशिया या मिस्र नहीं है. विदेशों में रह रहे विपक्षी तत्व मिस्र जैसी फ़ेसबुक क्रांति लाने के प्रयास कर रहे हैं. सुरक्षाकर्मियों ने उनकी साज़िश नाकाम कर दी है. सैनिकों ने गोलियाँ इसलिए चलाईं क्योंकि वे नागरिकों के प्रदर्शनों का सामना करने में प्रशिक्षित नहीं हैं." सैफ़ अल इस्लाम ने कहा, "लीबिया की सेना बहुत अच्छी हालत में है और हज़ारों कबायली नेता गद्दाफ़ी और राजधानी की हिफ़ाज़त के लिए त्रिपोली पहुँच रहे हैं. लीबिया और उसकी क़ौम का भविष्य दांव पर है और मैं और मेरा परिवार अंत तक लड़ेगे."
अगर आप भी घर बैठे ऑनलाइन पैसा (मोने) कामना चाहते है. तो आपके पास घर बैठे ऑनलाइन पैसा कमाने (ऑनलाइन पैसा कमने) का अच्छा मौका है। जिसे आप इन ५ वेबसाइटों पर अपना रजिस्ट्रेशन करके सुविधा और समय के अनुसार १०० घंटे काम करके ६० हजार रुपए तक हर महीने कमा सकते हैं। इस तरह की कई बेवसाइट्स मौजूद हैं, जिनके जरिए आप बिना किसी इन्वेस्टमेंट के काम शुरू कर सकते हैं। इन वेबसाइट्स से बिना इन्वेस्टमेंट के ऑनलाइन पैसे कमाने के लिए सबसे पहले आपको एम टर्क, ओ डेस्क, स्क्रिप्टेड, फीवर और इलैंस वेबसाइट्स पर रजिस्टर्ड होना होगा। इसके बाद आप ऑनलाइन जॉब के लिए साइन-इन कर सकते हैं। साथ ही, साइन-इन करते समय आपको इंटरनेशनल डिजिटल वॉलेट पर अपना रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। रजिस्ट्रेशन का विकल्प वेबसाइट को साइन-इन करने के बाद आता है। ऐसा इसलिए जरूरी है, ताकि काम पूरा होने के बाद बिना किसी रुकावट के पैसा आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाए। क्या है इंटरनेशनल डिजिटल वॉलेट, यह एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट है, जिसका उपयोग बिजनेस संबंधी काम के लिए किया जाता है। यह हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है और यह आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होता रहता है। एम टर्क (अमेजन मेकैनिकल टर्क) एक मार्केट प्लैटफॉर्म है, जहां फ्रीलांसर और डेवलपर्स के तौर पर बिजनेस से संबंधित काम कराया जाता है। इस प्लेटफॉर्म पर कारोबार से संबंधित छोटे-छोटे काम होते हैं, जिसको ऑनलाइन पूरा किया जाता है। इन सभी काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर ऑनलाइन काम करने वाले को सौंप दिया जाता है। इसके बाद हिट के आधार पर उसका पेमेंट होता है। उदाहरण के तौर पर एक शॉपिंग बिल से किसी आइटम को निकालकर एक्सेल सीट में उसे जोड़ना होता है। ऐसे काम को पूरा करने में ३ मिनट से भी कम समय लगता है, जिसके लिए एम टर्क आपको ५ रुपए (मोने) देती है। अमेजन मेकैनिकल टर्क डॉट कॉम के साथ काम शुरू करने के लिए आप पर लॉग इन करें। इसके बाद आप स्टेप बाई स्टेप इसको क्लिक करते जाएंगे और आपका काम पूरा हो जाएगा। टेप थ्री :- किए गए काम का पेमेंट लें। फीवर डॉट कॉम एक यूनीक प्लैटफॉर्म हैं। यहां जुड़कर आप अच्छी कमाई कर सकते हैं। हालांकि, डॉट कॉम सिर्फ ऐसे काम ही करवाता है, जिनको पूरा करने की लागत ५ डॉलर तक आती है। अगर आप लोगो डिजाइन, लेखन और अनुवाद करने का काम जानते हैं तो फीवर डॉट कॉम आपको हर काम के लिए ५ डॉलर देगा। इसके अलावा फीवर डॉट कॉम इसलिए भी पॉपुलर है, क्योंकि यह ऐसे लोगों को काम सौंपती है जो घर बैठे तय समय-सीमा में उसे पूरा कर सकें। अगर आप इसके साथ जुड़ना चाहते हैं तो पर लॉग इन करना होगा। ऑनलाइन इंटरनेट से पैसा कमाने के संबंधित जानकारी या इंटरनेट वेबसाइट से जुड़ी कोई भी सवाल हो तो कॉमेंट के माध्यम से पूछ सकते है,
टानटन (इंग्लैंड),९ जून - जेम्स नीशम (३१-५) और लाकी फग्र्यूसन (३७-४)की कहर बरपाती गेंदों के बाद कप्तान केन विलियमसन (नाबाद 7९) की बेहतरीन अर्धशतकीय पारी के दम पर न्यूजीलैंड ने यहां के कूपर एसोसिएट्स काउंटी ग्राउंड पर शनिवार को खेले गए आईसीसी विश्व कप के अपने तीसरे मुकाबले में अफगानिस्तान को सात विकेट से हरा दिया। टास जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने अफगानिस्तान को ४२.१ ओवरों में १72 रनों पर ही ढेर कर दिया और फिर ३२.१ ओवरों में तीन विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। मार्टिन गुपटिल (०) इस मैच में खाता नहीं खोल सके लेकिन कोलिन मुनरो ने २२, रास टेलर ने ४८ और टाम लाथम ने नाबाद १3 रन बनाए। विलियमसन की ९९ गेंदों की पारी में नौ चौके शामिल हैं जबकि टेलर ने ५२ गेंदों पर छह चौके और एक छक्का लगाया। न्यूजीलैंड ने जो भी विकेट गंवाए, वे आफताब आलम के खाते में गए। जहां तक अफगानिस्तान की बात है तो उसके लिए हसमातुल्लाह शाहिदि ने सबसे ज्यादा ५९ रन बनाए। इसके अलावा हजरतुल्लाह जाजई ने ३४, नूर अली जादरान ने ३१ और अफताब आलम ने १४ रनों का योगदान दिया। न्यूजीलैंड की ओर से कोलिन ग्रैंडहोम ने भी एक सफलता हासिल की। नीशम इस विश्व कप में पहली बार पांच विकेट लेने वाले गेंदबाज बने और इसके लिए उन्हें मैन आफ द मैच चुना गया।
हम विशेष हैं अन्य एमएल ११२९ का नाम निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं / कारखाने चीन से। कम कीमत / सस्ते के रूप में उच्च गुणवत्ता के साथ थोक अन्य एमएल ११२९ का नाम, चीन से अग्रणी ब्रांडों में से एक अन्य एमएल ११२९ का नाम में से एक, शानदोंग ज़िशंग केमिकल को.लैड। थोक चीन से अन्य एमएल ११२९ का नाम , लेकिन कम कीमत के अग्रणी निर्माताओं के रूप में सस्ते अन्य एमएल ११२९ का नाम खोजने की आवश्यकता है। बस अन्य एमएल ११२९ का नाम पर उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांडों पा कारखाना उत्पादन, आप आप क्या चाहते हैं, बचत शुरू करते हैं और हमारे अन्य एमएल ११२९ का नाम का पता लगाने के बारे में भी राय, आप में सबसे तेजी से उत्तर हम करूँगा कर सकते हैं।
जानें क्या है पुनर्वसु नक्षत्र ? कैसे होते है इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति ? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह गुरु और नक्षत्र देवता अदिति है। आकाश मंडल में पुनर्वसु सातवां नक्षत्र है। अदिति इस नक्षत्र की इष्टदेवी है। पुनर्र का अर्थ आवृत्ति है तथा वसु का अर्थ प्रकाश की किरण है। इस प्रकार पुनर्वसु का अर्थ पुनः प्रकाश बनने से है। इस नक्षत्र का प्रतीक तीरों का तरकश है, जो इच्छाओं या महत्वाकांक्षाओं के प्रति प्रयास करने की क्षमता को दर्शाता है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को समृद्धि, शिष्टाचार, सद्भावना और जन कल्याण की भावना रखने वाले ग्रह के रूप में जाना जाता है। बृहस्पति की ये विशेषताएं इस नक्षत्र के माध्यम से प्रदर्शित होती हैं, जिसके चलते इस नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक समृद्ध,शिष्टाचार तथा परोपकारी प्रवृति के ही देखे जाते हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के अंदर दैवीय शक्तियाँ होती हैं। पुनर्वसु नक्षत्र के व्यक्ति बेहद मिलनसार, दूसरों से प्रति प्रेमपूर्वक व्यवहार रखने वाले होते हैं। इनका शरीर काफी भारी और याद्दाश्त बहुत मजबूत होती है। इन पर जब कभी कोई मुसीबत आती है,तो कोई अदृश्य शक्ति इनकी सहायता करने अवश्य आती है। ये लोग काफी धनी भी होते हैं। इनके गुप्त शत्रुओं की संख्या अधिक होती है। इस नक्षत्र के लोगों को समय-समय पर ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। इन लोगों को अपने नेक और सरल स्वभाव के कारण समाज में मान-सम्मान और आदर प्राप्त होता हैं। पढ़ने-लिखने में यह काफी होशियार होते हैं। अपनी योग्यता के बल पर सरकारी क्षेत्र में उच्च पद प्राप्त करते हैं। बृहस्पति के प्रभाव के कारण यह आर्थिक मामलों के अच्छे जानकार होते हैं, आर्थिक क्षेत्र में यह सफलता प्राप्त करते हैं। प्रबंधन तथा व्यवसाय में भी इन्हें अच्छी सफलता मिलती है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं।
लाठी थानांतर्गत धायसर गांव में सोमवार को मिले गुब्बारे व उपकरण से ग्रामीणों में सनसनी फैल गई। लाठी थानाक्षेत्र के धायसर गांव के पास सोमवार शाम एक गुब्बारा व उससे लगा उपकरण गिरा। जैसलमेर/पोकरण. लाठी थानांतर्गत धायसर गांव में सोमवार को मिले गुब्बारे व उपकरण से ग्रामीणों में सनसनी फैल गई। लाठी थानाक्षेत्र के धायसर गांव के पास सोमवार शाम एक गुब्बारा व उससे लगा उपकरण गिरा। सूचना पर आस पड़ौस से ग्रामीण एकत्र हो गए। संदिग्ध गुब्बारा व उपकरण देखकर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने बताया कि गुब्बारे के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली गई है। यह गुब्बारा व उपकरण मौसम विभाग का है। जिसे गुब्बारे के साथ उड़ाया जाता है। गुब्बारा फूटने पर यह उपकरण गिर जाता है। इससे डरने की कोई जरुरत नहीं है। गुब्बारे व उपकरण को कब्जे में लेकर कार्रवाई की जाएगी। पोकरण. क्षेत्र के दांतल गांव में स्थित उपस्वास्थ्य केन्द्र वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नति का इंतजार कर रहा है। गौरतलब है कि गांव में वर्षों पूर्व क्षेत्र में चिकित्सा सेवा मुहैया करवाने को लेकर उपस्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की गई थी। समय के साथ क्षेत्र की आबादी बढ़ी, लेकिन इस उपस्वास्थ्य केन्द्र को क्रमोन्नत नहीं किया गया है। दांतल ग्राम पंचायत के झलोड़ा भाटियान, हेमावास, जीयासर, गड़ेली कुंआ, खेतासर, भूरासर, सांगाबेरा में करीब आठ हजार की आबादी निवास करती है। इन ग्रामीणों को छोटी से छोटी बीमारी के उपचार के लिए फलसूण्ड, भणियाणा, पोकरण अथवा जोधपुर जाना पड़ रहा है। दांतल में मात्र उपस्वास्थ्य केन्द्र होने के कारण एक एएनएम के भरोसे ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी सात गांवों से आने वाले मरीजों के उपचार, टीकाकरण, मलेरिया, डेंगू आदि फैलने के दौरान टांकों में टेमीफोस डालने आदि सभी कार्यों का जिम्मा है। ऐसे में क्षेत्र के मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। ग्रामीणों की ओर से कई बार उपस्वास्थ्य केन्द्र को क्रमोन्नत करने के लिए सरकार व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गर्म स्वभाव असामान्य, अत्यधिक भावनात्मक अभिव्यक्तियों, साधारण चिड़चिड़ाहट के लिए विस्फोटक प्रतिक्रियाएं, असंयम, क्रोध की प्रवृत्ति है। विचाराधीन घटना पुरुषों में अधिक आम है। महिलाओं को भी गर्म स्वभाव का खतरा होता है, लेकिन उनका संस्करण अक्सर पीड़ित व्यक्ति की स्थिति से पीछे हट जाता है और आमतौर पर अपराधों या उन्माद में पाया जाता है। हिस्टीरिया और स्पर्शशीलता को स्वभाव का स्त्रैण रूप माना जाता है। इस अवधारणा को अक्सर खराब चरित्र लक्षणों के रूप में जाना जाता है। यह पूरी तरह सच नहीं है, क्योंकि गर्म स्वभाव के दो रूप हैं: उचित और खाली। प्रश्न में अवधारणा को सबसे अच्छा लक्षण नहीं माना जाता है, क्योंकि बेकाबू क्रोध गंभीरता से अस्तित्व और पर्यावरण के साथ संबंधों को विकृत कर सकता है। जब तंत्रिका उत्तेजना, जो अक्सर क्रोध और आक्रामकता के साथ होती है, तो यह कहना मुश्किल है कि क्या कहा गया था और सही शब्दों का चयन करें। परिणामस्वरूप, छोटे स्वभाव वाले व्यक्ति अक्सर अपने अयोग्य व्यवहार की अभिव्यक्तियों के कारण शर्मिंदा होते हैं। हालांकि, एक छोटी अवधि के बाद, कई परिस्थितियों के प्रभाव में इस स्थिति को दोहराया जाता है। गर्म स्वभाव मनोविज्ञान में एक खतरनाक घटना है, क्योंकि यह नकारात्मक भावनाओं को चेतना की गहराई में ले जाता है, जिससे मानसिक समस्याएं होती हैं, संचार और आत्म-धारणा में विकार होता है। अत्यधिक गुस्सा भड़काने के कारणों में विभिन्न तनाव या अन्याय शामिल हैं। सामान्य कारक जो प्रश्न की स्थिति का कारण बनते हैं: नींद की नियमित कमी, बुरी आदतें, निरंतर चिंता, अस्वास्थ्यकर आहार, कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का दुरुपयोग, बढ़ती चिंता, संचित थकान, विटामिन की कमी, अवसाद, जीवन की परेशानियां। अक्सर, बढ़ी हुई उत्तेजना संक्रामक रोगों, मानसिक विकारों, पाचन तंत्र के रोगों, मधुमेह मेलेटस की उपस्थिति का संकेत देती है। इसके अलावा, थायराइड की शिथिलता के कारण गर्म स्वभाव हो सकता है। महिला आबादी में गर्म स्वभाव अक्सर गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति के दौरान होता है। इसी तरह की स्थिति शरीर में हार्मोनल परिवर्तन के साथ जुड़ी हुई है। हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन में कमी के कारण एडम के बेटे अत्यधिक उत्तेजना से पीड़ित हैं। साथ ही, विज्ञान ने सिद्ध किया है कि यह विशेषता, यदि यह एक स्थिर विशेषता है, तो एक वंशानुगत प्रकृति है। जिन व्यक्तियों का आत्म-सम्मान कम होता है, वे अक्सर उसके सामने बार को नजरअंदाज कर देते हैं। परिणामस्वरूप, वे आदर्श "ई" की अपनी दूर की छवि के अनुरूप नहीं हो सकते। इससे पारिवारिक रिश्तों में निराशा, काम के माहौल में समस्याएं आती हैं। परिणाम एक निरंतर उपस्थित चिड़चिड़ापन है, दृढ़ता से मन में निहित है। इससे बचने के लिए, अन्य व्यक्तियों की सफलताओं के साथ अपनी स्वयं की उपलब्धियों की तुलना करना आवश्यक नहीं है। आक्रामकता, मौखिक अपमान, हमले के हमले अत्यधिक छोटे स्वभाव के लक्षण हैं। कोई भी व्यक्ति मनोवैज्ञानिक बन सकता है, लेकिन अक्सर आक्रामकता आंतरायिक छोटे स्वभाव के विकार से उत्पन्न होती है, जो अक्सर मानवता के एक मजबूत आधे हिस्से को प्रभावित करती है। वर्णित विकार की एक विशेषता को मामूली स्थिति के लिए अपर्याप्त प्रतिक्रिया माना जाता है, मामूली बहाना, आलोचना, बर्ब, तनाव, रिश्तों में कठिनाई। प्रत्येक विषय भड़कने में सक्षम है, लेकिन बहुमत अभी भी अत्यधिक भावनात्मक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में सक्षम है, लेकिन प्रश्न में विकार के साथ, व्यक्ति अपनी प्रतिक्रियाओं में अजेय है। उसकी सनक हमेशा अनुमति से परे होती है और समय-समय पर दोहराती रहती है। आंतरायिक स्वभाव के विकार को व्यवहार संबंधी असामान्यताओं के रूप में संदर्भित किया जाता है, जो क्रोध के विस्फोटक एपिसोड की विशेषता है, अक्सर एपोगी तक पहुंच जाता है। इस तरह की चमक उन परिस्थितियों के लिए अनुपातहीन हैं जिन्होंने उन्हें जन्म दिया। आवेगी आक्रामकता अनैच्छिक है और किसी भी उकसावे, वास्तविक या योजनाबद्ध प्रतिक्रिया के कारण होती है। कुछ व्यक्ति जब्ती से पहले भावात्मक परिवर्तनों का प्रदर्शन करते हैं। वर्णित असामान्यता एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य विकार है जिसका इलाज किया जाना चाहिए क्योंकि यह हिंसा में बदल सकता है। मित्र, सहकर्मी, रिश्तेदार पीड़ित हो सकते हैं। इस विकार से पीड़ित व्यक्तियों को अन्य मानसिक विकारों का खतरा होता है। इनमें शराब और नशीले पदार्थों की लत के लगातार मामले हैं। इसके अलावा, उम्र के साथ वर्णित विकार अक्सर मायोकार्डियल समस्याओं, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया का कारण बनता है। इसलिए, गर्म स्वभाव से छुटकारा पाने का सवाल इसकी प्रासंगिकता के बिना नहीं है। आज, इस विकार को आत्म-नियंत्रण और व्यवहार प्रतिक्रिया के विघटनकारी, आवेगी विकार के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वर्णित विचलन से पीड़ित मरीजों में विभिन्न शारीरिक लक्षणों (पसीना, आक्षेप, रेट्रोस्टर्ननल स्पेस में संयम, चिकोटी) के लक्षण दिखाई देते हैं। आक्रामक व्यवहार अक्सर राहत की भावना के साथ होता है, कभी-कभी खुशी की भावना के साथ। देर से पश्चाताप ऐसी भावनाओं को बदल देता है। इस विचलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता आक्रामक शिकारियों के प्रतिरोध की कमी के असतत एपिसोड की उपस्थिति है, जिससे गंभीर दुर्भावनापूर्ण कार्य या चीजों का विनाश होता है। प्रकोप के दौरान दिखाई गई आक्रामकता की डिग्री उत्तेजना के लिए आनुपातिक नहीं है या मनोसामाजिक तनाव का प्रभाव है। वर्णित विचलन का निदान करना मुश्किल है, क्योंकि केवल निदान करना संभव है यदि अन्य मानसिक विकारों को बाहर रखा जाता है, जो कि गर्म स्वभाव के एपिसोड के साथ भी हो सकता है, उदाहरण के लिए, असामाजिक या सीमावर्ती व्यक्तित्व विकार, उन्माद प्रकरण, व्यवहार संबंधी विकार। इसके अलावा, इसी तरह की नैदानिक अभिव्यक्तियाँ अल्जाइमर रोग, कुछ रसायनों के प्रत्यक्ष शारीरिक प्रभावों (फार्माकोपियाल ड्रग्स, मादक दवाओं), और सिर की चोटों के कारण हो सकती हैं। - मानस के अन्य विकृति की उपस्थिति के कारण आक्रामकता का प्रकोप नहीं होता है। अत्यधिक स्वभाव से पीड़ित व्यक्ति, अपने ही रिश्तेदारों के अस्तित्व को जटिल बनाते हैं। कोई भी तिपहिया ऐसे विषयों में एक नकारात्मक अपर्याप्त प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है। यह सहकर्मियों, परिचितों, रिश्तेदारों के साथ बातचीत को जटिल बनाता है। अत्यधिक गुस्सा अक्सर पारिवारिक रिश्तों में कलह पैदा करता है। इस प्रकार, बाहरी जीवन से आवेगों के लिए एक अपर्याप्त नकारात्मक प्रतिक्रिया है और कैरियर के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। गर्म स्वभाव से छुटकारा पाने के तरीके को समझने के लिए, आपको इसकी प्रकृति से निपटने की आवश्यकता है। भावनाओं की कोई भी अभिव्यक्ति उत्तेजना के लिए तंत्रिका तंत्र की प्रतिक्रिया है। बयानों में व्यक्तिगत अविश्वास में असंगति, गुस्से का तेज प्रकोप, चारों ओर हो रही हर चीज में असमान असहमति अक्सर नर्वस ओवरस्ट्रेन का एक परिणाम है। इसलिए, अगर इन कारकों से अत्यधिक गर्म स्वभाव उत्पन्न होता है, तो एक सामान्य आराम, एक पूर्ण नींद या एक शौक से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। जब किसी व्यक्ति को गंभीर जीवन की उथल-पुथल का सामना करना पड़ता है, तो कोई भी मामूली घटना आक्रामकता के एकल प्रकोप को भड़काने या अधिक गंभीर बीमारियों के जन्म का स्रोत बन सकती है। इसलिए, मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि नकारात्मक भावनाओं को बाहर निकलने का रास्ता दिया जाना चाहिए, अन्यथा वे स्थिति को बढ़ा देंगे। व्यक्ति अंदर की ओर डुबकी लगाएगा और पर्यावरण के लिए घृणा पैदा करना शुरू कर देगा। चरित्र के एक अविभाज्य लक्षण में अत्यधिक गुस्सा के पुनर्जन्म का खतरा भी है। चूंकि मनोविज्ञान में गर्म स्वभाव को एक खतरनाक स्थिति माना जाता है, जिससे शरीर प्रणालियों के कामकाज में गड़बड़ी होती है, यह आक्रामकता के अनियंत्रित प्रकोप से निपटने के लिए आवश्यक है। स्पोर्ट, विशेष रूप से इसकी किस्मों को उच्च शारीरिक गतिविधि से जुड़ा हुआ है, आक्रामकता के प्रकोप को रोकने में एक विशेष प्रभावशीलता है। खेल गतिविधियां अत्यधिक तंत्रिका तनाव के उन्मूलन में योगदान करती हैं। स्व-सम्मोहन और केले के ऑटो-प्रशिक्षण के तत्वों की उपेक्षा करना भी अनुशंसित नहीं है। व्यायाम निष्पादन में काफी सरल हैं, लेकिन प्रभाव जल्दी आता है। तेजी से परिणाम प्राप्त करने के लिए, इन अभ्यासों को श्वास अभ्यास के तत्वों के साथ संयोजित करने की सिफारिश की जाती है। इसके अलावा, आपको क्रोध पैदा करने वाले वाक्यांशों या कार्यों पर तुरंत प्रतिक्रिया न करने के लिए एक नियम बनाना चाहिए। एक प्रतिक्रिया बयान या कार्रवाई से पहले इसे रोकने की सिफारिश की जाती है। आप मानसिक रूप से ५ तक गिनती कर सकते हैं। सचमुच कुछ सेकंड में, जलन थोड़ी कम हो जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप आक्रामकता का कोई प्रकोप नहीं होगा। सकारात्मक भावनाओं के साथ इसे संतृप्त करने के लिए अपने स्वयं के अस्तित्व में विविधता लाने की भी सिफारिश की जाती है। रिश्तेदारों के साथ प्रकृति से अधिक बार बाहर निकलना, सिनेमाघरों में जाना, दोस्तों से मिलना, साहित्य पढ़ना आवश्यक है। हमें अत्यधिक संयम के हार्मोनल उत्पत्ति को बाहर नहीं करना चाहिए। एक योग्य एंडोक्रिनोलॉजिस्ट यहां आक्रामकता के एपिसोड से छुटकारा पाने में मदद करेगा।
आर्यावर्त डेस्क मंगलवार, मार्च ०६, २०१८ देश, नई दिल्ली ६ मार्च, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने यहां मंगलवार को धनशोधन मामले में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की सीबीआई हिरासत तीन दिनों के लिए बढ़ा दी। इससे पहले सीबीआई ने दावा किया था कि इस मामले में कार्ति की संलिप्तता साबित करने के लिए उसके पास नए पर्याप्त सबूत हैं। सीबीआई ने इससे पहले मंगलवार को पूछताछ के लिए कार्ति चिदंबरम की नौ और दिन की हिरासत मांग की थी। उन्हें पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया गया था और वह अब सीबीआई की हिरासत में हैं। न्यायाधीश सुनील राणा ने अपने पांच पन्नों के आदेश में कहा, "कार्ति चिदंबरम की सीबीआई हिरासत आरोपी से पूछताछ और पूर्ण जांच के लिए तथा सबूत को बचाने के लिए जांच तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बढ़ाना 'जरूरी' है, जो मुकदमे के लिए उपयोगी और सत्य को सामने लाने वाला साबित हो सकता है।" इससे पहले बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच घंटों चली बहस के दौरान, कार्ति के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा कि उनका मुवक्किल 'एक आतंकवादी नहीं है' कि उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए। सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग कर रहे हैं और जब भी सीबीआई चाहेगी, उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की तरफ से बहस करते हुए कहा कि एजेंसी को कार्ति चिदंबरम से पूछताछ की जरूरत है क्योंकि एजेंसी को पर्याप्त नए सबूत मिले हैं। मेहता ने कहा, "सोमवार को कुछ और कंपनियों के नाम सामने आए हैं और इसके लिए हिरासत जरूरी है।" सीबीआई ने अदालत में दस्तावेज दाखिल किए हैं, जिसे आईएनएक्स मीडिया मामले में कार्ति चिदंबरम द्वारा किए गए विदेशी लेन-देन से संबंधित माना जा रहा है। मेहता ने आरोप लगाया कि कार्ति इस मामले में सबूत के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं और अगर अदालत उसकी हिरासत बढ़ाएगी तो, वह उनसे अपराध कबूल करवा लेंगे। उन्होंने कहा कि कार्ति चिदंबरम ने पूछताछकर्ताओं को अपने फोन के पासवर्ड देने से इनकार कर दिया, जो 'एक सबूत है' और वह सहयोग नहीं कर रहे हैं। मेहता ने कहा, "मैं इस बात से सहमत हूं कि कार्ति को चुप रहने का अधिकार है, लेकिन जब संबंधित प्रश्न पूछा जाता है तो, उन्हें जवाब देना चाहिए।" वहीं, सिंघवी ने अदालत से कहा कि आरोपी पहले ही पांच दिन एजेंसी की हिरासत में बिता चुके हैं और मुंबई में उनका सामना इंद्राणी मुखर्जी से केवल २५ मिनट तक ही कराया गया था। इंद्राणी पूर्व मीडिया कार्यकारी हैं, जो हत्या के मामले में जेल में हैं। साथ ही वह इस धनशोधन मामले में गवाह भी हैं। सिंघवी ने तर्क दिया कि सीबीआई द्वारा रिमांड को आगे बढ़ाने वाले आवेदन में कोई भी कारण नहीं दिया गया है। फिर क्यों वह कार्ति की हिरासत को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मामले की पिछली सुनवाई में सीबीआई ने अदालत से कहा था कि कार्ति चिदंबरम का मुखर्जी से आमना-सामना कराया जाएगा। सीबीआई ने कहा था कि मुखर्जी ने कथित रूप से दावा किया है कि कार्ति ने उनसे १० लाख डॉलर की मांग की थी और उन्होंने कार्ति को बतौर रिश्वत वह रकम अदा की थी। उन्होंने कहा, "कार्ति बम लिए हुए आतंकवादी नहीं हैं। उनसे बिना हिरासत में लिए भी पूछताछ की जा सकती है।" मेहता ने इसके जवाब में कहा कि सिर्फ इंद्राणी का बयान ही आरोपी के खिलाफ सबूत नहीं है। अदालत ने कार्ति चिदंबरम को कोर्ट रूम में उनके पिता पी. चिदंबरम और माता नलिनी से १० मिनट के लिए मुलाकात करने की इजाजत दी। इससे पहले, इससे संबंधित एक और मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में कार्ति चिंदबरम की याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा। कार्ति ने इस मामले में उनके खिलाफ ईडी द्वारा जारी समन को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने हालांकि याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्ति की इस मांग को नकार दिया कि ईडी को उन्हें गिरफ्तार नहीं करने दिया जाए। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को मुकर्रर करते हुए कहा कि न्यायालय केवल कार्ति के वकील कपिल सिब्बल द्वारा उठाए गए कानून के प्रश्न पर सुनवाई करेगा।
मिर्ज़ापुर(ब्यूरो) विन्ध्यवासिनी मन्दिर व पक्का घाट का जायजा लेने के पश्चात पुलिसअधीक्षक ने कहा कि , जल्द ही मन्दिर सुरक्षा में अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की जाएगी । जिसके पश्चात मन्दिर जाने वाले सभी मार्गो पर डीएफएमडी लगाये जायेंगे । गर्भगृह में जाने वाले प्रथम प्रवेशद्वार के पहले से डिवाइडर लगाया जाएगा जिससे दर्शनार्थियों को दबाव न झेलना पड़े । फोर्स उपलब्ध होने के पश्चात मन्दिर तक पहुँचने वाले वाहनों को दूर से ही रोक जाएगा । चार प्रमुख स्नान घाटों पर बैरिकेटिंग की व्यवस्था की जाएगी । नई पुलिस फोर्स की उपलब्धता पर मन्दिर परिसर में ड्यूटी पर तैनात पुलिस अपने मोबाइल से भी अराजको पर नजर बनाए रखेंगे । जिलाधिकारी ने कहा कि दुकानदार अपने दुकानों के सामने कूड़ादान रखे जिससे गन्दगी सड़क पर नही फैलेगी । इस दौरान पण्डा समाज के अध्यक्ष राजनपाठक भी मौजूद रहे ।
सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस: महिलाओं का घरेलू हिंसा से बचाव कानून क्या हैं? महिलाओं का घरेलू हिंसा से बचाव कानून २००५ एक दिवानी कानून है जिसका मकसद घरेलू रिश्तों में हिंसा झेल रहीं महिलाओं को तत्काल व आपातकालीन राहत पहुंचाना है। इस कानून का मुख्य उद्देष्य किसी भी महिला को हिंसा मुक्त घर में रहने का अधिकार दिलाना है। हमारे इस समाज में महिलाओं के लिए न मायके में कोई जगह है और नही ससुराल में। यही कारण है कि महिलाएं सर छुपाने के लिए छत और पैर टिकाने के लिए जमीन के एवज में बहुत से अनचाहे समझौते करती रहती हैं। यह भारत में पहला ऐसा कानून है जो महिलाओं को अपने घर में रहने का अधिकार देता है। यह कानून घरेलू हिंसा को रोकने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार को जबाबदेह व जिम्मेदार ठहराता है। इस कानून के अनुसार महिला के साथ हुई घरेलू हिंसा के साक्ष्य प्रमाणित किया जाना जरूरी नहीं हैं। महिला के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को ही आधार सुनिष्चित माना जायेगा क्योंकि अदालत का मानना है कि घर के अन्दर हिंसा के साक्ष्य मिलना मुश्किल है। इस कानून के मुताबिक घरेलू हिंसा यानी ऐसी कोई भी हरकत या व्यवहार जो कि महिला के शरीर या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होकर दर्द या चोट पहुंचाये। ऐसा कोई भी आपत्तिजनक व अनचाहा यौनिक व्यवहार व हरकत जो महिला को शारीरिक कष्ट दे या अपमानित करें या उनके मान-सम्मान पर चोट पहुंचाये। ऐसी समस्त घरेलू संसाधन व सुविधाएं जिसकी महिला व उसके बच्चे को जरूरत हो एवं जिस पर उनका अधिकार बनता हो, पर नियन्त्रण एवं उससे वन्चित रखना। इस कानून के तहत घरेलू हिंसा की रोक थाम के लिए जज या अदालत तीन दिन के अन्दर-अन्दर बचावकारी आदेश एवं गिरफ्तारी के वारन्ट जारी करेंगे। घरेलू हिंसा से पीडि़त कोई भी महिला अदालत में जज के समक्ष स्वयं अथवा वकील, सेवा प्रदान करने वाली संस्था या संरक्षण अधिकारी की मदद से अपनी सुरक्षा के लिए बचावकारी आदेष ले सकती है। पीड़ित महिला के अलावा कोई भी पड़ोसी, परिवार का सदस्य, संस्थाएं या फिर खुद भी महिला की सहमति से अपने क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में शिकायत दर्ज कराकर बचावकारी आदेष हासिल किया जा सकता है। घरेलू घटना रपट (डोमेस्ट्रिक इंसिडेंट रिपोर्ट) एक दफ्तरी प्रारूप है जिसमें घरेलू हिंसा की रिपोर्ट दर्ज करायी जाती है। इस कानून के तहत मिलने वाली राहत में बचावकारी आदेष, काउन्सिलिंग, क्षतिपूर्ति, भरण पोषण, बच्चों का संरक्षण और जरूरत पड़े तो रहने की जगह भी दी जाती है। अगर पीडि़त की रिपोर्ट से जज को ऐसा लगे कि पीडि़त को हिंसा कर्ता से आगे भी खतरा हो सकता है तो जज हिंसा कर्ता (पुरूष) को घर से बाहर रहने के आदेष दे सकते हैं। इस कानून के अन्तर्गत नियुक्त प्रोटेक्शन ऑफिसर (संरक्षण अधिकारी) की जिम्मेदारी यह है कि पीडि़त महिला को आवेदन लिखने में मदद करना, आवेदन जज तक पहुंचाना एवं कोर्ट से राहत दिलाना। परन्तु ये सब जानकारी पीडि़तों तक पहुंचाना एक बहुत बड़ा काम है। महिलाओं के मुद्दों पर काम कर रहे संगठन कई परेशानियों और चुनौतियों का सामना करते हैं। जैसे कि आश्रित गृह की व्यवस्था न होना, संरक्षण अधिकारियों का न मिलना, वकील न मिलना, समय पर जुर्माना न मिलना और केस को गम्भीरता से न लिया जाना। यह भी एक गम्भीर स्थिति है कि पिछले चार सालों में उत्तर प्रदेश को इस काम के लिए केवल साढ़े चार लाख रूपयों का बजट मिला है। कानून के मुताबिक एक केस तीन महीने की भीतर खत्म हो जाना चाहिए, पर २००५ से लेकर आज तक हजारों में से केवल ११ केस ऐसे रहें हैं जो तीन महीने के अन्दर सुलझाये गये हैं। घरेलू हिंसा का शिकार हुई सभी महिलाओं में से केवल एक चैथाई ही रिपोर्ट दर्ज कराती हैं।
शिक्षा कैसी हो इस बारे में बहुत कम दार्शनिकों ने विचार व्यक्त किए हैं। यह बात अलग है किन इन दार्शनिकों ने परम्परागत शिक्षा ग्रहण नहीं की। आधुनिक भारत में जहां कुछ पिछडे हुए लोगों को उठाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है वहीं अगडों में से भी अधिकांश के पास नौकरी और सुरक्षित भविष्य नहीं है। राष्ट्रवादी संगठनों ने मैकाले को गाली दी और अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली। कुछ संगठन और मिशनरीज स्कूलें भी चला रहे हैं ताकि बचपन में ही बच्चों को धर्म विशेष का बीज पकडा दिया जाए। ताकि बडे होकर वे सफेद, लाल, गेरूए या हरे वस्त्र पहनकर धर्मयुद्ध में कूद सकें। किसी बच्चे को तार्किक और स्पष्ट सोच के लिए न केवल पढाई की बल्कि तर्कपूर्ण वातावरण की भी आवश्यकता होती है। अगले पोस्ट में मैं बात करुंगा ओशो के नजरिए की।
अन्य प्रयोग हेतु, कॉर्न (बहुविकल्पी) देखें। संगीत के नज़रिए से, वह एल्बम हेवी मेटल, हिप हॉप, ग्रंज और फंक का एक मिश्रण था, जिसमें बाद के तत्वों को बैंड की रचनाओं के तालबद्ध दृष्टिकोण में समाहित किया गया था. "ब्लाइंड", एल्बम का पहला एकल था जिसे पर्याप्त ध्यान और प्रसारण प्राप्त हुआ. ११ अक्तूबर, १९९४ को कॉर्न की रचनाएं एक बार जारी होने के बाद, बैंड ने रेडियो या वीडियो स्टेशनों के समर्थन के बिना ही लगातार दौरा किया. यह बैंड, अपनी सजीव गहन प्रस्तुतियों पर ही पूर्ण रूप से निर्भर था जिसने विशाल पंथ-सदृश समर्पित प्रशंसकों को पैदा किया. यह उन प्रशंसकों का ही प्रयास था जिसने कॉर्न को बिलबोर्ड २०० पर पहुंचाया जो अंततः १९९६ में #७२ पर चढ़ गया,[२] जहां धातु के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए "शूट्स एंड लैडर" उनका पहला ग्रेमी नामांकन बना.[१०] अपने पहले बड़े दौरे पर, कॉर्न ने मर्लिन मैन्सन के साथ-साथ डांज़िग के लिए शुभारम्भ किया. अन्य बैंड, जिनके लिए कॉर्न ने १९९५ में शुभारम्भ किया, वे थे मेगाडेथ, 3११, फिअर फैक्ट्री,
-आंखों के पास का कालापन दूर करने के लिए आप रात को सोने से पहले अपना चेहरा ताजे पान से धुलें। चाहें तो फेसवॉश का उपयोग कर सकते हैं। अब चेहरा कॉटन के सॉफ्ट तौलिया से साफ करें और थोड़ी-सी रूई को नारियल तेल में भिगोकर आखों के चारों तरफ लगाएं। -ध्यान रखें आपको इसके लिए कुछ ही बूंद नारियल तेल की जरूरत होगी। मात्र २ से ३ बूंद नहीं तो पूरा चेहरा ऑइली लगने लगेगा। अब इस तेल से अपनी आंखों के चारों तरफ हल्के हाथों से हल्की-हल्की मसाज करें, जब तक आपकी स्किन इस तेल को सोख ना ले। जब स्किन पूरी तरह से तेल सोख ले तो आप मसाज करना बंद करें और चेहरे पर कोई और क्रीम लगाए बिना ऐसे ही सो जाएं। यह आपकी आंखों के काले घेरे कम करने मदद करेगा साथ ही यह आपकी आखों की नाजुक त्वचा में नमी बनाए रखने का काम भी करेगा। -जिन लोगों की स्किन बहुत अधिक सेंसेटिव होती है, उनके साथ इस तरह की दिक्कत आती है कि काले घेरे के साथ ही उनके चेहरे पर फाइन लाइन्स और झाइयां उभर आती हैं। इस दिक्कत का अगर आप भी सामना कर रहे हैं तो जरूरी है कि आप नारियल तेल और अरंडी के तेल यानी कैस्टर ऑइल को बराबर मात्रा में मिक्स करके एक सलूशन बनाएं और इसे एक खूबसूरत बॉटल में भर लें। हर रात को सोने से पहले आंखों सहित पूरे चेहरे पर इस तेल की ३ से ४ बूंदें लेकर मसाज करें। यह मसाज आपको हर रात १० से १५ मिनट तक करनी है और हल्के हाथों से करनी है। मसाज करते वक्त आप अपनी उंगलियों को चेहरे पर क्लाक वाइज घुमाएंगे। मसाज करने के बाद आप टिश्यू पेपर या कॉटन के सॉफ्ट हैंकी से चेहरा पौंछ लें। इससे त्वचा पर बनी तेल की परत हट जाएगी। -अब आप सो जाएं और सुबह हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धोकर अपनी पसंद की क्रीम लगाएं। ऐसा करीब २ हफ्ते तक लगातार करने पर आपके चेहरे से काले घेरे और झाइयां हल्की होते-होते गायब हो जाएंगी और आप पाएंगे निखरी हुई रंगत।
हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे, आजादी का मतलब नहीं है समझते। इस दिन पर स्कूल में तिरंगा है फहराते, गाकर अपना राष्ट्रगान फिर हम, तिरंगे का सम्मान है करते, आजादी का अर्थ सिर्फ यही है समझते। वक्ता अपने भाषणों में, न जाने क्या-क्या है कहते, उनके अन्तिम शब्दों पर, बस हम तो ताली है बजाते। हम नन्हें-मुन्ने है बच्चे, आजादी का अर्थ सिर्फ इतना ही है समझते। विद्यालय में सभा की समाप्ति पर, गुलदाना है बाँटा जाता, भारत माता की जय के साथ, स्कूल का अवकाश है हो जाता, शिक्षकों का डाँट का डर, इस दिन न हमको है सताता, छुट्टी के बाद पतंगबाजी का, लुफ्त बहुत ही है आता, बस इतना ही है समझते, आजादी के अवसर पर हम, खुल कर बहुत ही मस्ती है करते।।
*प्रदेश की सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में छात्रसंघ चुनाव २८ अगस्त को* *जयपुर, १६ अगस्त !!* उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने बुधवार को सम्पूर्ण राज्य की उच्च षिक्षण संस्थाओं में होने वाले छात्रसंघ चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। कार्यक्रम के अनुसार २८ अगस्त, २०१७, सोमवार को सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में चुनाव करवाए जाएंगे और उसी दिन चुनाव परिणाम भी घोषित किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री ने शिक्षा संकुल स्थित सभागार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदाता सूचियों का प्रकाशन २१ अगस्त, मतदाता सूचियों पर आपत्ति प्राप्त करने के लिए २२ अगस्त, मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन २२ अगस्त को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उम्मीदवारी के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख २३ अगस्त है। उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच एवं आपत्तियां इसी दिन प्राप्त की जा सकती हैं। वैध नामांकन सूची का प्रकाशन २४ अगस्त को किया जाएगा, इसी दिन उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लिया जा सकेगा। श्रीमती माहेश्वरी ने बताया कि उम्मीदवारों की अंतिम नामांकन सूची का प्रकाशन भी २४ अगस्त को दोपहर २-५ तब किया जाएगा। मतदान २८ अगस्त को प्रातः ८ बजे से अपराह्न १ बजे तक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतगणना एवं चुनाव परिणामों की घोषणा तथा विजयी उम्मीदवारों का शपथ अपराह्न २ बजे से कार्य समाप्ति तक की जाएगी। शकुंतलम् कॉलेज, २२ पीएस, रायसिंहनगर के सभी छात्र-छात्राओं से ये अनुरोध है कि प्रेजिडेंट(अध्यक्ष) पद के लिए भूपेन्दर कुमार और जनरल सेक्रेटरी(महासचिव) पद के लिए दीपक सारस्वत(शर्मा) के पक्ष में अपना अमूल्य वोट देकर इनकी और हम सबकी जीत सुनिष्चित करें। शकुंतलम् पी.जी. महाविद्यालय से छात्र संघ चुनावों में प्रेजिडेंट(अध्यक्ष) के पद के लिए भाई भूपेन्दर कुमार चुनाव लड़ रहे हैं। आप सभी से अनुरोध है की भाई भूपेन्दर कुमार को अपना अमूल्य वोट देकर विजयी बनाएं। शकुंतलम् पी.जी. महाविद्यालय, २२ पीएस, रायसिंहनगर से भाई दीपक सारस्वत(शर्मा) महासचिव के पद पर चुनाव लड़ रहें हैं। आपसे अनुरोध है कि भाई दीपक सारस्वत(शर्मा) के पक्ष में अपना अमूल्य वोट देकर इन्हें विजयी बनावें। शाकुंतलम महाविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं से अनुरोध है कि २८ अगस्त, २०१७ वार-सोमवार को वोट देते समय प्रेजिडेंट(अध्यक्ष) पद के लिए भाई भूपेन्द्र कुमार और जनरल सेक्रेटरी(महासचिव) पद के लिए भाई दीपक सारस्वत(शर्मा) का नाम अवश्य याद रखें और अधिक से अधिक वोटिंग इनके पक्ष में करके विजयी बनावें।
शिलोंग, खानापारा & जुवाई, तीर लॉटरी रेसल्ट्स १० डिसेंबर २०१९: इस महीने क्रिसमस और न्यू ईयर जैसे बड़े त्योहार आने वाले है, और ऐसे में भारत के सभी राज्य के लॉटरी विभाग वाले भी अपने सभी हिस्सेदार के लिए एक अनमोल तोहफा लेकर आए हैं। इन सभी में सबसे पहला नाम आता है तीर लॉटरी का, बता दें कि तीर लॉटरी सबसे पुरानी और सबसे ज्यादा यकीन करने वाली एकमात्र विश्वसनीय लॉटरी है। अगर आपने भी तीर लॉटरी में हिस्सा लिया है तो, या फिर आप एक नए हिस्सेदार है तो आज ही अपना नाम दर्ज कराएं क्योंकि शुभ काम में देरी कैसी। आज अगर हम खोज बीन करें तो मेघालय की आधे से ज्यादा जनता तीर लॉटरी के जरिए अपने सभी सपनों को पूरा करते हुए नजर आ रही है। इसके अलावा आज मेघालय में वंगला फेस्टिवल जैसे बड़े त्योहारों में भी तीर लॉटरी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। आज तीर लॉटरी पर भरोसा करना काफी ज्यादा आसान है, बस शर्त यह है कि आपकी उम्र कम से कम १८ साल के ऊपर होनी चाहिए और आपके अंदर है कुछ काम करने का जज्बा होना चाहिए। नीचे तीर लॉटरी के नतीजों और समय के बारे में पूर्ण जानकारी दी गई है। जुवाई तीर लॉटरी का रिजल्ट दोपहर २:३० बजे घोषित किए जाएंगे, पहले दौर के परिणाम दोपहर ३:०० बजे घोषित किए जाएंगे। नोट:: १० दिसंबर २०१९ के शिलोंग तीर, खानापारा तीर, जुवाई तीर रेसल्ट के नतीजों को बस कुछ घंटों बाद दोपहर ३:०० बजे ऑनलाइन आप सभी के सामने प्रस्तुत कर दिया जाएगा। इन सभी नतीजों को आप शाम ४:३0 बजे संपूर्ण तरीके से हमारे इसी पेज पर आके बिना किसी दिक्कत के आराम से देखते हैं। हमारी साइट रोज के लॉटरी रिजल्ट के नतीजों को दिखाने में एक बड़ा योगदान देती है ताकि आपको किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो। शिलॉन्ग तीर, खानापारा तीर, और जुवाई तीर लॉटरी से जुड़ी और जानकारी जानने के लिए हमारे साथ बने रहिये।
बादाम न सिर्फ पाचन क्रिया बेहतर बनाता है बल्कि क्रेविंग भी कम करता है। पाचन क्रिया बनती है बेहतर- रातभर पानी में भिगोकर रखे बादाम खाना से हमारी पाचन क्रिया को मज़बूत और स्वस्थ बनती है। जर्नल ऑफ फूड साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन में ये पाया गया कि भीगे कच्चे बादाम खाने से पेट जल्दी साफ होता है और प्रोटीन पचाना आसान हो जाता है। बादाम का छिलका निकल जाने से उसके छिलते में मौजूद एंजाइम अलग हो जाते हैं और इस वजह से फैट तोड़ने में आसानी होती है। ऐसे में पाचन क्रिया और पोषक तत्वों का अवशोषण आसान हो जाता है। दिल की सेहत बनती है अच्छी- जर्नल ऑफ न्यू ट्रिशन में प्रकाशित एक अध्यीयन के अनुसार, बादाम एक बहुत ही शक्तिशाली एंटीऑक्सीाडेंट एजेंट हैं, जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉ ल के ऑक्सी्करण को रोकने में मदद करता है। बादाम के ये गुण दिल को स्वस्थज रखने और पूरे हृदय प्रणाली को नुकसान और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेकस से बचाने में मदद करता है। अगर आप दिल की बीमारी के किसी भी रूप से पीड़ित हैं तो स्व स्थस रहने के लिए अपने आहार में भीगे हुए बादाम को शामिल करें। वेट लॉस में होती है मदद -अपनी डायट में भीगे हुए बादाम को शामिल करने से आपका वज़न जल्दी घट सकता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ऑबेसिटी रिलेटिड मेटाबॉलिक डिसॉर्र में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, लो कैलोरी डायट में बादाम शामिल करने से वज़न जल्दी घटाने में मदद मिलती है। बादाम न सिर्फ पाचन क्रिया बेहतर बनाता है बल्कि क्रेविंग भी कम करता है। ये मोटापे का एक बड़ा कारण मेटाबॉलिक सिंड्रोम से लड़ने में भी मदद करता है।
मसिंतोष १९८४ में आपोल इनक. द्वारा विकसित ऑपरेटिंग सिस्टम (मैक) है। जैसे-जैसे मैक ओएस उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ती है, इस ऑपरेटिंग सिस्टम में प्रकट भेद्यता और कई सुरक्षा कमजोरियां उचित सुरक्षा उपाय नहीं किए जाने पर उपयोगकर्ता डेटा से समझौता कर सकती हैं। जनवरी २०१९ के अंत में कुकीमवेयर मैलवेयर खोजा गया था। यह पासवर्ड और उपयोगकर्ता क्रेडेंशियल्स चुराता है। यह दो-कारक प्रमाणीकरण को दरकिनार करने, पीड़ित के बटुए तक पहुंचने और उपयोगकर्ता की क्रिप्टोक्यूरेंसी चोरी करने के लिए आवश्यक जानकारी इकट्ठा करने के लिए पाठ संदेश वाले आइट्यून्स का उपयोग कर सकता है। मई २०१८ में, क्रिप्टोमिनर म्शेल्पर एप्लिकेशन ने मैक ओएस को लक्षित किया। संक्रमित उपयोगकर्ताओं ने देखा कि उनके प्रशंसक बहुत तेजी से घूम रहे थे और उनकी परिधीय सामान्य से अधिक गर्म थी, यह दर्शाता है कि एक पृष्ठभूमि प्रक्रिया संसाधनों पर एकाधिकार कर रही थी। आप उम्मीद कर सकते हैं कि क्रिप्टोक्यूरेंसी खनिक भविष्य में अधिक से अधिक खतरनाक हो सकते हैं। फरवरी २०१८ में, मैक उपयोगकर्ताओं को एक नकली एडोब फ्लैश प्लेयर इंस्टॉलर के माध्यम से मैक मैलवेयर के एक संस्करण के बारे में चेतावनी दी गई थी। स्थापना के दौरान, उन्नत मैक क्लीनर की एक प्रति स्थापित की जाती है जो इंगित करती है कि इसने आपके सिस्टम के साथ समस्याओं का सामना किया है। उन्नत मैक क्लीनर और क्रॉसड्राइडर के विभिन्न घटकों को हटाने के बाद भी, यह पाया गया कि इस तरह के मैलवेयर अभी भी सिस्टम में मौजूद थे। अपने सिस्टम को सभी प्रकार के साइबर हमले से रोकने के लिए, आपको सबसे अच्छा स्थापित करना होगा मैक के लिए वीपीएन, जो आपको एक सार्वजनिक नेटवर्क पर निजी तौर पर संवाद करने की अनुमति देता है, असुरक्षित और बिना लाइसेंस के। अधिकांश वीपीएन टूल में आपके डेटा को सुरक्षित करने के लिए विशिष्ट एन्क्रिप्शन संस्करण हैं। सुरक्षा: एक वीपीएन पूरे उपयोगकर्ता के वेब सत्र को एन्क्रिप्ट करता है। यह प्रत्येक वेबसाइट को बैंक या अन्य वित्तीय साइट के रूप में सुरक्षित बनाता है। बैंडविड्थ संपीड़न: एक वीपीएन आपको भेजने से पहले सर्वर पर सभी ट्रैफ़िक को संपीड़ित करता है। इससे आप अपने डेटा तक अधिक पहुंच बना सकते हैं। पहुँच: विभिन्न कंपनियों द्वारा उनकी सेवाओं के स्थान और समय के बारे में कई ऑनलाइन प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा, कई दमनकारी सरकारें ऐसी सूचनाओं को प्रतिबंधित करती हैं जो "स्वतंत्र सोच" का कारण बन सकती हैं। एक वीपीएन उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट पर हर चीज के बिना सेंसर और सुरक्षित पहुंच की अनुमति देता है। कॉन्फिडेन्शियालित: एक आभासी निजी नेटवर्क उपयोगकर्ताओं के पते को पहचानता है और उनकी पहचान को ट्रैक करने से बचाता है। इसके अलावा, पूरेवप्न मैक उपयोगकर्ताओं के लिए पूर्ण कार्यक्षमता प्रदान करता है, जो डिजिटल सुरक्षा को उच्च स्तर तक बढ़ाता है। उदाहरण के लिए; मैक सॉफ्टवेयर के लिए पूरेवप्न हाई-स्पीड सर्वर के साथ आता है जो नॉन-बफर स्ट्रीमिंग अनुभव और बेहद तेज़ डाउनलोड स्पीड प्रदान करता है। एक और महत्वपूर्ण विशेषता दन्स लीक के खिलाफ सुरक्षा है। यह भेद्यता एक इंटरनेट सेवा प्रदाता, साथ ही रास्ते में किसी भी ईवसड्रॉपर को अनुमति देती है, यह देखने के लिए कि उपयोगकर्ता किन वेब साइटों पर जा सकते हैं। यह संभव है क्योंकि ब्राउज़र दन्स क्वेरीज़ सीधे इस्प् के दन्स सर्वर पर भेजी जाती हैं। पूरेवप्न आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता की सुरक्षा करता है और आपके इप पते को प्रकट करने वाली किसी भी गतिविधि को रोकता है और आपके सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। पूरेवप्न आपके और तीसरे पक्ष के खिलाफ एक ढाल के रूप में काम करता है, जिसके माध्यम से आने वाले और बाहर जाने वाले सभी ट्रैफ़िक पूरेवप्न सर्वर के माध्यम से प्रेषित होते हैं। आप फ़िल्टर किए गए ट्रैफ़िक प्राप्त करते हैं जो आपको सुरक्षित रूप से इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति देता है।
मुंबई। टाटा संस के अध्यक्ष पद से हटा दिए गए साइरस मिस्त्री और उनकी जगह अंतरिम अध्यक्ष बने रतन टाटा गुरुवार को होने वाली टाटा समूह के बोर्ड सदस्यों की बैठक में आमने-सामने होने वाले थे, लेकिन मिस्त्री इस बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे। टाटा संस के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में हुई बैठक में हिस्सा लेकर बाहर निकले बोर्ड सदस्य विजय सिंह ने इसकी पुष्टि की। बोर्ड के दो अन्य सदस्यों फरीदा खंबाटा और राल्फ स्पेथ भी इस बैठक में नहीं पहुंचे। टाटा संस के बोर्ड सदस्यों में रतन टाटा, ईशात हुसैन, साइरस पी. मिस्त्री, विजय सिंह, नितिन नोहरिया, रोनेन सेन, फरीदा खंबाटा, वेणु श्रीनिवासन, अजय पीरामल, अमित चंद्रा, राल्फ स्पेथ और एन. चंद्रशेखरन शामिल हैं।
बोस्टन, मा: नेशनल साइंस बोर्ड (न्सब) ने आज घोषणा की कि "प्रसिद्ध और मानक-सेटिंग" विज्ञान टेलीविजन श्रृंखला नोवा, जो पीबीएस पर प्रसारित होती है, और प्राइमेटोलॉजिस्ट जेन गुडॉल योगदान के लिए इसके पहले वार्षिक लोक सेवा पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं। विज्ञान और इंजीनियरिंग की सार्वजनिक समझ। "वैज्ञानिक समुदाय में कई पुरस्कार हैं, लेकिन यह विशेष होगा क्योंकि इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले लोग और संस्थान अपने काम में ज्ञान, समझ और मानवता की भावना प्रदान करके हर रोज अमेरिकियों के दिल और दिमाग तक पहुंचते हैं," रिचर्ड ज़ारे, न्सब अध्यक्ष ने कहा सार्वजनिक सेवा के लिए नया पुरस्कार मई में वाशिंगटन, नेशनल प्रेस क्लब में वार्षिक न्सब अवार्ड्स डिनर में प्रस्तुत किया जाएगा। सालों के दौरान नोवा को हर शीर्ष प्रसारण सम्मान मिला है, लेकिन कार्यकारी निर्माता पाउला एप्सेल का कहना है कि यह उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है। और नोवा टीम। एप्सेल कहते हैं, "देश में प्रमुख विज्ञान संस्थान हमारे काम के लिए हमारी सराहना करते हैं क्योंकि हम अपने २५ वें सीज़न को लॉन्च करने के लिए तैयार हैं।" "नोवा निर्माता आज दुनिया में कहीं भी हो रहे विज्ञान की खोज के लिए बहुत मेहनत करते हैं, और उन कहानियों पर एक तरह से रिपोर्ट करते हैं जो दोनों बुद्धिमान हैं और इसमें दर्शकों को शामिल किया जाता है कि विज्ञान कैसे होता है।" "जेन गुडाल एक अग्रणी प्राइमेटोलॉजिस्ट हैं जिन्होंने हमारी संवेदनशीलता को अन्य प्रजातियों की गरिमा को बढ़ाया है और हमें दुनिया पर अपनी खुद की जगह को बेहतर ढंग से समझने में मदद की है।" "वह हम सभी के लिए एक प्रेरणा के रूप में कार्य करती हैं, जो प्रकृति को समझना चाहती हैं, और विज्ञान में कैरियर चुनने वाली युवा महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल के रूप में हैं।" डेविड पर्लमैन, इस वर्ष के पुरस्कार के लिए चयन समिति के अध्यक्ष, ने गुडल के योगदान को अपने शोध से परे उद्धृत किया, जिसमें "उनके जीवनकाल के लिए काम उनके जीवन के परिणामों को व्यापक संभव सार्वजनिक (ओं), और गुडाल के" संस्थानों के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क सहित वैज्ञानिक उद्यम में युवाओं और वयस्कों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए। ज़रे ने अपने २५ वें सीज़न की पूर्व संध्या पर पब्स और नोवा सीरीज़ को बुलाया और अब ५०० कार्यक्रमों को पास करते हुए कहा, "एक उज्ज्वल बीकन विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समझने के लिए हमारे रास्ते को रोशन करता है। नोवा ने हमें विज्ञान प्रदान करने के लिए मानक निर्धारित किए हैं कि विज्ञान कैसे और क्या किया जाता है। कौन क्या करता है। " पर्लमैन ने नोवा को अपनी बधाई देते हुए कहा, "यह एक अमेरिकी संस्था बन गई है, जो अपने विशाल पीबीएस दर्शकों को नियमित रूप से स्पष्ट, सटीक और व्यापक स्तर के कार्यक्रमों में प्रवेश करती है, जो विज्ञान के लगभग हर पहलू की खोज करती हैं।" पर्लमैन ने समान गुणवत्ता के विज्ञान कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने के लिए वाणिज्यिक प्रसारण और केबल चैनलों पर एक बड़ा प्रभाव होने के लिए नोवा की भी प्रशंसा की। "यह इतना महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में अपनी जागरूकता बढ़ाते हैं और हमारे सभी जीवन में मौलिक और व्यावहारिक अनुसंधान नाटकों की सराहना करते हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय विज्ञान बोर्ड ने यह वार्षिक पुरस्कार बनाया है," पर्लमैन ने कहा। अब इसके २४ वें सीजन में, व्गभ साइंस यूनिट द्वारा पब्स के लिए नोवा का उत्पादन किया जाता है। पाउला एस अप्सेल डब्ल्यूजीबीएच साइंस यूनिट की निदेशक हैं और एनओवीए के कार्यकारी निर्माता हैं। नोवा के लिए प्रमुख धन पार्क फाउंडेशन, नॉर्थवेस्टर्न म्यूचुअल लाइफ और ओमेगा कॉर्पोरेशन द्वारा प्रदान किया जाता है। न्सब लोक सेवा पुरस्कार नवंबर, १९९६ में स्थापित किया गया था। प्रत्येक पुरस्कार दो मई, एक व्यक्ति को, एक संगठन को दूसरा दिया जाएगा। यह पुरस्कार न केवल व्यक्तियों और संगठनों के वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग योगदान को मान्यता देगा, बल्कि शोध और अवधारणाओं के बारे में आम जनता की समझ को बढ़ावा देने के लिए गतिविधियाँ भी करेगा जो खोज का मार्ग प्रशस्त करेगा।
राजनीति के आपराधीकरण को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण पर चिंता जताते हुए तमाम राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया है कि आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को चिह्नित कर के ४८ घंटों के भीतर उनकी पूरी प्रोफाइल पार्टी की वेबसाइट पर अपलोड करें। कोर्ट ने कहा,पिछले चार लोकसभा चुनावों में इसमें काफी वृद्धि हुई है। इस क्रम में सभी राजनीतिक पार्टियां आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार का नामांकन स्पष्ट होने के ४८ घंटे के भीतर उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करें। राजनीतिक क्षेत्र में बढ़ते आपराधीकरण को रोकने के प्रयास काफी समय पहले से किये जा रहे हैं। मीडिया के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के चयन का कारण अपनी वेबसाइटों पर अपलोड करें। साथ ही, कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को भी चेताया है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किए जाने को अदालत की अवमानना माना जाएगा। ऐसे में यदि पार्टियों ने कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया तो निर्वाचन आयोग इस मामले को कोर्ट तक ले आएगी। कोर्ट ने सियासी पार्टियों के लिए गाइडलाइन जारी की हैं। कोर्ट ने कहा है कि पिछले चार आम चुनावों से राजनीति में आपराधीकरण तेजी से बढ़ा है। इसके अनुसार, यदि राजनीतिक दलों द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को टिकट दिया जाता है तो उसका आपराधिक विवरण पार्टी की वेबसाइट पर और सोशल मीडिया पर देना होगा। साथ ही, उन्हें यह भी बताना होगा कि किसी बेदाग को टिकट क्यों नहीं दिया गया। जस्टिस एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने राजनीतिक पार्टियों को यह भी निर्देश दिया है कि राजनीतिक पार्टियां ऐसे उम्मीदवारों के विवरण को फेसबुक और ट्विटर जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी शेयर करें। इसके अलावा एक स्थानीय व एक राष्ट्रीय अखबार में भी इस विवरण को प्रकाशित किया जाए। शीर्ष कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे उम्मीदवारों के चयन के बाद ७२ घंटों के भीतर उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को लेकर राजनीतिक पार्टियों को इस बारे में चुनाव आयोग को सूचित करना होगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने १० अप्रैल २०२० को ग-२० असाधारण ऊर्जा मंत्रियों की आभासी बैठक में भाग लिया। भारत, अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवाओं की सप्लाई करने के बाद ऊर्जा के क्षेत्र में भी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने को तैयार है। इस बैठक को सऊदी अरब द्वारा बुलाया गया था और इसकी अध्यक्षता सऊदी अरब ऊर्जा मंत्री द्वारा की गई थी। जी-२० देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत इस वैश्विक संकट के दौरान भी ऊर्जा की खपत का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। इस बैठक में मांग में कमी और उत्पादन अधिशेष के बीच स्थिर ऊर्जा बाजारों को सुनिश्चित करने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की गई। जी-२० समूह के ऊर्जा मंत्रियों की ओर से ११ अप्रैल २०२० को एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी गयी। संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक जी-२० देशों के ऊर्जा मंत्रियों ने महामारी कोविड-१९ की वैश्विक चुनौती के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल एवं ऊर्जा बाजार की स्थिरता को सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। कोरोना संकट के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जी-२० देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष देश के रूप में सऊदी अरब ने की। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज़ के साथ जी-२० के सभी देशों के ऊर्जा मंत्री इस बैठक में विशेष रूप से मौजूद रहे। जबकि ऊर्जा के साथ तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन ओपेक, आईईए (इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन) और इंटरनेशनल एनर्जी फोरम (आईईएफ) विशेष रूप से आमंत्रित थे। कोरोना संकट को लेकर विश्वभर में जताई जा रही आशंकाओं के बीच ऊर्जा क्षेत्र में मांग कम रहने की आशंका बड़ी-बड़ी आर्थिक महाशक्तियों को सता रही है। इस मौके पर इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-१९ से निपटने को लेकर जी-२० देशों की मानवीय पहल की प्रशंसा कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में ८ करोड़ से अधिक लोगों को उज्ज्वला गैस की नि:शुल्क आपूर्ति की जा रही है। १.७ लाख करोड़ से अधिक के राहत पैकेज के अंतर्गत उठाए गए इस कदम से जहां ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के साथ सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा। वहीं ग्लोबल एनर्जी डिमांड को भारत से रफ्तार मिलेगी। इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा की मांग को गति देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से और भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधान ने तेल बाजार में आ रहे उतार-चढ़ाव पर कहा कि भारत हमेशा तेल बाजार में स्थिरता का पैरोकार रहा है, जिससे कि न सिर्फ उत्पादकों बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा हो। उन्होंने इस मौके पर तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा तेल की आपूर्ति को लेकर उठाए गए प्रभावी कदमों की भी प्रशंसा की। बयान में यह भी कहा गया कि तेल बाजार की स्थिति पर जी-२० देश अगली बैठक सितंबर में करेंगे। लेकिन यदि जरूरी हुआ तो सितंबर से पहले भी बैठक हो सकती है। साथ ही सदस्यों ने सिर्फ तेल बाजार की स्थिरता के लिए प्रतिबद्धता जताई। इससे पहले ०९ अप्रैल २०२० को ओपेक प्लस बैठक में रिकॉर्ड उत्पादन कटौती के लिए बनी योजना पर अकेले मेक्सिको असहमत था। कोविड-१९ के कारण विश्वभर में कच्चे तेल की मांग और आपूर्ति में असाधारण कमी आई है जिससे ऊर्जा बाजार में काफी अस्थिरता देखी जा रही है। इसके कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लाखों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है।